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शनिवार, 5 फ़रवरी 2022

738. वसन्त पञ्चमी (वसन्त पञ्चमी पर 10 हाइकु)

वसन्त पञ्चमी 

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1. 
पीली सरसों   
आया जो ऋतुराज   
ख़ूब है खिली।   

2. 
ज्ञान की चाह   
है वसन्त पञ्चमी   
अर्चन करो।   

3. 
पावस दिन   
ये वसन्त पञ्चमी   
शारदा आईं।   

4. 
बदली ऋतु,   
काश! मन में छाती   
वसन्त ऋतु।   

5. 
अब जो आओ   
ओ ऋतुओं के राजा!   
कहीं न जाओ।   

6. 
वाग्देवी ने दीं   
परा-अपरा विद्या,   
हुए शिक्षित।   

7. 
चुनरी रँगा   
वसन्त रंगरेज़   
धरा लजाई।   

8. 
पीला-ही-पीला   
वसन्त जादूगर   
फूल व मन।   

9. 
वसन्त ऋतु!   
अब नहीं लौटना   
हाथ थामना।   

10.
हे पीताम्बरा!   
सदा साथ निभाना   
चेतना तुम। 

-जेन्नी शबनम (5.2.2022)
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मंगलवार, 12 फ़रवरी 2019

605. बसन्त (क्षणिका)

बसन्त   

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मेरा जीवन मेरा बंधु   
फिर भी निभ नहीं पाता बंधुत्व   
किसकी चाकरी करता नित दिन   
छुट गया मेरा निजत्व   
आस उल्लास दोनों बिछुड़े   
हाय! जीवन का ये कैसा बसंत।  

- जेन्नी शबनम (12. 2. 2019)
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बुधवार, 1 मार्च 2017

537. हवा बसन्ती (बसन्त ऋतु पर 10 हाइकु) पुस्तक 83,84

हवा बसन्ती  

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1.  
हवा बसन्ती  
लेकर चली आई  
रंग-बहार।   

2.  
पीली ओढ़नी  
लगती है सोहणी  
धरा ने ओढ़ी।   

3.  
पीली सरसों  
मस्ती में झूम रही,  
आया बसन्त।   

4.  
कर शृंगार  
बसन्त ऋतु आई  
जग मोहित।   

5.  
कोयल कूकी-  
आओ सखी बसन्त   
साथ में नाचें।   

6.  
धूप सुहानी  
छटा है बिखेरती  
झूला झूलती।   

7.  
पात झरते,  
जीवन होता यही,  
सन्देश देते।   

8.  
विदा हो गया  
ठिठुरता मौसम,  
रुत सुहानी।   

9.  
रंग फैलाती  
कूदती-फाँदती ये,  
बसन्ती हवा।   

10.  
मधुर तान  
चहूँ ओर छेड़ती  
हवा बसन्ती।   

- जेन्नी शबनम (1. 3. 2017)
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