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सोमवार, 21 सितंबर 2015

497. मग़ज़ का वह हिस्सा

मग़ज़ का वह हिस्सा

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अपने मग़ज़ के उस हिस्से को 
काट देने का मन होता है
जहाँ पर विचार जन्म लेते हैं
और फिर होती है
व्यथा की अनवरत परिक्रमा। 

जाने मग़ज़ का कौन-सा हिस्सा जवाबदेह है
जहाँ सवाल-ही-सवाल उगते हैं, जवाब नहीं उगते
जो मुझे सिर्फ़ पीड़ा देते हैं। 

उस हिस्से के न होने से
न विचार जन्म लेंगे
न वेदना की गाथा लिखी जाएगी
न कोई अभिव्यक्ति होगी 
न कोई भाषा 
न कविता

-जेन्नी शबनम (21.9.2015)
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बुधवार, 1 अप्रैल 2015

492. दुःखहारणी

दुःखहारिणी

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जीवन के तार को साधते-साधते   
मन-रूपी उँगलियाँ छिल गई हैं   
जहाँ से रिसता हुआ रक्त   
बूँद-बूँद धरती में समा रहा है 
मेरी सारी वेदनाएँ सोखकर 
धरती पुनर्जीवन का रहस्य बताती है  
हारकर जीतने का मन्त्र सुनाती है।    

जानती हूँ  
सम्भावनाएँ मिट चुकी हैं   
सारे तर्क व्यर्थ ठहराए जा चुके हैं  
पर कहीं-न-कहीं जीवन का कोई सिरा  
जो धरती के गर्भ में समाया हुआ है  
मेरी उँगलियों को थाम रखा है 
हर बार अन्तिम परिणाम आने से ठीक पहले  
यह धरती मुझे झकझोर देती है    
मेरी चेतना जागृत कर देती है
और मुझमें प्राण भर देती है। 
    
यथासम्भव चेष्टा करती हूँ 
जीवन प्रवाहमय रहे
भले पीड़ा से मन टूट जाए
पर कोई जान न पाए  
क्योंकि धरती जो मेरी दुःखहारणी है
मेरे साथ है।  

-जेन्नी शबनम (1.5.2015)
(मज़दूर दिवस)
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मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

21. घर

घर

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शून्य को ईंट-गारे से घेर, घर बनाना
एक भ्रम ही तो है
बेजान दीवारों से घर नहीं, महज़ आशियाना बनता है
घरों को मकान बनते अक्सर देखा है
मकान का घर बनना, ख़्वाबों-सा लगता है

न राम-सीता का घर बसा कभी
वरना ग़ैर के आरोप से घर न टूटता कभी
न कृष्ण का घर बसा कभी
वरना हज़ारों रानियों-पटरानियों से महल न सजता कभी
न राजमहलों को घर बनते सुना कभी
वरना रास-रंग न गूँजता कभी

देखा है कभी-कभी यों ही 
किसी फुटपाथ पर घर बसते हुए
फटे चिथड़ों और टूटी बरसाती से घर सजते हुए
रिश्तों की आँच और अपनेपन की छाँव से घर सँवरते हुए

ईंट की अँगीठी पर सूखी रोटी सेंकती, मुस्कुराती औरत
टूटी चारपाई पर अधनंगे बच्चे की किलकारी
थका-हारा-पस्त, पर ठहरा हुआ इन्सान 
उनका अटूट बन्धन, जो ओट देता हर थपेड़े से  
और बस जाता है एक घर

झोपड़ी-महल का फ़र्क़ नहीं, न ईंट-पत्थरों का है दोष
जज़्बात और यक़ीन की बुनियाद हो 
तो यों ही किसी वीराने में या आसमान तले 
बस जाता है घर

- जेन्नी शबनम (14.2.2009)
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