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बुधवार, 5 दिसंबर 2018

595. अर्थ ढूँढ़ता (10 हाइकु) पुस्तक -99, 100

अर्थ ढूँढ़ता 

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1.   
मन सोचता-   
जीवन होता है क्या?   
अर्थ ढूँढता।   

2.   
बसंत आया   
रिश्तों में रंग भरा   
मिठास लाया।   

3.   
याद-चाशनी   
सुख की है मिठाई   
मन को भायी।   

4.   
फ़िक्र व चिन्ता   
बना गए दुश्मन,   
रोगी है काया।   

5.   
वक़्त की धूप   
शोला बन बरसी   
झुलसा मन।   

6.   
सुख व दुख   
यादों का झुरमुट   
अटका मन।   

7.   
ख़ामोश बही   
गुमनाम हवाएँ   
ज्यों मेरा मन।   

8.   
मैं सूर्यमुखी   
तुम्हें ही निहारती   
तुम सूरज।   

9.   
मेरी वेदना   
सर टिकाए पड़ी   
मौन की छाती।   

10.   
छटपटाती   
साँसों को तरसती   
बीमार हवा।   

- जेन्नी शबनम (23. 11. 2018)   
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मंगलवार, 10 जुलाई 2018

577. रंगरेज़ हमारा (चोका - 2)

रंगरेज़ हमारा   

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सुहानी संध्या   
डूबने को सूरज   
देखो नभ को 
नारंगी रंग फैला   
मानो सूरज   
एक बड़ा संतरा,   
साँझ की वेला   
दीया-बाती जलाओ   
गोधूली-वेला 
देवता को जगाओ   
ऋचा सुनाओ   
अपनी संस्कृति को   
न बिसराओ,   
शाम होते ही जब   
लौटते घर   
विचरते परिन्दे    
गलियाँ सूनी   
जगमग रोशनी   
वो देखो चन्दा   
हौले-हौले मुस्काए   
साँझ ढले तो   
सूरज सोने जाए   
तारे चमके   
टिम-टिम झलके   
काली स्याही से   
गगन रंग देता   
बड़ा सयाना   
रंगरेज़ हमारा   
सबका प्यारा   
अनोखी ये दुनिया   
किसने रची!  
हर्षित हुआ मन   
घर-आँगन   
देख सुन्दर रूप   
चकित निहारते।   

-जेन्नी शबनम (13.8.2012)
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