बनूँ गुलमोहर
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1.
ज़िन्दगी हँसी
लिपटके रंगों से
खिले फूल हसीन,
मन चाहता
ओढ़कर रंगीनी
बनूँ गुलमोहर।
लिपटके रंगों से
खिले फूल हसीन,
मन चाहता
ओढ़कर रंगीनी
बनूँ गुलमोहर।
2.
पसरा हुआ
उदासी का मंज़र
रेगिस्तानी है फ़िज़ा
मन सहमा
हर शय ग़ुलाम
कैसा वक़्त है आया।
3.
4.
सुनता नहीं
बेपरवाह मन
करता मनमानी
जग से टूटा
पर नाता न छूटा
लगती भारी
मन में जो है बंद
सपनों की गठरी
मन चाहता
खोलकर गठरी
सपनों को उड़ाती।
मन चाहता
खोलकर गठरी
सपनों को उड़ाती।
4.
सुनता नहीं
बेपरवाह मन
करता मनमानी
जग से टूटा
पर नाता न छूटा
ये जगत् मोह-माया।
5.
हे सूर्य देव!
ज़रा रहम करो
धरती को बचाओ
मेघ को भेजो
तपते जीव-जन्तु
करुणा दिखलाओ।
6.
बाण व बात
हैं तीव्र हथियार
छूटे तो लौटे नहीं
माने न हार
करें क्रूर प्रहार
तन-मन छलनी।
7.
भले अबेर
मिलती है मंज़िल
देर हो या सबेर
जीवन-पथ
सूर्य-सा या चाँद-सा
चलना निरन्तर।
8.
जीवन-तप
राह में लाखों काँटे
कठिन है चलना
यही कर्त्तव्य
न कभी घबराना
न कभी ठहरना।
-जेन्नी शबनम (26.6.2026)
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