बनूँ गुलमोहर
1.
लिपटके रंगों से
खिले फूल हसीन,
मन चाहता
ओढ़कर रंगीनी
बनूँ गुलमोहर।
2.
पसरा हुआ
उदासी का मंज़र
रेगिस्तानी है फ़िज़ा
मन सहमा
हर शय ग़ुलाम
कैसा वक़्त है आया।
मन चाहता
खोलकर गठरी
सपनों को उड़ाती।
4.
सुनता नहीं
बेपरवाह मन
करता मनमानी
जग से टूटा
पर नाता न छूटा
हे सूर्य देव!
ज़रा रहम करो
धरती को बचाओ
मेघ को भेजो
तपते जीव-जन्तु
करुणा दिखलाओ।
6.
बाण व बात
हैं तीव्र हथियार
छूटे तो लौटे नहीं
माने न हार
करें क्रूर प्रहार
तन-मन छलनी।