Friday, 11 November 2011

300. अल्फ़ाज़ उगा दूँ (क्षणिका)

अल्फ़ाज़ उगा दूँ

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सोचती हूँ
कुछ अल्फ़ाज़ उगा दूँ,
तितर-बितर कर
हर तरफ पसार दूँ,
चुक गए हैं
मेरे अंतस से सभी,
शायद किसी निर्मोही पल में
उनकी ज़रुरत पड़ जाए !

- जेन्नी शबनम (नवम्बर 11, 2011)

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18 comments:

Rakesh Kumar said...

जेन्नी जी, आपकी अल्फाजों की खेती पसंद आई.यदि सकारात्मक और सार्थक अल्फाज बोये जाएँ तो किसी निर्मोही पल में ही नही हर पल ही काम आने वाले हैं जी.

कबीरदास जी कहते हैं

टीला टीली ढाहि के, फोरी करै मैदान
समझ सफा करता चला,सोई शब्द निर्वान

जो ऊँच-नीच का भेद-भाव मिटाकर और सब
अहंकारों को फोड-तोड़ कर समता कर देते हैं
और बुद्धि को सैदेव शुद्ध करते चलते हैं,वे ही
मोक्षदायी निर्णय शब्द हैं.

आपकी सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार.

मनोज कुमार said...

शब्द विचारों के वाहक हैं। ये तो ज़रूर उगने चाहिए।

mridula pradhan said...

kitna kuch bhar diya is choti si kavita men.....bahut sunder.

सदा said...

वाह ...बहुत ही बढि़या ...भावमय करते शब्‍द ।

अनुपमा पाठक said...

उगना ही चाहिए उन्हें...
सुन्दर!

आशा बिष्ट said...

sundar shabd rachna..

रश्मि प्रभा... said...

kuch alfaaz ke bij .... shayad sannate mein kaam aa jaye

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है! सूचनार्थ!

Pallavi saxena said...

गहरे भावों वाली रचना बढ़िया प्रस्तुति समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

रजनीश तिवारी said...

shabd dhoondhtee sundar rachna ...

सहज साहित्य said...

अल्फ़ाज़ उगाने की बात पर एक बात और महत्त्वपूर्ण ढंग से आपने पेश की है और वह है-
शायद किसी निर्मोही पल में
उनकी ज़रुरत पड़ जाए !
शब्द को शायद इसीलिए ब्रह्म कहा गया है;क्यों हर आड़े वक़्त में अल्फ़ाज़ ही बचाव करते हैं।

मन के - मनके said...

अल्फ़ाज उगा दूं,चुक गये हैं,मेरे अंतस से सभी,उनकी ज़रूरत पड जाय—सुंदर.

SAJAN.AAWARA said...

bahut hi khub alfaj likhe hai mam aapne...
jai hind jai bharat

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

अल्फाजों का ऐसा उपवन
जो महकाता जाए जीवन

सुन्दर भाव...
सादर...

***Punam*** said...

कुछ अल्फाजों की कमी सी है !

उधार मिलें कुछ बीज तो...

मैं भी बो दूं

मन के सन्नाटे में !


khoobsoorat se zazbaat.....

***Punam*** said...

कुछ अल्फाजों की कमी सी है !

उधार मिलें कुछ बीज तो...

मैं भी बो दूं

मन के सन्नाटे में !


khoobsoorat se zazbaat....

ऋता शेखर 'मधु' said...

bhut achchhi tarah se vyakt kiya hai aapne jenny ji...alphaz uge rahenge to samay pr avshya kaam aayenge...seekh deti hai yh rachna...badhai evam aabaar

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

छोटी सी रचना में आपने सब कह दिया........
बहुत सुंदर पोस्ट ...
नए पोस्ट में स्वागत है....