लम्हों का सफ़र

मन की अभिव्यक्ति का सफ़र

शनिवार, 13 जुलाई 2013

411. सन्नाटे के नाम ख़त (10 हाइकु) पुस्तक 38, 39

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सन्नाटे के नाम ख़त (10 हाइकु) *** 1. सन्नाटा भागा चुप्पी ने मौन तोड़ा,  जाने क्या बोला।   2. कोई न आया  पसरा है सन्ना...
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शनिवार, 22 जून 2013

410. उठो अभिमन्यु

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उठो अभिमन्यु *** उचित वेला है  कितना कुछ जानना-समझना है   कैसे-कैसे अनुबंध करने हैं पलटवार की युक्ति सीखनी है  तुम्हें मिटन...
32 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 14 जून 2013

409. अहल्या

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अहल्या ******* छल भी तुम्हारा  बल भी तुम्हारा ठगी गई मैं, अपवित्र हुई मैं  शाप भी दिया तुमने   मुक्ति-पथ भी बताया तुमने   ...
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शुक्रवार, 7 जून 2013

408. खूँटे से बँधी गाय

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खूँटे से बँधी गाय *******  खूँटे से बँधी गाय  जुगाली करती-करती  जाने क्या-क्या सोचती है   अपनी ताक़त  अपनी क्षमता  अपनी बे...
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रविवार, 2 जून 2013

407. शगुन (क्षणिका)

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शगुन ******* हवा हर सुबह चुप्पी ओढ़  अँजुरी में अमृत भर  सूर्य को अर्पित करती है  पर सूरज है कि जलने के सिवा  कोई शगुन नहीं...
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रविवार, 26 मई 2013

406. गुलमोहर (16 हाइकु) पुस्तक - 36-38

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गुलमोहर *******  1. उनका आना  जैसे मन में खिला   गुलमोहर ।  2. खिलता रहा   गुलमोहर फूल   पतझर में ।    3. तुम...
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सोमवार, 13 मई 2013

405. माँ (मातृ दिवस पर 11 हाइकु) पुस्तक 35,36

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  माँ  ******* 1. जिससे सीखा  सहनशील होना,  वो है मेरी माँ ।     2. माँ-सी है छवि  माँ मुझमें है बसी,   माँ देती रूप ...
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रविवार, 5 मई 2013

404. तुम्हारा 'कहा'

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तुम्हारा 'कहा' *******  जानती हूँ,  तुम्हारा 'कहा'  मुझसे शुरू होकर  मुझ पर ही ख़त्म होता है,  उस 'कहा'...
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बुधवार, 1 मई 2013

403. औक़ात देखो

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औक़ात देखो *** पिछला जन्म   पाप की गठरी    धरती पर बोझ   समाज के लिए पैबन्द    यह सब सुनकर भी   मुँह उठाए,  तुम्हें ही अग...
13 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

402. जन्म का खेल (7 हाइकु) पुस्तक 34,35

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जन्म का खेल ******* 1. हर जन्म में  तलाशती ही रही  ज़रा-सी नेह ।  2. प्रतीक्षारत  एक नए युग की  कई जन्मों से ।  ...
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बुधवार, 24 अप्रैल 2013

401. अब तो जो बचा है (पुस्तक- 79)

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अब तो जो बचा है ******* दो राय नहीं  अब तक कुछ नहीं बदला था   न बदला है, न बदलेगा  सभ्यता का उदय और संस्कार की प्रथाएँ  युग ...
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रविवार, 21 अप्रैल 2013

400. रात (11 हाइकु) पुस्तक 33, 34

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रात ******* 1. चाँद न आया  रात की बेक़रारी बहुत भारी।  2. रात शर्माई  चाँद का आलिंगन  पूरनमासी।   3. रोज़ जा...
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बुधवार, 17 अप्रैल 2013

399. इलज़ाम न दो

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इलज़ाम न दो ******* आरोप निराधार नहीं  सचमुच तटस्थ हो चुकी हूँ  संभावनाओं की सारी गुंजाइश मिटा रही हूँ  जैसे रेत पे ज़िन्दगी लि...
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शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

398. मन में है फूल खिला (माहिया लिखने का प्रथम प्रयास) (5 माहिया)

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मन में है फूल खिला (5  माहिया)  (माहिया लिखने का प्रथम प्रयास) ******* 1. जाने क्या लाचारी    कोई ना समझे     मन फिर भी है भ...
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बुधवार, 3 अप्रैल 2013

397. अद्भुत रूप (5 ताँका)

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अद्भुत रूप   *** 1. नीले नभ से झाँक रहा सूरज,  बदली खिली  भीगने को आतुर धरा का कण-कण।   2. झूमती नदी  बतियाती लह...
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रविवार, 31 मार्च 2013

396. आदत

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आदत ******* सपने-अपने, ज़िन्दगी-बन्दगी    धूप-छाँव, अँधेरे-उजाले    सब के सब    मेरी पहुँच से बहुत दूर    सबको पकड़ने की कोशिश...
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बुधवार, 27 मार्च 2013

395. होली के रंग (8 हाइकु) पुस्तक 32, 33

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होली के रंग ******* 1. रंग में डूबी  खेले होरी दुल्हिन   नई नवेली ।  2.  मन चितेरा  अब तक न आया  फगुआ बीता ।  3...
14 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 23 मार्च 2013

394. आत्मा होती अमर (12 सेदोका)

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आत्मा होती अमर  *** 1. छिड़ी है जंग  सच-झूठ के बीच  होगी किसकी जीत? हारता झूठ    भले देर-सबेर   सच होता विजयी।    2. ...
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गुरुवार, 21 मार्च 2013

393. यह कविता है (क्षणिका)

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यह कविता है *******  मन की अनुभूति    ज़रा-ज़रा जमती,  ज़रा-ज़रा उगती ज़रा-ज़रा सिमटती, ज़रा-ज़रा बिखरती   मन की परछाई बन एक रूप है...
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बुधवार, 20 मार्च 2013

392. स्त्री के बिना (स्त्री पर 7 हाइकु) पुस्तक 32

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स्त्री के बिना  ******* 1. अग्नि-परीक्षा   अब और कितना  देती रहे स्त्री ।  2. नारी क्यों पापी  महज़ देखने से  पर-पुर...
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सोमवार, 18 मार्च 2013

391. तुम्हें पसंद जो है (क्षणिका)

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तुम्हें पसंद जो है ******* तस्वीरों में तुम  बड़े दिलकश लगते हो    आँखों में शरारत, होंठों पर मुस्कुराहट काली घनी लटें, कपाल को ज...
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बुधवार, 13 मार्च 2013

390. क्यों नहीं आते

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क्यों नहीं आते ******* अकसर सोचती हूँ   इतने भारी-भारी-से  ख़याल क्यों आते हैं जिनको पकड़ना  मुमकिन नहीं होता  और अगर पकड़...
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शुक्रवार, 8 मार्च 2013

389. अब न ऊ देवी है न कड़ाह

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अब न ऊ देवी है न कड़ाह ******* सरेह से अभी-अभी लौटे हैं    गोड़ में कादो-माटी, अँचरा में लोर   दउरी में दू ठो रोटी-नून-मर्चा  ...
17 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 6 मार्च 2013

388. चाँद का रथ (7 हाइकु) पुस्तक 31, 32

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चाँद का रथ ******* 1. थी विशेषता   जाने क्या-क्या मुझमें, हूँ अब व्यर्थ ।  2. सीले-सीले-से गर हों अजनबी,  होते हैं र...
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रविवार, 3 मार्च 2013

387. ज़िन्दगी स्वाहा (क्षणिका)

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ज़िन्दगी स्वाहा ******* कब तक आख़िर  मेढ़क बन कर रहें आओ संग-संग, एक बड़ी छलाँग लगा ही लें  पार कर गए तो मंज़िल  गिर पड़े तो वही दु...
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शुक्रवार, 1 मार्च 2013

386. कतर दिया

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कतर दिया ******* क्या-क्या न कतर दिया    कभी सपने    कभी आवाज़    कभी ज़िन्दगी    और तुम हो कि    किसी बात की कद्र ही नहीं कर...
14 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

385. हवा

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हवा *** हवा  कटार है, अंगार है, तूफ़ान है  हवा जलती है, सुलगती है, उबलती है  हवा लहू से लथपथ  लाल और काले के भेद से अनभिज्ञ ...
13 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

384. यादें जो है ज़िन्दगी (8 सेदोका)

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यादें जो है ज़िन्दगी  *** 1. वर्षा की बूँदें  टप-टप बरसे  मन का कोना भींगे,  सींचती रही  यादें खिलती रही   यादें जो है ...
12 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

383. औरत : एक बावरी चिड़ी (7 हाइकु) पुस्तक 30, 31

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औरत : एक बावरी चिड़ी  ****** 1. चिड़िया उड़ी बाबुल की बगिया  सूनी हो गई। 2. ओ चिरइया  कहाँ उड़ तू चली  ले गई ख़ुशी। ...
16 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

382. जाड़ा भागो (13 हाइकु) पुस्तक 29, 30

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जाड़ा भागो *** 1. आँख मींचती थर-थर काँपती  ठण्डी हवाएँ। 2. आलसी दिन  है झटपट भागा  जो जाड़ा दौड़ा। 3. सूरज सोता...
18 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

381. प्रेम का जादू (वेलेन्टाइन डे पर 7 हाइकु)

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प्रेम का जादू  *** 1. प्रेम का पाग घीमे-धीमे पकता जो प्रेम सच्चा ।  2. ख़ुद में लीन गिरता-सँभलता प्रेम अनाड़ी ।  3...
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रविवार, 3 फ़रवरी 2013

380. हों मन सुवासित (नव वर्ष पर 7 हाइकु) पुस्तक 28

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हों मन सुवासित  ******* 1. शुभ प्रभात! मंगल-कामनाएँ नए साल में ।  2.  खुशियाँ फैले  हों मन सुवासित  हम सब का ।  3. ...
12 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 31 जनवरी 2013

379. चकमा (क्षणिका)

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चकमा  ******* चलो आओ,  हाथ थामो मेरा,  मुट्ठी जोर से पकड़ो  वहाँ तक साथ चलो, जहाँ ज़मीन-आसमान मिलते हैं  वहाँ से सीधे नीचे छलाँग ...
12 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 17 जनवरी 2013

378. स्टैचू बोल दे (10 क्षणिका)

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स्टैचू बोल दे  *******   1.  स्टैचू बोल दे ***  जी चाहता है   उन पलों को  तू स्टैचू बोल दे   जिन पलों में वह साथ हो   और फिर भूल ...
17 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 7 जनवरी 2013

377. क्रान्ति-बीज बन जाना (पुस्तक 59)

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क्रान्ति-बीज बन जाना *** रक्त-बीज से पनपकर  कोमल पंखुड़ियों-सी खिलकर  सूरज को मुट्ठी में भर लेना   तुम क्रान्ति-बीज बन जाना ।  नाज़ुक हथेलियो...
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डॉ. जेन्नी शबनम
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'ये मन की अभिव्यक्ति का सफ़र है, जो प्रति-पल मन में उपजता है...' -जेन्नी शबनम
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