लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

302. चुपचाप सो जाऊँगी

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चुपचाप सो जाऊँगी  ******* इक रोज़ तेरे काँधे पे यूँ चुपचाप सो जाऊँगी ज्यूँ मेरा हो वस्ल आख़िरी और जहाँ से हो रुख़सती ।  जो कह न पाए...
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बुधवार, 16 नवंबर 2011

301. उम्र कटी अब बीता सफ़र (पुस्तक - 47)

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उम्र कटी अब बीता सफ़र ******* बचपन कब बीता बोलो हँस पड़ा आईना ये कहकर काले गेसुओं ने निहारा ख़ुद को चाँदी के तारों से लिपटाया ख़ुद को ...
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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

300. अल्फ़ाज़ उगा दूँ (क्षणिका)

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अल्फ़ाज़ उगा दूँ ******* सोचती हूँ कुछ अल्फ़ाज़ उगा दूँ तितर-बितरकर हर तरफ़ पसार दूँ चुक गए हैं मेरे अंतस् से सभी शायद किसी निर्मोही ...
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मंगलवार, 8 नवंबर 2011

299. भय

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भय *** भय! किससे भय? ख़ुद से? ख़ुद से कैसा भय? असम्भव! पर ये सच है अपने आप से भय ख़ुद के होने से भय ख़ुद के खोने का भय अपने शब्दों ...
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रविवार, 6 नवंबर 2011

298. ज़िन्दगी कहाँ-कहाँ है

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ज़िन्दगी कहाँ-कहाँ है ******* तुम्हारी निशानदेही पर साबित हुआ कि ज़िन्दगी कहाँ-कहाँ है और कहाँ-कहाँ से उजड़ गई है ।  एक लोकोक्ति की ...
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शनिवार, 5 नवंबर 2011

297. चक्रव्यूह (पुस्तक - 74)

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चक्रव्यूह ******* कैसे-कैसे इस्तेमाल की जाती हूँ अनजाने ही, चक्रव्यूह में घुस जाती हूँ जानती हूँ, मैं अभिमन्यु नहीं जिसने चक्रव्यूह ...
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बुधवार, 26 अक्टूबर 2011

296. दीपावली (दीपावली पर 11 हाइकु) पुस्तक - 20

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दीपावली (दीपावली पर 11 हाइकु) ******* 1. दीपों की लड़ी लक्ष्मी की आराधना दीवाली आई। 2. लक्ष्मी की पूजा पटाखों का है शोर दीवाली प...
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रविवार, 23 अक्टूबर 2011

295. मेरे शब्द (पुस्तक - 41)

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मेरे शब्द ******* बहुत कठिन है, पार जाना ख़ुद से, और उन तथाकथित अपनों से जिनके शब्द मेरे प्रति सिर्फ़ इसलिए निकलते हैं कि मैं आहत हो स...
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शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

294. बाध्यता नहीं (क्षणिका)

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बाध्यता नहीं ******* ये मेरी चाह थी कि तुम्हें चाहूँ और तुम मुझे पर ये सिर्फ़ मेरी चाह थी तुम्हारी बाध्यता नहीं ।  - जेन्नी शबनम (9. ...
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बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

293. ज़िन्दगी (तुकांत)

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ज़िन्दगी ******* ज़िन्दगी तेरी सोहबत में, जीने को मन करता है   चलते हैं कहीं दूर कि, दुनिया से डर लगता है ।  हर शाम जब अँधेरे, छीनते है...
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गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

292. क़र्ज़ अदायगी

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क़र्ज़ अदायगी ******* तुमने कभी स्पष्ट कहा नहीं शायद संकोच हो या फिर सवालों से घिर जाने का भय जो मेरी बेदख़ली पर तुमसे किए जाएँगे जो ...
19 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

291. मुक्ति पा सकूँ

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मुक्ति पा सकूँ *** मस्तिष्क के जिस हिस्से में विचार पनपते हैं जी चाहता है, उसे काटकर फेंक दूँ न कोई भाव जन्म लेंगे, न कोई सृजन होगा ।...
13 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

290. तब हुआ अबेर (क्षणिका)

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तब हुआ अबेर ******* जब मिला बेर, तब हुआ अबेर मचा कोलाहल, चित्र दिया उकेर छटपटाया मन, शब्द दिया बिखेर बिछा सन्नाटा, अब जगा अँधेर ...
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गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

289. मेरी हथेली

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मेरी हथेली *******  अपनी एक हथेली तुम्हें सौंप आई जब तुमसे मिली थी  जिसकी लकीरों में है मेरी तक़दीर  और मेरी तक़दीर सँवारने की तजवीज़ ...
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मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

288. भस्म होती हूँ (क्षणिका)

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भस्म होती हूँ ******* अक्सर सोचकर हत्प्रभ हो जाती हूँ चूड़ियों की खनक हाथों से निकल चेहरे तक कैसे पहुँच जाती है? झुलसता मन अपना रंग ...
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मंगलवार, 27 सितंबर 2011

287. अपशगुन

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अपशगुन ******* उस दिन तुम जा रहे थे कई बार आवाज़ दी कि तुम मुड़ो और मैं हाथ हिलाकर तुम्हें विदा करूँ, लौटने पर तुम कितना नाराज़ हुए ...
17 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 24 सितंबर 2011

286. ज़िन्दगी शिकवा करती नहीं (तुकांत)

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ज़िन्दगी शिकवा करती नहीं ******* चलते-चलते मैं चलती रही, ज़िन्दगी कभी ठहरी नहीं ख़ुद को जब रोक के देखा, ज़िन्दगी तो बढ़ी ही नहीं ।  क़िस्म...
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बुधवार, 21 सितंबर 2011

285. मैं तेरी सूरजमुखी

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मैं तेरी सूरजमुखी ******* ओ मेरे सूरज मैं तेरी सूरजमुखी (सूर्यमुखी) बाट जोहते-जोहते मुर्झाने लगी कई दिनों से तू आया नहीं जाने कौन-स...
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गुरुवार, 15 सितंबर 2011

284. चाँद-सितारे / chaand-sitaare

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चाँद-सितारे ******* बचपन में जब चाँद-सितारों के लिए मचलती थी अम्मा फ़्राक में ज़री-गोटे से, चाँद-तारे टाँक देती थी बाबा चाँद-सी गोल चौ...
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मंगलवार, 13 सितंबर 2011

283. अभिवादन की औपचारिकता

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अभिवादन की औपचारिकता *** अभिवादन में पूछते हैं आप कैसी हो ? क्या हाल है ? सब ठीक है न ? करती हूँ मैं अविलम्ब  निःसंवेदि...
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सोमवार, 12 सितंबर 2011

282. लौट चलते हैं अपने गाँव

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लौट चलते हैं अपने गाँव *** मन उचट गया है शहर के सूनेपन से अब डर लगने लगा है भीड़ की बस्ती में अपने ठहरेपन से।    चलो लौट चलते हैं अप...
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बुधवार, 7 सितंबर 2011

281. अनुबन्ध

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अनुबन्ध *** एक अनुबन्ध है जन्म और मृत्यु के बीच कभी साथ-साथ घटित न होना एक अनुबन्ध है प्रेम और घृणा के बीच कभी साथ-साथ फलित न होना  ...
12 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 6 सितंबर 2011

280. जब भी तन्हा ख़ुद को पाती हूँ

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जब भी तन्हा ख़ुद को पाती हूँ ******* मन में कुछ दरक-सा जाता है जब क्षितिज पर अस्त होता सूरज देखती हूँ ज़िन्दगी बार-बार डराती है जब भी तन्हा ...
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शनिवार, 3 सितंबर 2011

279. दर्द की मियाद और कितनी है (क्षणिका)

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दर्द की मियाद और कितनी है ******* कोई भी दर्द उम्र से पहले ख़त्म नहीं होता किससे पूछूँ कि दर्द की मियाद और कितनी है ।  - जेन्नी शबनम...
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शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

278. फ़िज़ूल हैं अब (क्षणिका)

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फ़िज़ूल हैं अब ******* फ़िज़ूल हैं अब इसलिए नहीं कि सब जान लिया इसलिए कि जीवन बेमक़सद लगता है जैसे चलती हुई साँसें या फिर बहती हुई हवा रा...
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सोमवार, 29 अगस्त 2011

277. शेष न हो (क्षणिका)

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शेष न हो ******* सवाल भी ख़त्म और जवाब भी शायद ऐसे ही ख़त्म होते हैं रिश्ते जब सामने कोई हो और कहने को कुछ भी शेष न हो ।  - जेन्नी...
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रविवार, 28 अगस्त 2011

276. इन्द्रधनुष खिला (बरसात पर 10 हाइकु) (पुस्तक - 19)

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इन्द्रधनुष खिला  (बरसात पर 10 हाइकु) *******  1. आकाश दिखा इन्द्रधनुष खिला मचले जिया। 2. हुलसे जिया घिर आए बदरा जल्दी बरसे। 3. ...
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शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

275. राखी के धागे (राखी पर 11 हाइकु) (पुस्तक - 18)

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राखी के धागे (राखी पर 11 हाइकु) ******* 1.    राखी का पर्व    पूर्णमासी का दिन    सावन माह ।     2.    राखी-त्योहार    स...
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सोमवार, 22 अगस्त 2011

274. दुनिया बहुत रुलाती है (क्षणिका)

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दुनिया बहुत रुलाती है ******* प्रेम की चाहत कभी कम नहीं होती ज़िन्दगी बस दुनियादारी में कटती है कमबख़्त ये दुनिया बहुत रुलाती है ।  -...
8 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

273. फिर से मात (तुकांत)

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फिर से मात ******* बेअख़्तियार-सी हैं करवटें, बहुत भारी है आज की रात कह दिया यूँ तल्ख़ी से उसने, तन्हाई है ज़िन्दगी की बात ।  साथ रहने...
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सोमवार, 15 अगस्त 2011

272. राम नाम सत्य है

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राम नाम सत्य है *** कोई तो पुकार सुनो कोई तो साहस करो चीख नहीं निकलती पर दम निकल रहा है उनका । वे अपने दर्द में ऐसे टूटे हैं कि ज़ख़्...
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गुरुवार, 11 अगस्त 2011

271. अलविदा कहती हूँ

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अलविदा कहती हूँ ******* ख़्वाहिशें ऐसे ही दम तोड़ेंगी जानते हुए भी नए-नए ख़्वाब देखती हूँ दामन से छूटते जाते   जाने कितने पल फिर भी वक़...
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रविवार, 7 अगस्त 2011

270. तुम मेरे दोस्त जो हो

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तुम मेरे दोस्त जो हो ******* मेरे लिए एक काम कर दोगे ''ज़हर ला दोगे बहुत थक गई हूँ ज़िन्दगी से ऊब गई हूँ'', जानती हूँ...
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शनिवार, 6 अगस्त 2011

269. उन्हीं दिनों की तरह (पुस्तक - 37)

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उन्हीं दिनों की तरह ******* चौंककर उसने कहा- ''जाओ लौट जाओ  क्यों आई हो यहाँ क्या सिर्फ़ वक़्त बिताना चाहती हो यहाँ? हमने तो ...
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बुधवार, 3 अगस्त 2011

268. कह न पाऊँगी कभी

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कह न पाऊँगी कभी ******* अपने जीवन का सत्य कह न पाऊँगी किसी से कभी अपने पराए का भेद समझती हूँ पर जानती हूँ कह न पाऊँगी किसी से कभी ।...
16 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 1 अगस्त 2011

267. कुछ तो था मेरा अपना

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कुछ तो था मेरा अपना ******* जी चाहता है सब कुछ छोड़कर लौट जाऊँ, अपने उसी अँधेरे कोने में जहाँ कभी किसी दिन दुबकी हुई, मैं मिली थी तुम...
11 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 20 जुलाई 2011

266. एक चूक मेरी

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एक चूक मेरी *** रास्ते पर चलते हुए मैं उससे टकरा गई उसके हाथ में पड़े सभी फ़लसफ़े गिर पड़े जो मेरे लिए ही थे सभी टूट गए और मैं देखती रही...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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