मन-आँखों का नाता
***
1.
गहरा नाता
मन-आँखों ने जोड़ा
जाने दूजे की भाषा,
मन जो सोचे-
अँखियों में झलके
कहे सम्पूर्ण गाथा।
2.
मन ने देखे
झिलमिल सपने
सारे के सारे अच्छे,
अँखियाँ बोलें-
सपने तो सपने
नहीं होते अपने।
3.
बावरा मन
कहा नहीं मानता
मनमर्ज़ी करता,
उड़ता जाता
आकाश में पहुँचे
अँखियों को चिढ़ाए।
4.
आँखें ही होती
यथार्थ हमजोली
देखे अच्छी व बुरी,
मन बावरा
आँखों को मूर्ख माने
धोखा तभी तो खाए।
-जेन्नी शबनम (18.6.2016)
_______________