शनिवार, 18 जून 2016

516. मन-आँखों का नाता (4 सेदोका)

मन-आँखों का नाता  

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1.
गहरा नाता  
मन-आँखों ने जोड़ा  
जाने दूजे की भाषा,  
मन जो सोचे-  
अँखियों में झलके  
कहे सम्पूर्ण गाथा।   

2.
मन ने देखे  
झिलमिल सपने  
सारे के सारे अच्छे,  
अँखियाँ बोलें-  
सपने तो सपने  
नहीं होते अपने।   

3.  
बावरा मन  
कहा नहीं मानता  
मनमर्ज़ी करता,  
उड़ता जाता  
आकाश में पहुँचे  
अँखियों को चिढ़ाए।   

4.  
आँखें ही होती  
यथार्थ हमजोली  
देखे अच्छी व बुरी,  
मन बावरा  
आँखों को मूर्ख माने  
धोखा तभी तो खाए।  
 
-जेन्नी शबनम (18.6.2016)
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