लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

271. अलविदा कहती हूँ

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अलविदा कहती हूँ ******* ख़्वाहिशें ऐसे ही दम तोड़ेंगी जानते हुए भी नए-नए ख़्वाब देखती हूँ दामन से छूटते जाते   जाने कितने पल फिर भी वक़...
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रविवार, 7 अगस्त 2011

270. तुम मेरे दोस्त जो हो

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तुम मेरे दोस्त जो हो ******* मेरे लिए एक काम कर दोगे ''ज़हर ला दोगे बहुत थक गई हूँ ज़िन्दगी से ऊब गई हूँ'', जानती हूँ...
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शनिवार, 6 अगस्त 2011

269. उन्हीं दिनों की तरह (पुस्तक - 37)

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उन्हीं दिनों की तरह ******* चौंककर उसने कहा- ''जाओ लौट जाओ  क्यों आई हो यहाँ क्या सिर्फ़ वक़्त बिताना चाहती हो यहाँ? हमने तो ...
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बुधवार, 3 अगस्त 2011

268. कह न पाऊँगी कभी

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कह न पाऊँगी कभी ******* अपने जीवन का सत्य कह न पाऊँगी किसी से कभी अपने पराए का भेद समझती हूँ पर जानती हूँ कह न पाऊँगी किसी से कभी ।...
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सोमवार, 1 अगस्त 2011

267. कुछ तो था मेरा अपना

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कुछ तो था मेरा अपना ******* जी चाहता है सब कुछ छोड़कर लौट जाऊँ, अपने उसी अँधेरे कोने में जहाँ कभी किसी दिन दुबकी हुई, मैं मिली थी तुम...
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बुधवार, 20 जुलाई 2011

266. एक चूक मेरी

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एक चूक मेरी *** रास्ते पर चलते हुए मैं उससे टकरा गई उसके हाथ में पड़े सभी फ़लसफ़े गिर पड़े जो मेरे लिए ही थे सभी टूट गए और मैं देखती रही...
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शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

265. मैं भी इंसान हूँ (पुस्तक - 30)

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मैं भी इंसान हूँ ******* मैं, एक शब्द नही,  एहसास हूँ,  अरमान हूँ साँसे भरती हाड़-मांस की,  मैं भी जीवित इंसान हूँ ।  दर्द में आँसू निकलते...
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रविवार, 10 जुलाई 2011

264. आत्मकथा

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आत्मकथा ******* एक सदी तक चहकती फिरी घर आँगन गलियों में थी कथा परियों की और जीवन फुदकती गौरैया-सी ।      दूसरी सदी में आ बसी हर क...
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गुरुवार, 7 जुलाई 2011

263. स्तब्ध खड़ी हूँ

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स्तब्ध खड़ी हूँ ******* ख़्वाबों के गलियारे में, स्तब्ध मैं हूँ खड़ी आँखों से ओझल, ख़ामोश पास तुम भी हो खड़े, साँसे हैं घबराई-सी, वक़्त भी ...
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बुधवार, 6 जुलाई 2011

262. ज़िन्दगी मौक़ा नहीं देती (क्षणिका)

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ज़िन्दगी मौक़ा नहीं देती ******* ख़ौफ़ के साये में ज़िन्दगी को तलाशती हूँ ढेरों सवाल हैं पर जवाब नहीं हर पल हर लम्हा एक इम्तहान से गुज़रती ...
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शनिवार, 2 जुलाई 2011

261. विजयी हो पुत्र (पुस्तक - 52)

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विजयी हो पुत्र ******* मैं, तुम्हारी माँ, एक गांधारी मैंने अपनी आँखों पे नहीं अपनी संवेदनाओं पे पट्टी बाँध रखी है इसलिए नहीं कि तुम...
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शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

260. तुम्हारे सवाल

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तुम्हारे सवाल ******* न तो सवाल बनी तुम्हारे लिए कभी न ही कोई सवाल किया तुमसे कभी फिर क्यों हर लम्हों का हिसाब माँगते हो? फिर क्यों ...
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बुधवार, 29 जून 2011

259. आत्मीयता के क्षण

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आत्मीयता के क्षण ******* आत्मीयता के ये क्षण अनकहे भले ही रह जाए अनबूझे नहीं रह सकते ।  नहीं-नहीं, यह भ्रम है निरा भ्रम, कोरी कल्प...
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मंगलवार, 28 जून 2011

258. नन्ही भिखारिन (पुस्तक - 84)

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नन्ही भिखारिन ******* यह उसका दर्द है, पर मेरे बदन में  क्यों रिसता है? या खुदा!  नन्ही-सी जान, कौन-सा गुनाह था उसका? शब्दों में खामो...
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शनिवार, 25 जून 2011

257. बस धड़कनें चलेंगी

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बस धड़कनें चलेंगी ******* भला ऐसा भी होता है न जीते बनता है न कोई रास्ता मिलता है, साथ चलते तो हैं लेकिन कुछ दूरी  बनाए रहना होता है...
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बुधवार, 22 जून 2011

256. सूरज ने आज ही देखा है मुझे

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सूरज ने आज ही देखा है मुझे ******* रोज़ ही तो होती है नयी सुबह रोज़ ही तो देखती हूँ सूरज को उगते हुए पर मन में उमंगें आज ही क्यों?...
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मंगलवार, 21 जून 2011

255. मेरी ज़िन्दगी पलायन कर रही है / meri zindagi palaayan kar rahi hai

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मेरी ज़िन्दगी पलायन कर रही है ******* मेरी ज़िन्दगी पलायन कर रही है या मैं स्व-रचित संसार में सिमट रही हूँ शायद मैंने भ्रम-जाल रच लिया ...
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सोमवार, 20 जून 2011

254. मेरे मीत

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मेरे मीत ******* देखती हूँ तुम्हें चाँद की काया पर हर रोज़ जब भी चाहा कि देखूँ तुम्हें पाया है तुम्हें चाँद के सीने पर ।  तुम मेर...
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बुधवार, 15 जून 2011

253. वो दोषी है

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वो दोषी है ******* कच्ची उम्र कच्ची सड़क पर अपनी समस्त पूँजी घसीट रही उसे जाना है सीमा के पार अकेले रहने क्योंकि वो पापी है वो द...
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शनिवार, 11 जून 2011

252. हो ही नहीं (क्षणिका)

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हो ही नहीं ******* कौन जाने सफ़र कब शुरू हो या कि हो ही नहीं रास्ते तो कहीं जाते नहीं चलना मेरे नसीब में हो ही नहीं ।  - जेन्नी शब...
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गुरुवार, 9 जून 2011

251. ग्रीष्म (ग्रीष्म के 10 हाइकु) पुस्तक - 17, 18

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ग्रीष्म (ग्रीष्म के 10 हाइकु) ******* 1. तपती गर्मी अब तो बरस जा ओ रे बदरा। 2. उसका ताप जल उठे जो हम सूरज हँसा। 3. सह न सके...
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रविवार, 5 जून 2011

250. कविता के पात्र हो

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कविता के पात्र हो ******* मेरी कविता पढ़ते हुए अचानक रुक गए तुम उसमें ख़ुद को तलाशते हुए पूछ बैठे तुम कौन है इस कविता में? मैं तु...
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शनिवार, 4 जून 2011

249. कोई और लिख गया (तुकांत)

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कोई और लिख गया ******* वक़्त के साथ मैं तो चलती रही वक़्त ने जब जो कहा करती रही ।  क्या जानूँ क्या है जीने का फ़लसफ़ा बेवजह-सी हवाओं ...
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सोमवार, 30 मई 2011

248. न मंज़िल न ठिकाना है (तुकांत)

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न मंज़िल न ठिकाना है ******* बड़ा अजब अफ़साना है, ज़माने से छुपाना है है बेनाम-सा कोई नाता, यूँ ही अनाम निभाना है ।    सफ़र है बहुत कठि...
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शुक्रवार, 27 मई 2011

247. बच्चे (5 ताँका)

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पहली बार ताँका लिखने का प्रयास किया है, प्रतिक्रिया अपेक्षित है।  बच्चे *** 1. नन्ही-सी परी लिए जादू की छड़ी बच्चों को दिए खिलौने औ...
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सोमवार, 23 मई 2011

246. चलो अपना जहाँ अलग हम बसाते हैं

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चलो अपना जहाँ अलग हम बसाते हैं ******* मिलती नहीं मनचाही फ़िज़ा सभी आशाएँ दम तोड़ती हैं तन्हा-तन्हा बहुत हुआ सफ़र चलो नयी फ़िज़ा हम सजाते...
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शुक्रवार, 20 मई 2011

245. अधरों की बातें

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अधरों की बातें ******* तुम्हारे अधरों की बातें तुम क्या जानो मेरे अधरों को बहुत भाते हैं न समझे तुम मन की बातें कैसे कहें तुमको ...
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सोमवार, 16 मई 2011

244. तीर वापस नहीं होते

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तीर वापस नहीं होते ******* जानते हुए कि हर बार और दूर हो जाती हूँ तल्ख़ी से कहते हो मुझे कि मैं गुनहगार हूँ मुमकिन है कि मन में न सोच...
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बुधवार, 11 मई 2011

243. सपने पलने के लिए जीने के लिए नहीं (पुस्तक - 99)

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सपने पलने के लिए जीने के लिए नहीं ******* कामनाओं की एक फ़ेहरिस्त, बना ली हमने कई छोटी-छोटी चाह, पाल ली हमने छोटे-छोटे सपने, एक साथ सज...
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मंगलवार, 10 मई 2011

242. तनहा-तनहा हम रह जाएँगे (तुकान्त)

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तनहा-तनहा हम रह जाएँगे ******* सब छोड़ जाएँगे जब हमको तनहा-तनहा हम रह जाएँगे किसे बताएँगे ग़म औ खुशियाँ सदमा कैसे हम सह पाएँगे ।    ...
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रविवार, 8 मई 2011

241. माँ (माँ पर 11 हाइकु) पुस्तक - 16, 17

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माँ (माँ पर 11 हाइकु) ******* 1. तौल सके जो नहीं कोई तराजू माँ की ममता।  2. समझ आई जब ख़ुद ने पाई माँ की वेदना।  3. माँ का द...
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बुधवार, 4 मई 2011

240. हवा ख़ून-ख़ून कहती है

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हवा ख़ून-ख़ून कहती है *** जाने कैसी हवा चल रही है न ठण्डक देती है, न साँसें देती है बदन को छूती है  तो जैसे सीने में बरछी-सी चुभती है...
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सोमवार, 2 मई 2011

239. ज़िन्दगी ऐसी ही होती है

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ज़िन्दगी ऐसी ही होती है *** सुनसान राहों से गुज़रते हुए ज़िन्दगी ख़ामोश हो गई है कविता भी अब मौन हो गई है।  शब्द तो बहुत उपजते हैं ...
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रविवार, 1 मई 2011

238.तुम अपना ख़याल रखना

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तुम अपना ख़याल रखना ******* उस सफ़र की दास्तान तुम बता भी न पाओगे न मैं पूछ सकूँगी जहाँ चल दिए तुम अकेले-अकेले यूँ मुझे छोड़कर जानते...
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शनिवार, 30 अप्रैल 2011

237. आग सुलग रही है

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आग सुलग रही है *** एक आग सुलग रही है सदियों से मन पर बोझ है, सीने में कसक उठती है  सिसक-सिसककर जीती है  पर ख़त्म नहीं होती ज़िन्दगी ।...
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गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

236. लम्बी सदी बीत रही है (क्षणिका)

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लम्बी सदी बीत रही है ******* सीली-सीली-सी पत्तियाँ सुलग रही हैं जैसे दर्द की एक लम्बी सदी धीरे-धीरे गुज़र रही है तपन जेठ की झुलसाती गर...
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सोमवार, 25 अप्रैल 2011

235. सब ख़ामोश हैं

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सब ख़ामोश हैं ******* बातें करते-करते तुम मंदिर तक पहुँच गए मैं तुम्हें देखती रही मेरे लिए तुम्हारी आँखों में क्या जन्म ले रहा है । ...
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रविवार, 24 अप्रैल 2011

234. चाँद के होठों की कशिश

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चाँद के होठों की कशिश ******* चाँद के होठों में जाने क्या कशिश है सम्मोहित हो जाता है मन एक जादू-सा असर है मचल जाता है मन । अँधेरी ...
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शनिवार, 23 अप्रैल 2011

233. हथेली ख़ाली है

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हथेली ख़ाली है *** मेरी मुट्ठी से आज फिर कुछ गिर पड़ा  लगता है शायद यह अन्तिम बार है    अब कुछ नहीं बचा है गिरने को  मेरी हथेली ख़ाली पड...
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बुधवार, 13 अप्रैल 2011

232. ज़िद्दी हूँ

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ज़िद्दी हूँ ******* जाने किस सफ़र पर ज़िन्दगी चल पड़ी है न मक़सद का पता न मंज़िल का ठिकाना है अब तो रास्ते भी याद नहीं किधर से आई थी किधर...
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मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

231. ज़िन्दगी से छीना-झपटी ज़ारी है (तुकांत)

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ज़िन्दगी से छीना-झपटी ज़ारी है ******* पहली साँस से अंतिम साँस तक का, सफ़र जारी है कौन मिला कौन बिछड़ा, ज़ेहन में तस्वीर सारी है । सपनो...
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रविवार, 10 अप्रैल 2011

230. सपने (तुकांत)

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सपने ******* उम्मीद के सपने बार-बार आते हैं न चाहें फिर भी आस जगाते हैं । चाह वही अभिलाषा भी वही सपने हर बार बिखर जाते हैं । उल्ल...
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शनिवार, 9 अप्रैल 2011

229. अजनबियों-सा सलाम (क्षणिका)

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अजनबियों-सा सलाम ******* मुलाक़ात भी होगी नज़रों से एहतराम भी होगा दो अजनबियों-सा कोई सलाम तो होगा । - जेन्नी शबनम (6. 4. 2011) _____...
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सोमवार, 4 अप्रैल 2011

228. हाथ और हथियार

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हाथ और हथियार *** भूख से कुलबुलाता पेट हाथ और हथियार की भाषा भूल गया नहीं पता किससे छीने अपना ठौर-ठिकाना भूल गया । मर गया था छोटका ...
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शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

227. विध्वंस होने को आतुर

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विध्वंस होने को आतुर *** चेतन अशांत है अचेतन में कोहराम है अवचेतन में धधक रहा जैसे कोई ताप है । अकारण नहीं संताप मिटना तो निश्चित...
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बुधवार, 30 मार्च 2011

226. बुरा न मानो क्रिकेट है

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बुरा न मानो क्रिकेट है  ******* यहाँ हो रही पूजा, यज्ञ और मान रहे मनौती कहीं हो रही होगी दुआ, सजदा और माँग रहे मन्नत अब क्या हो? खेल ...
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सोमवार, 28 मार्च 2011

225. फ़ासला बना लिया

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फ़ासला बना लिया... ******* खड़ी थी सागर किनारे मगर लहरों ने डुबो दिया दरकिनार नहीं होती ज़िन्दगी हर जतन करके देख लिया । उड़ी थी तब आ...
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रविवार, 27 मार्च 2011

224. ऐ ज़िन्दगी

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ऐ ज़िन्दगी ******* तल्ख़ धूप कितना जलाएगी अब तो बीत जाए दिन बुरा रहम कर हम पर, ऐ ज़िन्दगी । बाबस्ता नहीं कोई दर्द बाँटें किससे बता च...
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शुक्रवार, 25 मार्च 2011

223. प्रवासी मन (प्रथम हाइकु लेखन, 11 हाइकु)

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प्रवासी मन (प्रथम हाइकु लेखन, 11 हाइकु) *** 1. लौटता कहाँ मेरा प्रवासी मन कोई न घर। 2. कुछ ख्व़ाहिशें फलीभूत न होतीं  सदियाँ बीती। ...
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शुक्रवार, 18 मार्च 2011

222. आदम और हव्वा

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आदम और हव्वा *** क़ुदरत की कारस्तानी है स्त्री-पुरुष की कहानी है फल खाकर आदम-हव्वा ने की ग़ज़ब नादानी है ।   चालाकी क़ुदरत की या आदम-ह...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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