लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

मंगलवार, 24 जुलाई 2012

357. सात पल

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सात पल ******* मुट्ठी में वर्षों से बंद वक़्त का हर एक लम्हा  कब गिर पड़ा  कुछ पता न चला  महज़ सात पल रह गए  क्योंकि उन पलों...
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रविवार, 22 जुलाई 2012

356. हरियाली तीज (तीज पर 5 हाइकु) पुस्तक- 23

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हरियाली तीज  (तीज पर 5 हाइकु) *******  1. शिव-सा वर हर नारी की चाह करती तीज । 2. मनाए है स्त्री  हरितालिका तीज पति ...
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शनिवार, 14 जुलाई 2012

355. बनके प्रेम-घटा (4 सेदोका)

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बनके प्रेम-घटा  ***  1. मन की पीड़ा  बूँद-बूँद बरसी बदरी से जा मिली   तुम न आए  साथ मेरे रो पड़ीं   काली घनी घटाएँ।  ...
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गुरुवार, 12 जुलाई 2012

354. जीवन-शास्त्र

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जीवन-शास्त्र *** सुना है  गति और परिवर्तन ज़िन्दगी है और यह भी कि  जिनमें विकास और क्रियाशीलता नहीं  वो मृतप्राय हैं।    फ...
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गुरुवार, 21 जून 2012

353. कासे कहे

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कासे कहे ******* मद्धिम लौ  जुगनू ज्यों वही सूरज वही जीवन सब रीता पर बीता! जीवन यही रीत  यही पीर पराई भान नहीं सब खोया...
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रविवार, 17 जून 2012

352. ओ मेरे बाबा (पितृ-दिवस पर 5 हाइकु) पुस्तक - 22, 23

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ओ मेरे बाबा  (पितृ-दिवस पर 5 हाइकु) ******* 1. ओ मेरे बाबा! तुम हो गए स्वप्न  छोड़ जो गए। 2. बेटी का बाबा गर साथ न छूटे...
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शुक्रवार, 15 जून 2012

351. मैं कहीं नहीं

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मैं कहीं नहीं ******* हर बार की तरह निष्ठुर बन,  फिर चले गए तुम मुझे मेरे प्रश्नों में जलने के लिए छोड़ गए   वो प्रश्न जिसके ...
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गुरुवार, 7 जून 2012

350. पाप-पुण्य

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पाप-पुण्य *** पाप-पुण्य के फ़ैसले का भार  क्यों नहीं परमात्मा पर छोड़ते हो   क्यों पाप-पुण्य की मान्य परिभाषाओं में उलझकर  ...
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बुधवार, 6 जून 2012

349. पंचों का फ़ैसला

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पंचों का फ़ैसला *** कुछ शब्द उन पंचों के समान उच्च आसन पर बैठे हैं जिनके फ़ैसले सदैव निष्पक्ष होने चाहिए ऐसी मान्यता है।    स...
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शुक्रवार, 1 जून 2012

348. आईने का भरोसा क्यों

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आईने का भरोसा क्यों *******  प्रतिबिम्ब अपना-सा दिखता नहीं    फिर बार-बार क्यों देखना?    आईने को तोड़  निकल आओ बाहर    किसी भी...
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सोमवार, 28 मई 2012

347. मुक्ति

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मुक्ति  *******  शेष है  अब भी  कुछ मुझमें    जो बाधा है  मुक्ति के लिए    सबसे विमुख होकर भी    स्वयं अपने आप से  नहीं हो पा...
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गुरुवार, 24 मई 2012

346. कभी न मानूँ (पुस्तक - 48)

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कभी न मानूँ ******* जी चाहता है,  विद्रोह कर दूँ  अबकी जो रूठूँ,  कभी न मानूँ मनाता तो यूँ भी नहीं कोई  फिर भी बार-बार रूठती हू...
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शनिवार, 12 मई 2012

345. कैसे बनूँ शायर

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कैसे बनूँ शायर  *** मैं नहीं हूँ शायर  जो शब्दों को पिरोकर कोई ख़्वाब सजाऊँ नज़्मों और ग़ज़लों में दुनिया बसाऊँ मुझको नहीं दिख...
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रविवार, 6 मई 2012

344. चाँद का दाग़ (क्षणिका)

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चाँद का दाग़ ******* ऐ चाँद! तेरे माथे पर जो दाग़ है  क्या मैंने तुम्हें मारा था?  अम्मा कहती है-  मैं बहुत शैतान थी  और कुछ भ...
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बुधवार, 25 अप्रैल 2012

343. कोई एक चमत्कार

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कोई एक चमत्कार  ***  ज़िन्दगी, सपने और हक़ीक़त    हर वक़्त गुत्थम-गुत्था होते हैं    साबित करने के लिए अपना-अपना वर्चस्व    और हो जा...
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शनिवार, 21 अप्रैल 2012

342. कोई हिस्सेदारी नहीं

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कोई हिस्सेदारी नहीं ******* मेरे सारे तर्क  कैसे एक बार में एक झटके से  ख़ारिज कर देते हो  और कहते कि तुम्हें समझ नहीं, ज...
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बुधवार, 18 अप्रैल 2012

341. अंतिम परिणति

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अंतिम परिणति ******* बाबू! तुम दूर जो गए सपनों से भी रूठ गए कर जोड़ गुहार मेरी तनिक न ली सुध मेरी लोर बहते नहीं अकारण जा...
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रविवार, 15 अप्रैल 2012

340. आम आदमी के हिस्से में

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आम आदमी के हिस्से में *** सच है पेट के आगे हर भूख  कम पड़ जाती है चाहे मन की हो  या तन की यह भी सच है इश्क़ करता,  तो यह सब क...
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गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

339. बेसब्र इन्तिज़ार (क्षणिका)

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बेसब्र इन्तिज़ार  *** कितने सपने, कितने इम्तिहान अगले जन्म का बेसब्र इन्तिज़ार कमबख़्त ये जन्म तो ख़त्म हो ।  -जेन्नी शबनम (12....
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शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

338. फूल कुमारी उदास है (पुस्तक - 72)

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फूल कुमारी उदास है ******* एक था राजा एक थी रानी उसकी बेटी थी फूल कुमारी फूल कुमारी जब उदास होती... पढ़ते सुनते,  बरस ब...
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सोमवार, 2 अप्रैल 2012

337. तुम्हारा तिलिस्म

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तुम्हारा तिलिस्म ******* धुँध छट गई है मौसम में फगुनाहट घुल गई है आँखों में सपने मचल रहे हैं रगों में हलकी तपिश  महसूस हो रही ...
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बुधवार, 28 मार्च 2012

336. तेरे ख़यालों के साथ रहना है

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तेरे ख़यालों के साथ रहना है ******* खिली-खिली-सी चाँदनी में  तेरे लम्स की सरगोशी न कुछ कहना है न कुछ सुनना है शब भर आज तेरे ख़यालो...
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सोमवार, 26 मार्च 2012

335. शब्द-महिमा (शब्द पर 10 ताँका)

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शब्द-महिमा (शब्द पर 10 ताँका) *** 1. प्रेम-चाशनी शब्द को पकाकर सबको बाँटो, सब छूट जाएगा ये याद दिलाएगा।  2. शब्दों ने तोड़ी स...
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रविवार, 25 मार्च 2012

334. परवाह (क्षणिका)

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परवाह ******* कई बार प्रेम के रिश्ते फाँस-से  चुभते हैं इसलिए नहीं कि  रिश्ते ने दर्द दिया इसलिए कि  रिश्ते ने परवाह नहीं की और प्...
18 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 21 मार्च 2012

333. कवच

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कवच *** सच ही कहते हो हम सभी का अपना-अपना कवच है जिसका निर्माण हम ख़ुद करते हैं, स्वेच्छा से जिसके भीतर हम ख़ुद को क़ैद किए होते हैं,...
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शनिवार, 17 मार्च 2012

332. वक़्त की आख़िरी गठरी (क्षणिका)

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वक़्त की आख़िरी गठरी ******* लफ़्ज़ की सरगोशी, जिस्म की मदहोशी यूँ जैसे  साँसों की रफ़्तार  घटती रही एक-एक को चुनकर,  हर एक को  तोड़त...
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गुरुवार, 15 मार्च 2012

331. चुप सी गुफ़्तगू

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चुप सी गुफ़्तगू ******* एक चुप-सी दुपहरी में एक चुप-सी गुफ़्तगू हुई न तख्तों-ताज  न मसर्रत न सुख़नवर की बात हुई कफ़स में क़ैद सं...
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मंगलवार, 13 मार्च 2012

330. तुम क्या जानो (तुकांत)

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तुम क्या जानो ******* हिज्र की रातें तुम क्या जानो वस्ल की बातें तुम क्या जानो ।    थी लिखी कहानी जीत की हमने क्यों मिल गई मातें तुम...
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गुरुवार, 8 मार्च 2012

329. मैं स्त्री हो गई (पुस्तक - 77)

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मैं स्त्री हो गई ******* विजातीय से प्रेम किया अपनी जात से मुझे निष्काषित कर दिया गया, मैं कुलटा हो गई; अपने धर्म के बाहर प्रे...
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सोमवार, 5 मार्च 2012

328. होली आई रे (होली पर 10 हाइकु) पुस्तक - 21, 22

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होली आई रे (होली पर 10 हाइकु) ******* 1.  रंग-अबीर मन हुआ अधीर होली खेलो रे । 2.  फगुआ-पर्व घर पाहुन आए  मन चंचल । ...
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शनिवार, 3 मार्च 2012

327. ऐसा वास्ता रखना (तुकांत)

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ऐसा वास्ता रखना ******* हमारे दरम्यान इतना फ़ासला रखना बसर हो सकें रिश्ते ऐसा वास्ता रखना ।    लरजते आँसुओं के शबनमी बयाँ दो...
22 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

326. जा तुझे इश्क़ हो

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जा तुझे इश्क़ हो ***  तुम्हें आँसू नहीं पसन्द      चाहे मेरी आँखों के हों    या किसी और के    चाहते हो,  हँसती ही रहूँ    भले ही  वेदना से ...
24 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

325. भूमिका

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भूमिका *** नेपथ्य से आई  धीमी पुकार जाने किसने पुकारा  मेरा नाम मंच पर घिरी हूँ,  उन सभी के बीच जो मुझसे सम्बद्ध हैं,  प्रत्यक्ष ...
29 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

324. अकेले से लगे तुम

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अकेले से लगे तुम *** आज जाते हुए बहुत असहाय से दिखे तुम कन्धों पर भारी बोझ कुछ अपना, कुछ परायों का।  इस जद्दोजहद में अपना औचित्य बना...
19 टिप्‍पणियां:
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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