सोमवार, 27 अप्रैल 2020

659. निपटाया जाएगा

निपटाया जाएगा  

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विरोध के स्वर को कुछ यूँ दबाया जाएगा  
होश में जो हो उसे पागल बताया जाएगा !  

काट छाँट कर बाँट-बाँट कर यह संसार चलेगा  
रोटी और बेटी का मसला यूँ निपटाया जाएगा !  

क्रूरता और पाश्विकता कई खेमों में बँटे  
चौक चौराहों पर टँगा जिस्म दिखाया जाएगा !  

हदों की परवाह किसे बेहद से हम सब गुज़रे  
मुट्ठियों का इंक्लाब अब बेदम कराया जाएगा !  

नहीं परवाह सबको ज़माने के बदख्याली की  
नफ़रतों में अमन का पौधा खिलाया जाएगा !  

बाट जोहकर समय जब हथेलियों से फिसल जाएगा  
बद्दुआएँ 'शब' को देकर फिर ख़ूब पछताया जाएगा ! 

- जेन्नी शबनम (27. 4. 2020) 

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