लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

319. क्या बन सकोगे एक इमरोज़ (पुस्तक - 24)

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क्या बन सकोगे एक इमरोज़ ******* तुमने सिर्फ़ किताबें पढ़ी हैं या फिर अमृता-सा जिया है, क्या समझते हो इमरोज़ बनना इतना आसान है? हाँ-हा...
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बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

318. मछली या समंदर

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मछली या समंदर *** बिना अपनी सहमति अभिशप्त गलियों से महज़ गुज़रना बदनामी का सबब बन जाता है वैसे ही जैसे किसी संक्रमित गली की बहती हुई ह...
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बुधवार, 25 जनवरी 2012

317. स्वतः नहीं जन्मी

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स्वतः नहीं जन्मी ******* नहीं मालूम, मैं हैरान हूँ या परेशान पर यथास्थिति को समझने में, नाकाम हूँ, समझ नहीं आता ज़िन्दगी की करवटों क...
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शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

316. मदिरा का नशा

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मदिरा का नशा ******* तुमने तो जाना है मदिरा नशा है नशा जो जीवन छीन लेता है मदिरा जो मतवाला बना देती है, मदिरा का नशा तुम क्या जानो...
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बुधवार, 18 जनवरी 2012

315. नूतन वर्ष (नव वर्ष पर 5 हाइकु) पुस्तक - 21

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नूतन वर्ष (नव वर्ष पर 5 हाइकु) ******* 1. नूतन वर्ष चहुँ ओर पसरा अपार हर्ष। 2. फिर से आया नया साल सुहाना जश्न मनाओ। 3. धूम...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2012

314. मौसम बदलेगा (क्षणिका)

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मौसम बदलेगा ******* देह की बात मन की आँच कोई न समझा  रुदन-क्रंदन कोई न सुना  युग बीता, सब टूटा सब पथराया  धूमिल आस, संबल नहीं पर विश्वास...
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सोमवार, 9 जनवरी 2012

313. जाने कैसे

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जाने कैसे *** किसी अस्पृश्य के साथ खाए एक निवाले से कई जन्मों के लिए कोई कैसे पाप का भागीदार बन जाता है जो गंगा में एक डुबकी से धुल ...
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शनिवार, 7 जनवरी 2012

312. चलो सत्य की राह

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चलो सत्य की राह ******* बन सबल  शक्तिमान तुम करो आलिंगन  संसार तुम न हो धूमिल  प्रकाश तुम्हारा न उलझे कभी  जीवन तुम्हारा  बाधा हो प...
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गुरुवार, 5 जनवरी 2012

311. क़र्ज़ जो मुझे चुकाना नहीं (क्षणिका)

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क़र्ज़ जो मुझे चुकाना नहीं ******* जो वक़्त मुझे देते हो, माना ये है काफ़ी पर मेरे लिए वो क़र्ज़ है ऐसा क़र्ज़ जो मुझे चुकाना नहीं क़र्ज़ ...
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सोमवार, 2 जनवरी 2012

310. एक नई शुरुआत

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एक नई शुरुआत *** माना कि बहुत कुछ छूट गया एक और सपना टूट गया पार कर लिया, तो कर लिया उस रास्ते पर दोबारा क्यों जाना जहाँ पाँव में छ...
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शनिवार, 31 दिसंबर 2011

309. बीत गया

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बीत गया ******* तय मौसम का एक मौसम अच्छा हुआ बीत गया हार का एक मनका अच्छा हुआ टूट गया ।    समय का मौसम मन का मनका साथ-साथ ...
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गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

308. एक अदद रोटी

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एक अदद रोटी *** सुबह से रात, रोज़ सबको परोसता गोल-गोल, प्यारी-प्यारी, नरम-मुलायम रोटी मिल जाती, काश!  उसे भी कभी खाने को गरम-गरम रोटी...
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मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

307. बेलौस नशा माँगती हूँ

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बेलौस नशा माँगती हूँ ******* सारे नशे की चीज़ मुझसे ही क्यों माँगती हो कहकर हँस पड़े तुम मैं भी हँस पड़ी तुमसे न माँगू तो किससे भल...
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शनिवार, 17 दिसंबर 2011

306. अब डूबने को है

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अब डूबने को है *** बहाने नहीं हैं पलायन के न कोई अफ़साने हैं मेरे न कोई ऐसा सच, जिससे तुम भागते हो और सोचते हो कि मुझे तोड़ देगा। ...
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गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

305. जाने कहाँ गई वो लड़की (पुस्तक - 31)

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जाने कहाँ गई वो लड़की ******* सफ़ेद झालर वाली फ्रॉक पहने जिसपे लाल-लाल फूल सजे उछलती-कूदती, जाने कहाँ गई वो लड़की ।  बकरी का पग...
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शनिवार, 10 दिसंबर 2011

304. आदमज़ाद की बात नहीं

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आदमज़ाद की बात नहीं  ***  प्यार की उम्र क्या होती है?    साथ जीने की शर्त क्या होती है?    अजब सवाल पूछते हो    प्यार की उम्र कभी ख़त...
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सोमवार, 5 दिसंबर 2011

303. अपनी-अपनी धुरी (पुस्तक - 106)

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अपनी-अपनी धुरी ******* अपनी-अपनी धुरी पर चलते, पृथ्वी और ग्रह-नक्षत्र जीवन-मरण हो या समय का रथ नियत है सभी की गति, धुरी और चक्र ।  ब...
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मंगलवार, 22 नवंबर 2011

302. चुपचाप सो जाऊँगी

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चुपचाप सो जाऊँगी  ******* इक रोज़ तेरे काँधे पे यूँ चुपचाप सो जाऊँगी ज्यूँ मेरा हो वस्ल आख़िरी और जहाँ से हो रुख़सती ।  जो कह न पाए...
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बुधवार, 16 नवंबर 2011

301. उम्र कटी अब बीता सफ़र (पुस्तक - 47)

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उम्र कटी अब बीता सफ़र ******* बचपन कब बीता बोलो हँस पड़ा आईना ये कहकर काले गेसुओं ने निहारा ख़ुद को चाँदी के तारों से लिपटाया ख़ुद को ...
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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

300. अल्फ़ाज़ उगा दूँ (क्षणिका)

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अल्फ़ाज़ उगा दूँ ******* सोचती हूँ कुछ अल्फ़ाज़ उगा दूँ तितर-बितरकर हर तरफ़ पसार दूँ चुक गए हैं मेरे अंतस् से सभी शायद किसी निर्मोही ...
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मंगलवार, 8 नवंबर 2011

299. भय

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भय *** भय! किससे भय? ख़ुद से? ख़ुद से कैसा भय? असम्भव! पर ये सच है अपने आप से भय ख़ुद के होने से भय ख़ुद के खोने का भय अपने शब्दों ...
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रविवार, 6 नवंबर 2011

298. ज़िन्दगी कहाँ-कहाँ है

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ज़िन्दगी कहाँ-कहाँ है ******* तुम्हारी निशानदेही पर साबित हुआ कि ज़िन्दगी कहाँ-कहाँ है और कहाँ-कहाँ से उजड़ गई है ।  एक लोकोक्ति की ...
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शनिवार, 5 नवंबर 2011

297. चक्रव्यूह (पुस्तक - 74)

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चक्रव्यूह ******* कैसे-कैसे इस्तेमाल की जाती हूँ अनजाने ही, चक्रव्यूह में घुस जाती हूँ जानती हूँ, मैं अभिमन्यु नहीं जिसने चक्रव्यूह ...
20 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 26 अक्टूबर 2011

296. दीपावली (दीपावली पर 11 हाइकु) पुस्तक - 20

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दीपावली (दीपावली पर 11 हाइकु) ******* 1. दीपों की लड़ी लक्ष्मी की आराधना दीवाली आई। 2. लक्ष्मी की पूजा पटाखों का है शोर दीवाली प...
20 टिप्‍पणियां:
रविवार, 23 अक्टूबर 2011

295. मेरे शब्द (पुस्तक - 41)

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मेरे शब्द ******* बहुत कठिन है, पार जाना ख़ुद से, और उन तथाकथित अपनों से जिनके शब्द मेरे प्रति सिर्फ़ इसलिए निकलते हैं कि मैं आहत हो स...
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शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

294. बाध्यता नहीं (क्षणिका)

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बाध्यता नहीं ******* ये मेरी चाह थी कि तुम्हें चाहूँ और तुम मुझे पर ये सिर्फ़ मेरी चाह थी तुम्हारी बाध्यता नहीं ।  - जेन्नी शबनम (9. ...
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बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

293. ज़िन्दगी (तुकांत)

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ज़िन्दगी ******* ज़िन्दगी तेरी सोहबत में, जीने को मन करता है   चलते हैं कहीं दूर कि, दुनिया से डर लगता है ।  हर शाम जब अँधेरे, छीनते है...
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गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

292. क़र्ज़ अदायगी

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क़र्ज़ अदायगी ******* तुमने कभी स्पष्ट कहा नहीं शायद संकोच हो या फिर सवालों से घिर जाने का भय जो मेरी बेदख़ली पर तुमसे किए जाएँगे जो ...
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मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

291. मुक्ति पा सकूँ

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मुक्ति पा सकूँ *** मस्तिष्क के जिस हिस्से में विचार पनपते हैं जी चाहता है, उसे काटकर फेंक दूँ न कोई भाव जन्म लेंगे, न कोई सृजन होगा ।...
13 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

290. तब हुआ अबेर (क्षणिका)

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तब हुआ अबेर ******* जब मिला बेर, तब हुआ अबेर मचा कोलाहल, चित्र दिया उकेर छटपटाया मन, शब्द दिया बिखेर बिछा सन्नाटा, अब जगा अँधेर ...
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गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

289. मेरी हथेली

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मेरी हथेली *******  अपनी एक हथेली तुम्हें सौंप आई जब तुमसे मिली थी  जिसकी लकीरों में है मेरी तक़दीर  और मेरी तक़दीर सँवारने की तजवीज़ ...
15 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

288. भस्म होती हूँ (क्षणिका)

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भस्म होती हूँ ******* अक्सर सोचकर हत्प्रभ हो जाती हूँ चूड़ियों की खनक हाथों से निकल चेहरे तक कैसे पहुँच जाती है? झुलसता मन अपना रंग ...
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मंगलवार, 27 सितंबर 2011

287. अपशगुन

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अपशगुन ******* उस दिन तुम जा रहे थे कई बार आवाज़ दी कि तुम मुड़ो और मैं हाथ हिलाकर तुम्हें विदा करूँ, लौटने पर तुम कितना नाराज़ हुए ...
17 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 24 सितंबर 2011

286. ज़िन्दगी शिकवा करती नहीं (तुकांत)

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ज़िन्दगी शिकवा करती नहीं ******* चलते-चलते मैं चलती रही, ज़िन्दगी कभी ठहरी नहीं ख़ुद को जब रोक के देखा, ज़िन्दगी तो बढ़ी ही नहीं ।  क़िस्म...
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बुधवार, 21 सितंबर 2011

285. मैं तेरी सूरजमुखी

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मैं तेरी सूरजमुखी ******* ओ मेरे सूरज मैं तेरी सूरजमुखी (सूर्यमुखी) बाट जोहते-जोहते मुर्झाने लगी कई दिनों से तू आया नहीं जाने कौन-स...
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गुरुवार, 15 सितंबर 2011

284. चाँद-सितारे / chaand-sitaare

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चाँद-सितारे ******* बचपन में जब चाँद-सितारों के लिए मचलती थी अम्मा फ़्राक में ज़री-गोटे से, चाँद-तारे टाँक देती थी बाबा चाँद-सी गोल चौ...
12 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 13 सितंबर 2011

283. अभिवादन की औपचारिकता

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अभिवादन की औपचारिकता *** अभिवादन में पूछते हैं आप कैसी हो ? क्या हाल है ? सब ठीक है न ? करती हूँ मैं अविलम्ब  निःसंवेदि...
16 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 12 सितंबर 2011

282. लौट चलते हैं अपने गाँव

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लौट चलते हैं अपने गाँव *** मन उचट गया है शहर के सूनेपन से अब डर लगने लगा है भीड़ की बस्ती में अपने ठहरेपन से।    चलो लौट चलते हैं अप...
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बुधवार, 7 सितंबर 2011

281. अनुबन्ध

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अनुबन्ध *** एक अनुबन्ध है जन्म और मृत्यु के बीच कभी साथ-साथ घटित न होना एक अनुबन्ध है प्रेम और घृणा के बीच कभी साथ-साथ फलित न होना  ...
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मंगलवार, 6 सितंबर 2011

280. जब भी तन्हा ख़ुद को पाती हूँ

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जब भी तन्हा ख़ुद को पाती हूँ ******* मन में कुछ दरक-सा जाता है जब क्षितिज पर अस्त होता सूरज देखती हूँ ज़िन्दगी बार-बार डराती है जब भी तन्हा ...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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