मंगलवार, 25 मई 2021

722. इश्क़ पर 10 क्षणिकाएँ

श्क़ पर 10 क्षणिकाएँ 

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1. 
इश्क़ इक सपना   
टूटकर जुड़ता   
बेचैन करवटों में   
हर बार नया   
फिर से पलता   
मगर रह जाता   
सपना-सा   
सदा अधूरा। 
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2. 
इश्क़ एक तलवार   
गर म्यान से बाहर   
एक झटका   
धड़ बदन से ग़ायब   
इश्क़-तलवार   
मन-म्यान के अन्दर। 
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3. 
इश्क़ जैसे एक आँधी   
तूफ़ान की तरह   
आततायी   
सब मटियामेट   
ज़िन्दगी भी   
और दुनिया भी। 
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4. 
इश्क़ जैसे सूरज   
जीवन देता और ताप भी   
जिसके माप का पैमाना है मगर   
पकड़ से बाहर   
वो है तो जीवन है   
वो नहीं तो दुनिया नहीं। 
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5. 
इश्क़ की दुनिया गज़ब की   
मिलना-बिछड़ना   
पर साथ-साथ होना   
न  कोई वायदा   
न कोई इसरार   
मन में बसा है प्यार   
भले छूट जाए संसार। 
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6. 
जाने ज़िन्दगी किसके जैसी   
न तेरे जैसी न मेरे जैसी   
थोड़ी खट्टी थोड़ी मीठी   
खट्टी-मीठी इमली जैसी   
सोंधी-सोंधी-सी तेरी खुशबू   
फ़िज़ा में इश्क़ ज़िन्दगी ऐसी। 
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7. 
दस्तूर-ए-मोहब्बत   
मालूम नहीं   
इश्क़ ही बस एक इबादत   
इतना ही मालूम है। 
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8. 
अल्लाह! एक दुआ क़ुबूल करो   
क़यामत से पहले इतनी मोहलत दे देना   
दम टूटे उससे पहले   
इश्क़ का एक लम्हा दे देना। 
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9. 
इश्क़ के आयत की पर्ची   
यादों की ताबीज़ में बंदकर   
सिरहाने के दराज़ में छुपा दी   
अलामतें कोई न देखे,   
यादों की पूरनमासी   
यादों की अमावस   
यादों का चक्रव्यूह   
जीवन थक चला है,   
अब यादों की ताबीज़ टूट ही जाए   
ज़िन्दगी इश्क़ पर कुर्बान हो जाए। 
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10. 
ज़िन्दगी के माथे पर   
नसीब का टीका   
ज़िन्दगी की हथेली पर   
इश्क़ की लकीर   
फिर उम्र को परवाह क्या   
पल भर मिले या सदियाँ रहे 

- जेन्नी शबनम (25. 5. 2021) 
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