शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

384. यादें जो है ज़िन्दगी (8 सेदोका)

यादें जो है ज़िन्दगी 

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1.
वर्षा की बूँदें 
टप-टप बरसे 
मन का कोना भींगे, 
सींचती रही 
यादें खिलती रही  
यादें जो है ज़िन्दगी। 

2.
जी ली जाती है 
कुछ लम्हें समेट
पूरी यह ज़िन्दगी,
पूर्ण भले हो  
मगर टीसती है 
लम्हे-सी ये ज़िन्दगी। 

3.
महज़ नहीं
हाथ की लकीरों में 
ज़िन्दगी के रहस्य,
बतलाती हैं 
माथे की सिलवटें 
ज़िन्दगी के रहस्य। 

4.
सीली ज़िन्दगी 
वक़्त के थपेड़ों से 
जमती चली गई 
कैसे पिघले?
हल्की-सी तपिश भी 
ज़िन्दगी लौटाएगी। 

5.
शैतान हवा 
पलट दिया पन्ना 
खुल गई किताब 
थी अधपढ़ी
ज़माने से थी छुपी 
ज़िन्दगी की कहानी। 

6.
जीवन लघु 
पानी का बुलबुला
दो पल का न पता  
क्षणभंगुर,
कर्म न्यायसंगत 
यादें होंगी अमर। 

7.
पानी-सा मन 
बह जाता उधर 
होता ढाल जिधर,
यादों का पानी   
वक़्त की थाप पर 
थिरकता मगर। 

8.
बड़ी कोमल 
बहुत ही हसीन 
छुई-मुई ज़िन्दगी 
इसे न छेड़ो 
गर रूठ जो गयी 
बस यादें बचेंगी। 

-जेन्नी शबनम (24.9.2012)
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