क्षणभंगुर जीवन
***
कितने बहाने
कितने दलील
सब फ़िज़ूल
ठगाया जीवन।
सोचा समझा
सब बिखरा
आघात मिला
व्यर्थ जीवन।
उपाय नहीं
समझौता सही
नासमझ नहीं
यही जीवन।
सोच बदलो
जीवन समझो
अमर नहीं
क्षणभंगुर जीवन।
-जेन्नी शबनम (17.6.2026)
____________________
क्षणभंगुर जीवन
वृद्ध का दुःख
नौतपा दैत्य
यात्री सूरज
***
यात्री सूरज
करके रोज़ यात्रा
थकता होगा
चलना ही है धर्म
कोई हो ऋतु
कहीं न पहुँचता,
उसके पाँव
ज़ख़्मी तो होते होंगे
कौन लगाये
मरहम व पट्टी
दर्द छुपाके
जीवन का सन्देश
रोज़ ही देता
पर कौन सुनता
जल-जल के
उजाला पसारता,
बिन बैटरी
रोबोट बना सूर्य
रात व दिन
चकरघिन्नी बन
मन न चाहे
चलता ही रहता,
हे यायावर!
एक दिन तो करो
ज़रा विश्राम
तुमसे ही तो जग
सोता-जागता
एक दिन लो तुम
सोने का मज़ा
फिर चल पड़ना
बिन ठहरे
हँसते व जलते,
घुमंतू सूर्य!
बात सुन रहा न
आ साथ बैठ
ज़रा तो गप्पे लड़ा
चाय भी पी ले
फिर तू निकलना
अपनी यात्रा पर।
-जेन्नी शबनम (18.10.2022)
____________________
__________________
युद्ध जारी है
स्त्रियाँ