शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

796. पाँव तैयार नहीं

पाँव तैयार नहीं

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राह सामने है, चलने को पाँव तैयार नहीं
खड़े रहने, अड़े रहने को पाँव मददगार नहीं 
पाँव ज़ख़्मी हो गए, अब वे ठहरे रहेंगे
न ज़मीन न स्वर्ग की सीढ़ी पर ये बढ़ेंगे
अब कोई डर नहीं, कहीं जाना नहीं
कहीं पहुँचने की आतुरता नहीं
यह आराम का समय है
तनिक विश्राम का समय है
अपने ठहराव पर खिलखिलाना है
समय के साथ समय बिताना है।

-जेन्नी शबनम (1.1.2026)
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7 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

नव वर्ष मंगलमय हो | शीघ्र स्वास्थलाभ की कामनाएं |

Admin ने कहा…

आप थकान को कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी की तरह रखते हो। यहाँ रुकना हार नहीं लगता, बल्कि खुद से मिलने का मौका लगता है। पाँव के ज़ख्म जीवन के अनुभव बोलते हैं और ठहराव में भी एक गरिमा दिखाते हैं। आप भागने की मजबूरी तोड़ते हो और आराम को अपराध नहीं मानते।

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

आभार !

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

जी, सही कहा। शुक्रिया!

Onkar ने कहा…

बहुत सुंदर

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

शुक्रिया!

The Incredible India ने कहा…

सच कहूँ तो तुम्हारी ये पंक्तियाँ दिल को सीधा छू जाती हैं। हम सब भागते-भागते इतने थक जाते हैं कि रुकने को कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि तुमने ठहराव को हिम्मत बना दिया। मुझे सबसे ज्यादा ये बात पसंद आई कि तुमने दर्द को भी आराम में बदल दिया। अक्सर हम ज़ख्मी कदमों को घसीटते रहते हैं, लेकिन तुमने उन्हें आराम दिया।