बुधवार, 17 जून 2026

806. क्षणभंगुर जीवन

क्षणभंगुर जीवन 

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कितने बहाने
कितने दलील
सब फ़िज़ूल
ठगाया जीवन। 

सोचा समझा
सब बिखरा
आघात मिला
व्यर्थ जीवन। 

उपाय नहीं
समझौता सही
नासमझ नहीं
यही जीवन। 

सोच बदलो
जीवन समझो
अमर नहीं
क्षणभंगुर जीवन।

-जेन्नी शबनम (17.6.2026)
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