बुधवार, 8 अगस्त 2012

363. सिर्फ़ मेरा (क्षणिका)

सिर्फ़ मेरा
(क्षणिका)

*******

ज़िन्दगी का अर्थ 
किस मिट्टी में ढूँढें?
कौन कहे कि आ जाओ मेरे पास 
रिश्ते नाते, अपने पराये 
सभी बेपरवाह
किनसे कहें  
एक बार याद करो मुझे 
सिर्फ़ मेरे लिए 
बहुत चाहता है मन 
कहीं कोई अपना 
जो सिर्फ़ मेरा!

- जेन्नी शबनम (अगस्त 8, 2012)
___________________________