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गुरुवार, 11 जून 2026

805. वृद्ध का दुःख (10 हाइकु)

वृद्ध का दुःख 


***

1.
वृद्ध की आस
कोई तो हो पास
बाँटें वे दुःख।

2.
वृद्ध का दुःख
मन में समाहित
सोचके हित।

3.
वृद्ध का कोना
रिश्तों की राह ताके
रहता सूना।

4.
वृद्ध जीवन
अनुभवों का कोष
लो निःसंकोच।

5.
कोई न सुने
विलाप और रोना,
वृद्ध अकेला।

6.
वृद्ध बेचारा
कोई न सहारा
आँखें सजल।

7.
जवानी पूनो
वृद्ध जीवन अमा
मन बेचैन।

8.
बहते लोर
पोंछे न कोई और
वृद्ध अकेला।

9.
वृद्ध जीवन
अनुभव की आँखें
रखते मूँदे।

10.
जीवनभर
कर्मयोगी था वृद्ध,
अब बेकार।

-जेन्नी शबनम (26.9.2024)
__________________

मंगलवार, 26 मई 2026

802. प्रचण्ड गर्मी (10 हाइकु)

प्रचण्ड गर्मी

***

1.
प्रचण्ड गर्मी
धरा उबल रही
सूर्य अलाव।

2.
तपती धरा
हाहाकार है मचा
सूर्य अंगारा।

3.
लू के थपेड़े
सूर्य आग उगले 
सब झुलसे।

4.
रहम करो
प्रकृति पुकारती
सूर्य बहरा।

5.
पड़ा महँगा
प्रकृति से खेलना
क्रूर सूरज।

6.
खेत झुलसा
जीवन का बन्धन
साथ ही टूटा।

7.
प्यासे बेहाल
जीव-जंतु तड़पें 
पानी है खोजें।

8.
पी गया सूर्य
धरा हुई निर्जल 
मृत तलैया।

9.
साँसें ले आईं
खिला गुलमोहर
गरम हवा।

10.
शैतान सूर्य
आग है बरसाता
गर्मी का राजा।

-जेन्नी शबनम (24.5.2026)

__________________ 

रविवार, 8 मार्च 2026

799. स्त्रियाँ (10 हाइकु)

स्त्रियाँ

*** 

1.
स्त्रियों के हिस्से
परख-आकलन
यही चलन।

2.
स्त्रियाँ हैं फूल
दामन में हैं काँटें
दुःख क्या बाँटे।

3.
स्त्रियाँ-अंगार
आजीवन चलती
नहीं जलती।

4.
स्त्री के बिना
सूना है घर-बार
माने संसार।

5.
स्वयं सींचती
आजीवन पालती
जीव के पौधे।

6.
थाती में मिली
बेबसी व घुटन
स्त्री है बेचारी।

7.
स्त्रियाँ हैं काली
ज़रूरत पड़े तो
करे विध्वंस।

8.
फ़र्ज़ निभाती
मिला कंधे से कन्धा
पुरुष की स्त्री।

9.
आँचल गीला
हँसके पिए पीड़ा
स्त्री का जीवन।

10.
भूखी होती स्त्री
प्यार व सम्मान की
नहीं धन की।

-जेन्नी शबनम (8.3.2026)
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 
__________________

बुधवार, 4 मार्च 2026

798. होली-त्योहार

होली-त्योहार

***

1.
रंगों के संग
फागुन की बयार
होली तैयार।

2.
फूलों की क्यारी
प्रकृति पिचकारी
रंग खेलती।

3.
सूखे गुलाल
लज़ीज़ पकवान
होली त्योहार।

4.
भाँग पीकर
मदमस्त नाचते
रंग-अबीर।

5.
निकली टोली
भूल गिले-शिकवे
सभी हैं रँगे।

6.
रंग क्या चढ़े
आर्टिफ़िशियल है
रंग व रिश्ते।

7.
अपने घर
खींचकर ले आया
होली का रंग।

8.
रंगीली होली
तन ही रँग सकी
मन उदास।

9.
नहीं सुहाता
अब कोई भी रंग
मन बेरंग।

10.
होली हकीम
मिटाए दुःख-दर्द
सुख असीम।

11.
आया अबीर
घोलके पी ली पीर
मन रंगीन।

12.
सबको रँगे
भेदभाव भूलके
बौराई होली।

-जेन्नी शबनम (4.3.2026)
__________________

गुरुवार, 20 मार्च 2025

791. गौरैया (9 हाइकु)

गौरैया (हाइकु)

1.
नन्ही-सी जान
फुदक फुदकके
नाच दिखाती।

2.
प्यारी गौरैया
बचपन की सखा
मुझे भूली वो।

3.
छोटी गौरैया
चीं-चीं-चीं चहकके
हमें लुभाती।

4.
गौरैया लुप्त,
तकनीकी प्रगति
बनी दुश्मन।

5.
रोई तो होगी
अपने छूटे होंगे
गौरैया मूक।

6.
फिर से आओ
अँगना चहकाओ
सब है सूना।

7.
गौरैया दुःखी
न अटारी न वन
नहीं ठिकाना।

8.
गौरैया प्यारी
प्रदूषण से हारी
लुप्त हो गई।

9.
मेरी गौरैया
आओ न बतियाएँ
सुख व दुःख।

- जेन्नी शबनम (20.3.25)
(विश्व गौरैया दिवस)
__________________

गुरुवार, 13 मार्च 2025

790. होली (होली पर 20 हाइकु)

होली

(होली पर 20 हाइकु)


1.
भाँग पीकर
पुआ-पूड़ी खाकर
होली अघाई।

2.
होली भौजाई
लगाकर गुलाल
ख़ूब लजाई।

3.
धर्म व जाति
भेद नहीं करती
भोली है होली।

4.
होलिका जली
जलकर दिखाई
कर्म का पथ।

5.
दे बलिदान
होलिका ने सिखाया
सत्य का ज्ञान।

6.
देकर प्राण
होलिका ने बचाया 
धर्म का मान।

7.
पगली हवा
रंग उड़ाके बोली-
गाओ फगुआ।

8.
उड़ाओ रंग
फगुआ को भाता है
गुलाबी रंग।

9.
रँगी बावरी
साँवरे के रंग में
खेलती होली।

10.
उड़ा गुलाल
पिया की प्यारी
हुई है लाल।

11.
भेद व द्वेष
मन से है मिटाती
होली सन्मार्गी।

12.
आकर खेलो
अतीत को भूलके
रंगीली होली।

13.
अब तो भूलो
ग़लतफ़हमियाँ
होली खेलो न!

14.
मन भी रँगा
फगुआ के फाग से
मन है बँधा।

15.
रंग लेकर
चली हवा बसन्ती
धरा रंगती।

16.
सब भौजाई
अपनी या पराई
होली है भाई।

17.
हँसी-ठिठोली
मोहल्ले की भौजाई
सबको भाई।

18.
लगाओ रंग
करो ख़ूब धमाल
होली है यार।

19.
फाग का रंग  
अकेला यह मन  
किसे लगाऊँ?

20.
आई है होली   
किससे बाटूँ पीर 
मन अधीर। 

जेन्नी शबनम (13.3.25)
__________________

सोमवार, 10 फ़रवरी 2025

788. प्रवासी पूत (20 हाइकु)

प्रवासी पूत  

*** 

1.
नीड़ की यादें 
मन हुआ बेकल
प्रवासी पूत। 

2.
देश को लौटा
रोज़ी-रोटी की खोज
प्रवासी बेटा। 

3.  
दुःख में बेटा
विदेश की धरती  
बना बेगाना।

4.
पेट के वास्ते
बेटा बसा विदेश,
दुःखी माँ-बाप। 

5.
छूटा है देश
ज़िम्मेदारी का दंश
अकेला बच्चा।

6.
अकेला बच्चा 
माँ-बाप निस्सहाय
प्रवासी पूत।

7.
अकेला बेटा 
विदेश की धरती,
दुःख है भारी।

8.
प्रवासी पूत 
चढ़ गया सूली पे,
बेरोज़गारी।

9.
बेटा है देशी 
रोज़गार की खोज
बना विदेशी।

10.
काँटों से घिरा
प्रवासी बना बच्चा,
फूल भेजता।

11.
देश की याद
हर रोज़ सताती
क्या करे बेटा?

12.
विदेशी पूत
अपना न सहारा
दुःख है साथी।

13.
देश पराया  
चकमक दुनिया
बेटे को भाया।   
 
14.
बेगार बेटा 
विदेश का सपना,  
विष निगला। 

15.
फन्दे पे झुला 
माँ-बाप का सहारा 
प्रवासी बेटा। 

16.
विदेशी लोभ 
माँ-बाप बने ग़ैर,  
निर्मोही बेटा। 

17. 
माँ-बाबा मृत, 
राह अगोरे बेटे की 
अस्थि-कलश! 

18.
सुख की रातें 
मटमैली हैं यादें 
देश की बातें। 

19.
कपूत पूत 
विदेश बसा, छोड़
वृद्ध माँ-बाप।   

20.
सपूत पूत  
माँ-बाप बिन दुःखी 
विदेशी ज़मीं। 

-जेन्नी शबनम (10.2.2025)
___________________ 

बुधवार, 1 जनवरी 2025

786. नव वर्ष (20 हाइकु)

नव वर्ष 

***

1.
मन में आस-
नव वर्ष की भोर
हो पुनर्जन्म।

2.
लेकर आशा
नव वर्ष है आया
शुभ सन्देश।

3.
उँगली थामे
नव वर्ष की भोर
घूमने चली।

4.
चहकती है
नव वर्ष की भोर
ख़ूब है शोर।

5.
ठिठुरन है
पर मन में जोश
नूतन वर्ष। 

6.
पहली तिथि
नव वर्ष की भोर
ठण्ड से काँपी।

7.
जश्न की रात
स्वागत में संसार
नवीन वर्ष।

8.
धुँध में आई
नव वर्ष की भोर
मन विभोर।  

9.
दुःख को भूलें
नव वर्ष का दिन
स्वागत करें।

10.
नवीन वर्ष
उमंग पसारने
फिर से आया। 

11.
पिछला वर्ष
बना है इतिहास
याद आएगा।

12.
नूतन वर्ष
धक्का देके भगाया
पुराना वर्ष।

13.
साल पुराना
बन गया अतीत,
नया आएगा।

14.
स्मृति छोड़के
चुपचाप गुज़रा
साल पुराना।

15.
भोर की रश्मि
नव वर्ष को थामे
वक़्त पर आई।

16.
सन्देशा लाया-
वक़्त के साथ चलो,
नवीन वर्ष। 

17.
छुड़ाके लौटा
नए साल का हाथ
पिछला साल।

18.
याद दिलाता
वक़्त का बदलाव
नूतन वर्ष।

19.
बिछड़ गया
सुख-दुःख का साथी
पिछला साल।

20.
नूतन वर्ष,
वक़्त दोहराएगा
काल का क्रम।

-जेन्नी शबनम (1.1.2025)
___________________

 

सोमवार, 25 मार्च 2024

773. रंगों की झोली (20 हाइकु)

रंगों की झोली 

***

1.
विजयी भव
होली का आशीर्वाद
हर माँ देती।

2.
माँ-बाबा पास
रॉकेट से भेजती
रंगों की झोली!

3.
जम के खेलो
प्राकृतिक गुलाल
न हो बीमार।

4.
गेंदा-पलाश
बनके होली रंग
रहे हुलस।

5.
फगुआ गीत
मौसम में गूँजता
मन झूमता।

6.
होली का रंग
मन पे चढ़ा गाढ़ा
अपनों संग।

7.
होली त्योहार
परिवार जो साथ
फैला उल्लास।

8.
अम्मा ग़रीब
पिचकारी है रूठी
बच्चे उदास।

9.
रंग-गुलाल
नैहर न पीहर
किसको भेजूँ!

10.
फगुआ रंग
जाने मन की पीर
न हो अधीर।

11.
होली है आई
न रंग, न मिठाई
नहीं कमाई।

12.
फगुआ गाती
हवा हुई रंगीन
रंग उड़ाती।

13.
होली रंगीन
सबको रंगकर
ठट्ठा करती।

14.
होली के यार
रंग व पकवान
मिलके बाँटो।

15.
होली की मस्ती
भूलो अपनी हस्ती
रँग दो बस्ती।

16.
बसन्ती हवा
झूमती मतवाली
रंग लगाती।

17.
पलाश रंग
गहरा निखरता
प्यार का रंग।

18.
मन से खेली
फगुआ वाली होली
पिया की हो ली।

19.
रंग बरसे
मनवा है तरसे
पी परदेस।

20.
पराया घर
रंगीन हुआ तन
भीगा है मन।

-जेन्नी शबनम (25.3.24)
__________________ 

बुधवार, 20 दिसंबर 2023

769. मन गुल्लक (5 हाइकु)

मन गुल्लक (5 हाइकु)

1.
मन गुल्लक
ख़ुशियों का ख़ज़ाना
ख़त्म न होता।

2.
मन है बना
ख़ुशियों का गुल्लक
कोई न लूटे।

3.
भर के रखो
ख़ुशियों का गुल्लक
भले ही टूटे।

4.
भरा गुल्लक
ख़ुशियों का रुपया
मेरा ख़ज़ाना।

5.
मेरा गुल्लक
ख़ुशियों से है भरा
कभी न टूटा।

- जेन्नी शबनम (19.12.2023)
_____________________ 

रविवार, 12 नवंबर 2023

766. दीवाली ख़ुश (20 हाइकु)

दीवाली ख़ुश (हाइकु)
***
1.
पूनो-सी खिली
चहके दीया-बाती
हर अँगना।

2.
अमा जा छुपी
दीयों से डरकर,
ख़ुश दीवाली।

3.
बम-पटाखे
प्रदूषण से हारे
डिब्बों में बन्द।

4.
जल न सके
प्रदूषण पसरा
पटाखे दुःखी।

5.
जन बेचारा
प्रदूषण का मारा
पटाखे गुम।

6.
पूनो चाहती-
काश! दिखे दीवाली!
अमा से हारी।

7.
नभ में तारे
दीवाली हैं मनाते
ज़मीं पे दीए।

8.
अमा की रात
घर-घर पूर्णिमा
दीवाली रात।

9.
ऊँचे महल
जगमग दीवाली,
झोपड़ी दुःखी।

10.
अमा भगाके
दीवाली देती सीख-
विजयी भव!

11.
रात काली है
मन में दीवाली है
घबराना क्यों?

12.
अमा छँटेगी
मत सोच अधिक
होगी दीवाली। 

13.
चाँद-सितारे
प्रदूषण ने खाए,
दीप जलाएँ।

14.
हारना मत
दीवाली का सन्देश
दीप-से जलो!

15.
अँधेरा छुपा,
घर-घर दीवाली
लगती न्यारी।

16.
माटी का दीया
जगमग बिजली,
दुःखी बेचारा।

17.
मुस्कुरा रही
दीपों की फुलवारी
सुन्दर-प्यारी।

18.
सुन दीवाली!
जल्दी मत लौटना
साथ रहना।

19.
दीवाली बोली-
माटी के दीप जला!
माटी है ख़ुश।

20.
ख़ूब चहकी
बिजली की लड़ियाँ,
दीपक दुःखी।

-जेन्नी शबनम (12.10.202)
____________________ 

सोमवार, 5 जून 2023

759. पर्यावरण (10 हाइकु)

पर्यावरण

1.

भटक रहे 

जंगल-मरुस्थल 

जीव व जन्तु।   


2.

जंगल मिटा

बना है मरुस्थल 

आँखें हैं नम।


3.

कब उजड़े 

काँप रहे जंगल

रौद्र मानव। 


4.

बिछा पत्थर 

खोई पगडण्डी 

पाँव में चुभे। 


5.

दूषित जल

नदी है तड़पती 

प्यास की मारी। 


6.

कौन सुनेगा

उजड़ने की व्यथा

प्रकृति रोती। 


7.

ताल-तलैया

आसमान को ताके 

सूखते जाते। 


8.

नाग-सा डँसे

व्यभिचारी मानव

प्रकृति रोए। 


9.

शहर बना

पत्थरों का जंगल

मन वीरान। 


10.

पर्यावरण 

अब कैसे मुस्काए?

बड़ी लाचारी।


-जेन्नी शबनम (5.6.2023)

(पर्यावरण दिवस) 

_____________________

गुरुवार, 9 मार्च 2023

758. होली (9 हाइकु)

होली (9 हाइकु)

***


1.

वासन्ती पर्व   

बन्धनों से हों मुक्त   

देती है सीख। 


2.

मन झूमता   

रंग की है बौछार   

मिलते यार। 


3.

हँसी-मज़ाक   

ये रंगीन-फुहार   

उम्र भुलाए। 


4.

फाग-तरंग   

हँसे मन मलंग   

खेलो रे रंग। 


5.

झूमके नाची   

अलसाई-सी देह   

होली के संग। 


6.

नशीला रंग   

मन को दिया रँग   

आओ खेले रंग।   


7.

होली रंगीन   

भिगोया जब तन   

मन भी रँगा। 


8.

फ़िज़ा रंगीन 

फागुन की फुहार 

मन क्यों सूना?


9.

रंग वही है

होली की खुमारी है,

मन  रँगा। 


- जेन्नी शबनम (8. 3. 23)

_________________


शनिवार, 24 सितंबर 2022

750. मृत्यु सत्य है (मृत्यु पर 50 हाइकु)

मृत्यु सत्य है
(मृत्यु पर 50 हाइकु)

*** 

1. 
मृत्यु सत्य है   
बेख़बर नहीं हैं     
दिल रोता है।   

2. 
शाश्वत आत्मा   
अपनों का बिछोह   
रोती है आत्मा।   

3. 
काम न आता   
काल जब आ जाता   
अकूत धन।   

4. 
यम कठोर   
आँसू से न पिघला,   
माँ-बाबा मृत।   

5. 
समय पूर्ण,   
मनौती है निष्फल,   
यम का धर्म।   

6. 
यम न माना   
करबद्ध निहोरा   
जीवन छीना।   

7. 
हारा मानव,   
छीन ले गया प्राण   
यम दानव।

8.
आ धमकता
न चिट्ठी न सन्देश 
यम अतिथि।   

9. 
मौत का खेला   
कोरोना फिर खेला   
तीसरा साल।   

10. 
मन बेकल   
जाने कौन बिछड़े   
कोरोना काल।   

11. 
यमदूत-सा,   
कोरोना प्राण लेता   
बहुत डराता।   

12. 
कोहराम है   
कोरोना के सामने   
सब लाचार।   

13. 
थमता नहीं   
कोरोना का क़हर   
श्मसान रोता।   

14. 
मालिक प्राण,   
जब चाहे छीन ले   
देह ग़ुलाम।   

15. 
मृत्यु का पल   
अब समझ आया   
जीवन माया।   

16. 
लेकर जाती   
वैतरणी के पार,   
मृत्यु है यार।   

17. 
पितृलोक है   
शायद उस पार,   
सुख-संसार।   

18. 
दुःख अपार   
मिलता आजीवन,   
निर्वाण तक।   

19. 
धम्म से आई   
लेकर माँ का प्राण   
मौत है भागी।   

20. 
बिना जिरह   
मौत की अदालत   
मौत की सज़ा।   

21. 
वक़्त के पास   
अवसान के वक़्त   
नहीं है वक़्त।   

22. 
मौत बेदर्द   
ज़रा देर न रुकी,   
अम्मा निष्प्राण।   

23. 
आस का दीया   
सदा के लिए बुझा,   
मौत की आँधी।   

24. 
निर्दय मौत   
छीन ले गई प्राण   
थे अनजान।   

25. 
मृत्यु का खेल,   
ज़रा न संवेदना   
है विडम्बना।   

26. 
ज़रा न दर्द   
मौत बड़ी बेदर्द   
हँसी निर्लज।   

27. 
ताक़त दिखा   
मौत मुस्कराकर   
प्राण हरती।   

28. 
माँ को ले गई   
डरा-धमकाकर   
मौत निष्ठुर।   

29. 
पितृधाम में   
मृत्यु है पहुँचाती,   
मृत्यु-रथ से।   

30. 
मौत ने छीने   
हमारे अपनों को,   
हृदय ज़ख़्मी।   

31. 
खींच ले चलो,   
यम का फरमान   
जिसको चाहे।   

32. 
रुला-रुलाके   
तमाशा है दिखाती   
मौत नर्तकी।   

33. 
बच्चे चीखते   
हृदय विदारक,   
मौत हँसती।   

34. 
लिप्सा अनन्त   
क्षणभंगुर प्राण   
लोभी मानव।   

35. 
आ धमकती   
मग़रूर है मौत   
साँसें छीनती।   

36. 
निगल गई   
मौत फिर भी भूखी   
हज़ारों प्राण।   

37. 
सब भकोसा   
आदमी और पैसा   
भूखा कोरोना।   

38. 
मृत्यु की जीत   
जीवन-मृत्यु खेल,   
शाश्वत सत्य।   

39. 
मौत का यान   
जबरन उठाकर   
फुर्र से पार।   

40. 
सहमी फ़ज़ा   
ठिठकी देख रही,   
मौत का जश्न।   

41. 
स्थायी बसेरा,   
किराए का संसार   
मृत्यु का घर।   

42. 
हज़ारों मौत   
असामयिक मौत,   
ख़ून के आँसू।   

43. 
देख संसार   
मौत बना व्यापार   
बेबस काल।   

44. 
होते विलीन   
अपने या पराये,   
मौत से हारे।   

45. 
सन्देश, डरी   
दिल है दहलाती   
मौत की पाती।   

46. 
मौत-कटार   
दिल जिसपे आए   
करती वार।   

47. 
निष्प्राण प्राणी   
मौत से कैसे लड़े   
साँसों के बिन।   

48. 
क्रूर नियति   
मज़ाक है उड़ाती   
मौत की साथी।   

49. 
ख़ून ही ख़ून   
मौत है नरभक्षी,   
किसकी बारी।   

50. 
असह्य व्यथा   
सबने है समझा,   
मौत निर्बुद्धी।   

-जेन्नी शबनम (24.9.2022)
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बुधवार, 14 सितंबर 2022

749. हमारी मातृभाषा (6 हाइकु)

हमारी मातृभाषा (6 हाइकु)

***

1. 
बिलख रही    
मातृभाषा बेचारी   
पा अपमान।  

2. 
हमारी भाषा   
बनी जो राजभाषा   
है मातृभाषा।  

3. 
अपनी भाषा   
नौनिहाल बिसरे,   
हिन्दी पुकारे।  

4. 
रुलाते सभी   
फिर भी है हँसती   
हमारी हिन्दी।  

5. 
अपनों द्वारा   
होती अपमानित   
हिन्दी शापित।  

6. 
हिन्दी कहती-   
तितली-सी उड़ूँगी   
नहीं हारूँगी।  

-जेन्नी शबनम (14.9.2022)
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सोमवार, 4 जुलाई 2022

744. भोर (40 हाइकु)

भोर 

***

1.
भोर होते ही
हड़बड़ाके जागी,
धूप आलसी।

2.
आँखें मींचता
भोरे-भोरे सूरज
जगाने आया।

3.
घूमता रहा
सूरज निशाचर
भोर में लौटा।

4.
हाल पूछता
खिड़की से झाँकता,
भोर में सूर्य।

5.
गप्प करने
सूरज उतावला
आता है भोरे।

6.
छटा बिखेरा
सतरंगी सूरज
नदी के संग।

7.
सुहानी भोर
दीपक-सा जलता
नन्हा सूरज।

8.
गंगा मइया
रोज़ भोरे मिलती
सूरज सखा।

9.
भोर की वेला
सूरज की किरणें
लाल जोड़े में।

10.
नदी से पूछी
किरणें लजाकर,
नहाने आऊँ?

11.
किरणें प्यारी
छप-छप नहाती
नदी है टब।

12.
चली किरणें
संसार को जगाने
हुआ बिहान।

13.
तन्हा सूरज
उम्मीद से ताकता
कोई तो बोले।

14.
मन का बच्चा
खेलने को आतुर,
सूरज गेंद।

15.
चिड़िया बोली
तुम सब भी जागो
मैं जग गई।

16.
सोने न देता
भोरे-भोरे जगाता
क्रूर सूरज।

17.
अनिद्रा रोगी 
भोरे-भोरे जागते
सूरज बाबा।

18.
माँ-सी किरणें
दुलार से उठाती
रोज़ सबेरे।

19.
सूरज देव
अँगने में उतरे
फूल खिलाने।

20.
साथ बैठो न,
सूर्य का मनुहार
भोर है भई।

21.
पानी माँगने
गंगा के पास दौड़ा
सूरज प्यासा।

22.
सूरज भाई
बेखटके जगाए
बिना शर्माए।

23.
जल्द भोर हो
सूर्य का इन्तिज़ार,
सूरजमुखी। 

24.
साफ़ सुथरा
नदी में नहाकर
सूर्य चमका।

25.
भोर में आता
दिनभर बौराता,
आवारा सूर्य।

26.
ठण्ड की भोर
आराम फ़रमाता
सूर्य कठोर।

27.
गच्चा दे गया
बेईमान सूरज
जाड़े की भोर।

28.
भोरे उठाता
करता मनमानी,
हठी सूरज।

29.
भोर की लाली
गंगा को है रँगती,
सुन्दर चित्र।

30.
नरम धूप
मनुहार करती-
बैठो न साथ।

31.
भोर की रश्मि
ख़ूब प्यार से बोली-
चाय पिलाओ।

32.
सूर्य थकता
रोज़ भोरे उगता
करे न नागा।

33.
सूर्य भेजता
उठने का सन्देश 
रश्मि है दूत।

34.
भोर में सूर्य
गंगा-स्नान करता
पुण्य कमाता।

35.
हुआ बिहान
दलान पर सूर्य
तप करता।

36.
सूर्य न आया,
मेघ से डरकर
कहीं है छुपा।

37.
किसने बोला-
जागो, भोर हो गया,
चिड़िया होगी।

38.
धूप के बूटे
खिड़की से आ गिरे,
खिला बिछौना।

39.
भोरे-भोरे ही
चकल्लस को गया
आवारा सूर्य।

40.
भोर ने कहा-
सोने दो देर तक,
इतवार है।

-जेन्नी शबनम (30.6.2022)
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गुरुवार, 5 मई 2022

742. मन (मन पर 20 हाइकु)

मन  

(मन पर 20 हाइकु

***


1. 
जीवन-मृत्यु   
निरन्तर का खेल   
मन हो, न हो।   

2. 
डटके खड़ा   
गुलमोहर मन   
कोई मौसम।   

3. 
काटता मन   
समय है कुल्हाड़ी   
देता है दुःख।   

4. 
काश! रहता   
वन-सा हरा-भरा   
मन का बाग़।   

5. 
मन हाँकता   
धीमी-मध्यम-तेज़   
साँसों की गाड़ी।   

6. 
मन का रथ   
अविराम चलता   
कँटीला पथ।   

7. 
मन अभागा   
समय है गँवाया   
तब समझा।   

8. 
मन क्या करे?   
पछतावा बहुत   
जीवन ख़त्म।   

9. 
जटिल बड़ा   
साँसों का तानाबाना   
मन है हारा।   

10. 
मन का रोगी   
भेद न समझता   
रोता-रूलाता।   

11. 
हँसे या रोए   
नियति की नज़र   
मन न बचे।   

12. 
पास या फेल   
ज़िन्दगी इम्तिहान   
मन का खेल।   

13. 
मन की कथा   
समय पे बाँचती   
रिश्ते जाँचती।   

14. 
न खोलो मन,   
पराए पाते सुख   
सुन के दुःख।   

15. 
कठोर वाणी   
कृपाण-सी चुभती,   
मन घायल।   

16. 
लौ उम्मीद की   
मन जलता दीया   
जीवन-दीप्त।   

17. 
भौचक मन   
हतप्रभ देखता   
दृश्य के पार।   

18. 
मन का पंछी   
लालायित देखता   
उड़ता पंछी।   

19. 
मन में पीर   
चेहरे पे मुस्कान   
जीवन बीता।   

20. 
अकेला मन   
ख़ुद से बतियाता   
खोलता मन।   

-जेन्नी शबनम (5.5.2022)
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