लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

338. फूल कुमारी उदास है (पुस्तक - 72)

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फूल कुमारी उदास है ******* एक था राजा एक थी रानी उसकी बेटी थी फूल कुमारी फूल कुमारी जब उदास होती... पढ़ते सुनते,  बरस ब...
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सोमवार, 2 अप्रैल 2012

337. तुम्हारा तिलिस्म

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तुम्हारा तिलिस्म ******* धुँध छट गई है मौसम में फगुनाहट घुल गई है आँखों में सपने मचल रहे हैं रगों में हलकी तपिश  महसूस हो रही ...
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बुधवार, 28 मार्च 2012

336. तेरे ख़यालों के साथ रहना है

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तेरे ख़यालों के साथ रहना है ******* खिली-खिली-सी चाँदनी में  तेरे लम्स की सरगोशी न कुछ कहना है न कुछ सुनना है शब भर आज तेरे ख़यालो...
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सोमवार, 26 मार्च 2012

335. शब्द-महिमा (शब्द पर 10 ताँका)

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शब्द-महिमा (शब्द पर 10 ताँका) *** 1. प्रेम-चाशनी शब्द को पकाकर सबको बाँटो, सब छूट जाएगा ये याद दिलाएगा।  2. शब्दों ने तोड़ी स...
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रविवार, 25 मार्च 2012

334. परवाह (क्षणिका)

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परवाह ******* कई बार प्रेम के रिश्ते फाँस-से  चुभते हैं इसलिए नहीं कि  रिश्ते ने दर्द दिया इसलिए कि  रिश्ते ने परवाह नहीं की और प्...
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बुधवार, 21 मार्च 2012

333. कवच

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कवच *** सच ही कहते हो हम सभी का अपना-अपना कवच है जिसका निर्माण हम ख़ुद करते हैं, स्वेच्छा से जिसके भीतर हम ख़ुद को क़ैद किए होते हैं,...
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शनिवार, 17 मार्च 2012

332. वक़्त की आख़िरी गठरी (क्षणिका)

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वक़्त की आख़िरी गठरी ******* लफ़्ज़ की सरगोशी, जिस्म की मदहोशी यूँ जैसे  साँसों की रफ़्तार  घटती रही एक-एक को चुनकर,  हर एक को  तोड़त...
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गुरुवार, 15 मार्च 2012

331. चुप सी गुफ़्तगू

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चुप सी गुफ़्तगू ******* एक चुप-सी दुपहरी में एक चुप-सी गुफ़्तगू हुई न तख्तों-ताज  न मसर्रत न सुख़नवर की बात हुई कफ़स में क़ैद सं...
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मंगलवार, 13 मार्च 2012

330. तुम क्या जानो (तुकांत)

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तुम क्या जानो ******* हिज्र की रातें तुम क्या जानो वस्ल की बातें तुम क्या जानो ।    थी लिखी कहानी जीत की हमने क्यों मिल गई मातें तुम...
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गुरुवार, 8 मार्च 2012

329. मैं स्त्री हो गई (पुस्तक - 77)

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मैं स्त्री हो गई ******* विजातीय से प्रेम किया अपनी जात से मुझे निष्काषित कर दिया गया, मैं कुलटा हो गई; अपने धर्म के बाहर प्रे...
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सोमवार, 5 मार्च 2012

328. होली आई रे (होली पर 10 हाइकु) पुस्तक - 21, 22

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होली आई रे (होली पर 10 हाइकु) ******* 1.  रंग-अबीर मन हुआ अधीर होली खेलो रे । 2.  फगुआ-पर्व घर पाहुन आए  मन चंचल । ...
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शनिवार, 3 मार्च 2012

327. ऐसा वास्ता रखना (तुकांत)

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ऐसा वास्ता रखना ******* हमारे दरम्यान इतना फ़ासला रखना बसर हो सकें रिश्ते ऐसा वास्ता रखना ।    लरजते आँसुओं के शबनमी बयाँ दो...
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बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

326. जा तुझे इश्क़ हो

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जा तुझे इश्क़ हो ***  तुम्हें आँसू नहीं पसन्द      चाहे मेरी आँखों के हों    या किसी और के    चाहते हो,  हँसती ही रहूँ    भले ही  वेदना से ...
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बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

325. भूमिका

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भूमिका *** नेपथ्य से आई  धीमी पुकार जाने किसने पुकारा  मेरा नाम मंच पर घिरी हूँ,  उन सभी के बीच जो मुझसे सम्बद्ध हैं,  प्रत्यक्ष ...
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गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

324. अकेले से लगे तुम

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अकेले से लगे तुम *** आज जाते हुए बहुत असहाय से दिखे तुम कन्धों पर भारी बोझ कुछ अपना, कुछ परायों का।  इस जद्दोजहद में अपना औचित्य बना...
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323. सपनों को हारने लगी हूँ

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सपनों को हारने लगी हूँ ******* तुम्हारे लिए मुश्किलें बढ़ाती-बढ़ाती ख़ुद के लिए मुश्किलें पैदा कर ली हूँ पल-पल क़रीब आते-आते ज़िन्दगी स...
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मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

322. प्रेम (पुस्तक - 108)

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प्रेम ******* उचित-अनुचित और पाप-पुण्य की कसौटी पर  तौली जाती है, प्रेम की परिभाषा, पर प्रेम तो हर परिभाषा से परे है  जिसका न रूप, न...
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शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

321. नन्हे हाथों में

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नन्हे हाथों में ******* नामुमकिन हो गया उस सफ़र पर जाना जहाँ जाने के लिए बारहा कोशिश करती रही, मर्ज़ी नहीं थी न चाह पर यहाँ रुकना भ...
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बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

320. अब और कितना (क्षणिका)

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अब और कितना *******  कैलेंडर में हर गुज़रे दिन को लाल स्याही से काटकर बीतने का निशान लगाती हूँ साल-दर-साल अनवरत कोई अंतिम दिन नहीं आता जो ...
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शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

319. क्या बन सकोगे एक इमरोज़ (पुस्तक - 24)

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क्या बन सकोगे एक इमरोज़ ******* तुमने सिर्फ़ किताबें पढ़ी हैं या फिर अमृता-सा जिया है, क्या समझते हो इमरोज़ बनना इतना आसान है? हाँ-हा...
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बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

318. मछली या समंदर

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मछली या समंदर *** बिना अपनी सहमति अभिशप्त गलियों से महज़ गुज़रना बदनामी का सबब बन जाता है वैसे ही जैसे किसी संक्रमित गली की बहती हुई ह...
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बुधवार, 25 जनवरी 2012

317. स्वतः नहीं जन्मी

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स्वतः नहीं जन्मी ******* नहीं मालूम, मैं हैरान हूँ या परेशान पर यथास्थिति को समझने में, नाकाम हूँ, समझ नहीं आता ज़िन्दगी की करवटों क...
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शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

316. मदिरा का नशा

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मदिरा का नशा ******* तुमने तो जाना है मदिरा नशा है नशा जो जीवन छीन लेता है मदिरा जो मतवाला बना देती है, मदिरा का नशा तुम क्या जानो...
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बुधवार, 18 जनवरी 2012

315. नूतन वर्ष (नव वर्ष पर 5 हाइकु) पुस्तक - 21

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नूतन वर्ष (नव वर्ष पर 5 हाइकु) ******* 1. नूतन वर्ष चहुँ ओर पसरा अपार हर्ष। 2. फिर से आया नया साल सुहाना जश्न मनाओ। 3. धूम...
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गुरुवार, 12 जनवरी 2012

314. मौसम बदलेगा (क्षणिका)

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मौसम बदलेगा ******* देह की बात मन की आँच कोई न समझा  रुदन-क्रंदन कोई न सुना  युग बीता, सब टूटा सब पथराया  धूमिल आस, संबल नहीं पर विश्वास...
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सोमवार, 9 जनवरी 2012

313. जाने कैसे

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जाने कैसे *** किसी अस्पृश्य के साथ खाए एक निवाले से कई जन्मों के लिए कोई कैसे पाप का भागीदार बन जाता है जो गंगा में एक डुबकी से धुल ...
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शनिवार, 7 जनवरी 2012

312. चलो सत्य की राह

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चलो सत्य की राह ******* बन सबल  शक्तिमान तुम करो आलिंगन  संसार तुम न हो धूमिल  प्रकाश तुम्हारा न उलझे कभी  जीवन तुम्हारा  बाधा हो प...
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गुरुवार, 5 जनवरी 2012

311. क़र्ज़ जो मुझे चुकाना नहीं (क्षणिका)

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क़र्ज़ जो मुझे चुकाना नहीं ******* जो वक़्त मुझे देते हो, माना ये है काफ़ी पर मेरे लिए वो क़र्ज़ है ऐसा क़र्ज़ जो मुझे चुकाना नहीं क़र्ज़ ...
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सोमवार, 2 जनवरी 2012

310. एक नई शुरुआत

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एक नई शुरुआत *** माना कि बहुत कुछ छूट गया एक और सपना टूट गया पार कर लिया, तो कर लिया उस रास्ते पर दोबारा क्यों जाना जहाँ पाँव में छ...
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शनिवार, 31 दिसंबर 2011

309. बीत गया

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बीत गया ******* तय मौसम का एक मौसम अच्छा हुआ बीत गया हार का एक मनका अच्छा हुआ टूट गया ।    समय का मौसम मन का मनका साथ-साथ ...
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गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

308. एक अदद रोटी

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एक अदद रोटी *** सुबह से रात, रोज़ सबको परोसता गोल-गोल, प्यारी-प्यारी, नरम-मुलायम रोटी मिल जाती, काश!  उसे भी कभी खाने को गरम-गरम रोटी...
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मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

307. बेलौस नशा माँगती हूँ

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बेलौस नशा माँगती हूँ ******* सारे नशे की चीज़ मुझसे ही क्यों माँगती हो कहकर हँस पड़े तुम मैं भी हँस पड़ी तुमसे न माँगू तो किससे भल...
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शनिवार, 17 दिसंबर 2011

306. अब डूबने को है

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अब डूबने को है *** बहाने नहीं हैं पलायन के न कोई अफ़साने हैं मेरे न कोई ऐसा सच, जिससे तुम भागते हो और सोचते हो कि मुझे तोड़ देगा। ...
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गुरुवार, 15 दिसंबर 2011

305. जाने कहाँ गई वो लड़की (पुस्तक - 31)

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जाने कहाँ गई वो लड़की ******* सफ़ेद झालर वाली फ्रॉक पहने जिसपे लाल-लाल फूल सजे उछलती-कूदती, जाने कहाँ गई वो लड़की ।  बकरी का पग...
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शनिवार, 10 दिसंबर 2011

304. आदमज़ाद की बात नहीं

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आदमज़ाद की बात नहीं  ***  प्यार की उम्र क्या होती है?    साथ जीने की शर्त क्या होती है?    अजब सवाल पूछते हो    प्यार की उम्र कभी ख़त...
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सोमवार, 5 दिसंबर 2011

303. अपनी-अपनी धुरी (पुस्तक - 106)

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अपनी-अपनी धुरी ******* अपनी-अपनी धुरी पर चलते, पृथ्वी और ग्रह-नक्षत्र जीवन-मरण हो या समय का रथ नियत है सभी की गति, धुरी और चक्र ।  ब...
21 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 22 नवंबर 2011

302. चुपचाप सो जाऊँगी

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चुपचाप सो जाऊँगी  ******* इक रोज़ तेरे काँधे पे यूँ चुपचाप सो जाऊँगी ज्यूँ मेरा हो वस्ल आख़िरी और जहाँ से हो रुख़सती ।  जो कह न पाए...
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बुधवार, 16 नवंबर 2011

301. उम्र कटी अब बीता सफ़र (पुस्तक - 47)

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उम्र कटी अब बीता सफ़र ******* बचपन कब बीता बोलो हँस पड़ा आईना ये कहकर काले गेसुओं ने निहारा ख़ुद को चाँदी के तारों से लिपटाया ख़ुद को ...
25 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

300. अल्फ़ाज़ उगा दूँ (क्षणिका)

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अल्फ़ाज़ उगा दूँ ******* सोचती हूँ कुछ अल्फ़ाज़ उगा दूँ तितर-बितरकर हर तरफ़ पसार दूँ चुक गए हैं मेरे अंतस् से सभी शायद किसी निर्मोही ...
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मंगलवार, 8 नवंबर 2011

299. भय

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भय *** भय! किससे भय? ख़ुद से? ख़ुद से कैसा भय? असम्भव! पर ये सच है अपने आप से भय ख़ुद के होने से भय ख़ुद के खोने का भय अपने शब्दों ...
12 टिप्‍पणियां:
रविवार, 6 नवंबर 2011

298. ज़िन्दगी कहाँ-कहाँ है

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ज़िन्दगी कहाँ-कहाँ है ******* तुम्हारी निशानदेही पर साबित हुआ कि ज़िन्दगी कहाँ-कहाँ है और कहाँ-कहाँ से उजड़ गई है ।  एक लोकोक्ति की ...
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शनिवार, 5 नवंबर 2011

297. चक्रव्यूह (पुस्तक - 74)

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चक्रव्यूह ******* कैसे-कैसे इस्तेमाल की जाती हूँ अनजाने ही, चक्रव्यूह में घुस जाती हूँ जानती हूँ, मैं अभिमन्यु नहीं जिसने चक्रव्यूह ...
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बुधवार, 26 अक्टूबर 2011

296. दीपावली (दीपावली पर 11 हाइकु) पुस्तक - 20

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दीपावली (दीपावली पर 11 हाइकु) ******* 1. दीपों की लड़ी लक्ष्मी की आराधना दीवाली आई। 2. लक्ष्मी की पूजा पटाखों का है शोर दीवाली प...
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रविवार, 23 अक्टूबर 2011

295. मेरे शब्द (पुस्तक - 41)

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मेरे शब्द ******* बहुत कठिन है, पार जाना ख़ुद से, और उन तथाकथित अपनों से जिनके शब्द मेरे प्रति सिर्फ़ इसलिए निकलते हैं कि मैं आहत हो स...
15 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

294. बाध्यता नहीं (क्षणिका)

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बाध्यता नहीं ******* ये मेरी चाह थी कि तुम्हें चाहूँ और तुम मुझे पर ये सिर्फ़ मेरी चाह थी तुम्हारी बाध्यता नहीं ।  - जेन्नी शबनम (9. ...
15 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

293. ज़िन्दगी (तुकांत)

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ज़िन्दगी ******* ज़िन्दगी तेरी सोहबत में, जीने को मन करता है   चलते हैं कहीं दूर कि, दुनिया से डर लगता है ।  हर शाम जब अँधेरे, छीनते है...
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डॉ. जेन्नी शबनम
नई दिल्ली / भागलपुर / कोठियाँ (शिवहर), दिल्ली / बिहार, India
'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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