लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

मंगलवार, 17 नवंबर 2020

697. वसीयत

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वसीयत    ***  ज़ीस्त के ज़ख़्मों की कहानी तुम्हें सुनाती हूँ    मेरी उदासियों की यही है वसीयत    तुम्हारे सिवा कौन इसको सँभाले    मेरी यह वसीयत...
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शनिवार, 14 नवंबर 2020

696. प्रकाश-पर्व (दीवाली पर 10 हाइकु)

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प्रकाश - पर्व *** 1. धूम- धड़ाका     चारों   ओर   उजाला     प्रकाश - पर्व ।    2. फूलों - सी   सजी     जगमग   करती     दीयों   की   लड़ी ।    ...
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मंगलवार, 10 नवंबर 2020

695. जिया करो (तुकांत)

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जिया करो  *******  सपनों के गाँव में, तुम रहा करो    किस्त-किस्त में न, तुम जिया करो ।        संभावनाओं भरा, ये शहर है    ज़रा आँखें खुली, तु...
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रविवार, 8 नवंबर 2020

694. हम (11 हाइकु) प्रवासी मन - 119, 120

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हम  *******  1.  चाहता मन-    काश   पंख   जो   होते    उड़ते हम ।       2.  जल   के   स्रोत    कण - कण   से   फूटे    प्यासे हैं हम ।       ...
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मंगलवार, 3 नवंबर 2020

693. कपट

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कपट  *** हाँ कपट ही तो है    सत्य से भागना, सत्य न कहना, पलायन करना    पर यह भी सच है, सत्य की राह में    बखेड़ों के मेले हैं, झमेलों के रेले...
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शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

692. दड़बा

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दड़बा  ***  ऐ लड़कियों!    तुम सब जाओ, अपने-अपने दड़बे में    अपने-अपने परों को सँभालो    एक दूसरे को अपनी-अपनी चोंच से  लहूलुहान करो।     कटन...
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बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

691. देहाती

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देहाती  ***  फ़िक्रमन्द हूँ उन सभी के लिए    जिन्होंने सूरज को हथेली में नहीं थामा    चाँद के माथे को नहीं चूमा    वर्षा में भीग-भीगकर न नाचा...
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रविवार, 18 अक्टूबर 2020

690. चलते ही रहना (चोका - 14)

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चलते ही रहना  ***  जीवन जैसे    अनसुलझी हुई    कोई पहेली    उलझाती है जैसे    भूलभूलैया,    क़दम-क़दम पे    पसरे काँटें    लहूलुहान पाँव    मन...
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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

689. इकिगाई

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इकिगाई  ***  ज़िन्दगी चल रही थी, जिधर राह मिली, मुड़ रही थी    कहाँ जाना है, क्या पाना है, कुछ भी करके बस जीना है    न कोई पड़ाव, न कोई मंज़ि...
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शनिवार, 10 अक्टूबर 2020

688. साथी (चार लाइन की भावाभिव्यक्तियाँ) (12 क्षणिका)

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साथी  *******  1.  साथी  *** मेरे साथी! तुम तब थे कहाँ    ज़ख़्मों से जब हम थे घायल हुए    इक तीर था निशाने पे लगा    तन-मन मेरा जब ज़ख़्मी हु...
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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

687. बापू हमारे (बापू पर 10 हाइकु)

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बापू   हमारे   *******  1. एक   सिपाही     अंग्रेज़ो   पर   भारी ,    मिला   स्वराज। 2. देश   की   शान     जन - जन   के   प्यारे     बापू   ह...
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सोमवार, 21 सितंबर 2020

686. अल्ज़ाइमर

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अल्ज़ाइमर  ***  सड़क पर से गुज़रती हुई    जाने मैं किधर खो गई     घर, रास्ता, मंज़िल सब अनचीन्हा-सा है   मैं बदल गई हूँ या दुनिया बदल गई है।   ...
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मंगलवार, 15 सितंबर 2020

685. यादें, न आओ (यादें पर 10 हाइकु)

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 यादें, न आओ *** 1.  मीठी-सी बात    पहली मुलाक़ात    आई है याद ।    2.  दुःखों का सर्प    यादों में जाके बैठा    डंक म...
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बुधवार, 9 सितंबर 2020

684. बारहमासी

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बारहमासी ***  रग-रग में दौड़ा मौसम    रहा न मन अनाड़ी    मौसम का है खेल सब    हम ठहरे इसके खिलाड़ी।    आँखों में भदवा लगा    ...
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गुरुवार, 3 सितंबर 2020

683. परी

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परी *******  दुश्वारियों से जी घबराए    जाने क़यामत कब आ जाए    मेरे सारे राज़, तुम छुपा लो जग से    मेरा उजड़ा मन, बसा लो मन में। ...
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रविवार, 30 अगस्त 2020

682. ज़िन्दगी के सफ़हे (क्षणिका)

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ज़िन्दगी के सफ़हे  *******  ज़िन्दगी के सफ़हे पर चिंगारी धर दी किसी ने    जो सुलग रही है धीरे-धीरे    मौसम प्रतिकूल है, आँधियाँ विन...
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गुरुवार, 20 अगस्त 2020

681. घात (10 क्षणिका)

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घात *******  1.  घात  *******  सपने और साँसें दोनों नज़रबंद हैं    न जाने कौन घात लगाए बैठा हो    ज़रा-सी चूक और सब ख़त्म ।      2. ...
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गुरुवार, 13 अगस्त 2020

680. विदा (क्षणिका)

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विदा  *******  उम्र के बेहिसाब लम्हे, जाने कैसे ख़र्च हो गए     बदले में मिले ज़िन्दगी के छल    एकांत के अनेक कठोर पल    जब न सुनने व...
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रविवार, 26 जुलाई 2020

679. पहचाना जाएगा (तुकांत)

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पहचाना जाएगा *******  वक़्त मुट्ठी से फिसलता, जीवन कैसे पहचाना जाएगा    कौन किसको देखे यहाँ, कोई कैसे पहचाना जाएगा ।      ज़मी...
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सोमवार, 20 जुलाई 2020

678. तितली होती (चोका - 13)

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तितली होती  ***  अक्सर पूछा    ख़ुद से ही सवाल    जिसका हल    नहीं किसी के पास,    मैं ऐसी क्यों हूँ?    मैं चिड़िया क्यों ...
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बुधवार, 8 जुलाई 2020

677. इतनी-सी फ़िक्र

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इतनी-सी फ़िक्र ***  दो चार फ़िक्र हैं जीवन के    गर मिले कोई राह, चले जाओ    बेफ़िक्री लौटा लाओ।      कह तो दिया कि दूर जाओ    न...
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बुधवार, 1 जुलाई 2020

676. सँवरने नहीं देती (तुकांत)

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सँवरने नहीं देती ******  दर्द की ज़ुबान मीठी है बहकने नहीं देती    लहू में डूबी है ज़िन्दगी सँवरने नहीं देती ।      इक रूह है ...
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शुक्रवार, 26 जून 2020

675. रीसेट

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रीसेट ***  हयात के लम्हात, दर्द में सने थे    मेरे सारे दिन-रात, आँसू से बने थे    नाकामियों, नादानियों और मायूसियों के तूफ़ान    मन में लिए ...
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मंगलवार, 23 जून 2020

674. इनार

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इनार  ***  मन के किसी कोने में    अब भी गूँजती हैं कुछ धुनें।       रस्सी का एक छोर पकड़    छपाक-से कूदती हुई बाल्टी    इनार पर लगी हुई चकरी...
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रविवार, 21 जून 2020

673. बोनसाई

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बोनसाई  ***  हज़ारों बोनसाई उग गए हैं    जो छोटे-छोटे ख़्वाबों की पौध हैं  ये पौधे अब दरख़्तों में तब्दील हो चुकें हैं।     य...
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मंगलवार, 16 जून 2020

672. ख़ाली हाथ जाना है (तुकांत)

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ख़ाली हाथ जाना है  *******  ख़ाली हाथ हम आए थे    ख़ाली हाथ ही जाना है।    तन्हा-तन्हा रातें गुज़री    तन्हा दिन भी बिताना है।...
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मंगलवार, 9 जून 2020

671. आईना और परछाई

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आईना और परछाई  ******  आईना मेरा सखा    जो मुझसे कभी झूठ नहीं बोलता    परछाई मेरी सखी    जो मेरा साथ कभी नहीं छोड़ती    इन ...
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शुक्रवार, 5 जून 2020

670. फूलवारी (क्षणिका)

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फूलवारी  *******  जब भी मिलने जाती हूँ    कसकर मेरी बाँहें पकड़, कहती है मुझसे-    अब जो आई हो, तो यहीं रह जाओ    याद करो, जब अप...
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मंगलवार, 2 जून 2020

669. रंग

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रंग   ***  बेरंग जीवन बेनूर न हो    क़र्ज़ में माँग लाई मौसम से ढेरों रंग    लाल, पीले, हरे, नीले, नारंगी, बैगनी, जामुनी    छोटी-छोटी पोटली मे...
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सोमवार, 1 जून 2020

668. सीता की पीर (10 हाइकु)

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सीता की पीर (10 हाइकु) *******  1.  राह अगोरे   शबरी-सा ये मन,   कब आओगे?   2.  अहल्या बनी   कोई राम न आया   पाषाण...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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