लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

गुरुवार, 21 जुलाई 2016

519. भरोसा (क्षणिका)

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भरोसा ******* ढेरों तकनीक हैं,  भरोसा जताने  और तोड़ने की सारी की सारी  इस्तेमाल में लाई जाती हैं   पर  भरोसा जताने या  तोड़ने के ल...
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गुरुवार, 7 जुलाई 2016

518. मैं स्त्री हूँ (पुस्तक 63)

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मैं स्त्री हूँ  *******   मैं स्त्री हूँ   मुझे ज़िंदा रखना उतना ही सहज है जितना सहज   मुझे गर्भ में मार दिया जाना   मेरा विक...
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बुधवार, 29 जून 2016

517. अनुभव (क्षणिका)

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अनुभव   *******       दोराहे,  निश्चित ही द्वन्द्व पैदा करते हैं   एक राह छलावा का,  दूसरा जीवन का   इनमें कौन सही   इसका पता...
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शनिवार, 18 जून 2016

516. मन-आँखों का नाता (4 सेदोका)

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मन-आँखों का नाता   ***   1. गहरा नाता   मन-आँखों ने जोड़ा   जाने दूजे की भाषा,   मन जो सोचे-   अँखियों में झलके   कहे सम...
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गुरुवार, 16 जून 2016

515. तय नहीं होता (तुकांत)

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तय नहीं होता *******   कोई तो फ़ासला है जो तय नहीं होता   सदियों का सफ़र लम्हे में तय नहीं होता ।      अजनबी से रिश्तों की ग...
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शनिवार, 4 जून 2016

514. सूरज नासपिटा (चोका - 7)

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सूरज नासपिटा    *** सूरज पीला   पूरब से निकला   पूरे रौब से   गगन पे जा बैठा,   गोल घूमता   सूरज नासपिटा   आग बबूला   ...
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शुक्रवार, 20 मई 2016

513. इश्क़ की केतली

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इश्क़ की केतली *******   इश्क़ की केतली में   पानी-सी औरत  और  चाय पत्ती-सा मर्द   जब साथ-साथ उबलते हैं चाय की सूरत   चाय क...
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रविवार, 8 मई 2016

512. माँ (मातृ दिवस पर 5 हाइकु) पुस्तक 79

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माँ *******    1.   छोटी-सी परी   माँ का अँचरा थामे   निडर खड़ी ।      2.   पराई कन्या   किससे कहे व्यथा   लाचार ...
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रविवार, 1 मई 2016

511. कैसी ये तक़दीर (क्षणिका)

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कैसी ये तक़दीर *******   बित्ते भर का जीवन कैसी ये तक़दीर नन्ही-नन्ही हथेली पर भाग्य की लकीर छोटी-छोटी ऊँगलियों में चुभती है हुनर क...
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सोमवार, 4 अप्रैल 2016

510. दहक रही है ज़िन्दगी (तुकांत)

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दहक रही है ज़िन्दगी   *******   ज़िन्दगी के दायरे से भाग रही है ज़िन्दगी   ज़िन्दगी के हाशिये पर रुकी रही है ज़िन्दगी ।       बेव...
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शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016

509. अप्रैल फ़ूल (क्षणिका)

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अप्रैल फ़ूल    ******* आईने के सामने रह गई मैं भौचक खड़ी   उस पार खड़ा वक़्त ठठाकर हँस पड़ा   बेहयाई से बोला-   तू आज ही नहीं बनी ...
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गुरुवार, 24 मार्च 2016

508. फगुआ (होली के 10 हाइकु) पुस्तक 78

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फगुआ   *******   1.   टेसू चन्दन   मंद-मंद मुस्काते   फगुआ गाते ।     2.   होली त्योहार   बचपना लौटाए   शर्त लगाए...
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शुक्रवार, 18 मार्च 2016

507. पगडंडी और आकाश (पुस्तक - 22)

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पगडंडी और आकाश   ******   एक सपना बुन  कर   उड़ेल देना मुझ पर मेरे मीत   ताकि सफ़र की कठिन घड़ी में   कोई तराना गुनगुनाऊँ,   ...
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मंगलवार, 8 मार्च 2016

506. तू भी न कमाल करती है

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तू भी न कमाल करती है   *******   ज़िन्दगी तू भी न कमाल करती है!   जहाँ-तहाँ भटकती फिरती   ग़ैरों को नींद के सपने बाँटती   पर...
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सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

505. मुक्ति का मार्ग (20 हाइकु)

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मुक्ति का मार्ग  ***   1.   मुक्ति का मार्ग   जाने कहाँ है गुम   पसरा तम ।     2.   कैसी तलाश   भटके मारा-मारा   ...
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मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016

504. अर्थहीन नहीं

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अर्थहीन नहीं...   ******   जी चाहता है   सारे उगते सवालों को   ढेंकी में कूटकर   सबकी नज़रें बचाकर   पास के पोखर में फ़ेंक आ...
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मंगलवार, 26 जनवरी 2016

503. आज का सच

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आज का सच *** थोप देते हो  अपनी हर वह बात      जो तुम चाहते हो कि मानी जाए    बिना ना-नुकुर, बिना कोई बहस चाहते हो कि तुम्हारी बात मानी जाए।...
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रविवार, 17 जनवरी 2016

502. सब जानते हो तुम

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सब जानते हो तुम ******* तुम्हें याद है  हर शाम क्षितिज पर    जब एक गोल नारंगी फूल टँगे देखती   रोज़ कहती-    ला दो न    एक...
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सोमवार, 16 नवंबर 2015

501. नन्हा बचपन रूठा बैठा है

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नन्हा बचपन रूठा बैठा है     ***   अलमारी के निचले ख़ाने में   मेरा बचपन छुपा बैठा है   मुझसे डरकर मुझसे रूठा बैठा है।     पहली कॉपी पर पहली...
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रविवार, 1 नवंबर 2015

500. उऋण

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उऋण  *******   कुछ ऋण ऐसे हैं   जिनसे उऋण होना नहीं चाहती   वो कुछ लम्हे  जिनमें साँसों पर क़र्ज़ बढ़ा   वो कुछ एहसास   जिनमें...
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रविवार, 25 अक्टूबर 2015

499. नियति-चक्र (10 हाइकु) पुस्तक 75

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नियति-चक्र  *******   1.  अपनी सुने     नियति मग़रूर,   मैं मज़बूर ।      2.  बदनीयत    नियति की नीयत,     जाल बिछाती ...
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बुधवार, 30 सितंबर 2015

498. तुम्हारा इंतज़ार है (क्षणिका) (पुस्तक - 39)

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तुम्हारा इंतज़ार है ******* मेरा शहर अब मुझे आवाज़ नहीं देता   नहीं पूछता मेरा हाल नहीं जानना चाहता मेरी अनुपस्थिति की वजह वक़्त ...
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सोमवार, 21 सितंबर 2015

497. मग़ज़ का वह हिस्सा

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मग़ज़ का वह हिस्सा *** अपने मग़ज़ के उस हिस्से को  काट देने का मन होता है जहाँ पर विचार जन्म लेते हैं और फिर होती है व्यथा की अनवरत परिक्रमा।  ...
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शनिवार, 18 जुलाई 2015

496. वो कोठरी

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वो कोठरी ******* वो कोठरी    मेरे नाम की जहाँ रहती थी मैं, सिर्फ़ मैं  मेरे अपने पूरे संसार के साथ इस संसार को छूने की छूट या इस्तेमा...
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शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

495. दूब (घास पर 11 हाइकु) पुस्तक 73-74

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दूब ******* 1. बारहों मास देती बेशर्त प्यार दुलारी घास ।      2. नर्म-नर्म-सी  हरी-हरी ओढ़नी   भूमि ने ओढ़ी ।       3. ...
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शुक्रवार, 29 मई 2015

494. दर्द (दर्द पर 20 हाइकु)

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दर्द  *** 1.   बहुत चाहा      दर्द की टकसाल नहीं घटती ।   2. दर्द है गंगा यह मन गंगोत्री- उद्गमस्थल।    3. मालूम होता गर दर्द का स...
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शनिवार, 4 अप्रैल 2015

493. सरल गाँव (गाँव पर 10 हाइकु)

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सरल गाँव  *** 1. जीवन त्वरा बची है परम्परा,      सरल गाँव ।    2. घूँघट खुला,  मनिहार जो लाया हरी चूड़ियाँ।  3. ...
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बुधवार, 1 अप्रैल 2015

492. दुःखहारणी

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दुःखहारिणी *** जीवन के तार को साधते-साधते    मन-रूपी उँगलियाँ छिल गई हैं    जहाँ से रिसता हुआ रक्त    बूँद-बूँद धरती में समा रहा है  मेरी स...
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रविवार, 15 मार्च 2015

491. युद्ध (क्षणिका)

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युद्ध ******* अबोले शब्द पीड़ा देते हैं छाती में बहता ख़ून धक्के मारने लगा है नियति का बहाना अब पुराना-सा लगता है, जिस्म के भीतर...
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रविवार, 8 मार्च 2015

490. क्या हुक्म है मेरे आका

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क्या हुक्म है मेरे आका ******* अकसर सोचती हूँ  किस ग्रह से मैं आई हूँ  जिसका ठिकाना  न कोख में,  न घर में,  न गाँव में, न शहर में   ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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