शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

796. पाँव तैयार नहीं

पाँव तैयार नहीं

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राह सामने है, चलने को पाँव तैयार नहीं
खड़े रहने, अड़े रहने को पाँव मददगार नहीं 
पाँव ज़ख़्मी हो गए, अब वे ठहरे रहेंगे
न ज़मीन न स्वर्ग की सीढ़ी पर ये बढ़ेंगे
अब कोई डर नहीं, कहीं जाना नहीं
कहीं पहुँचने की आतुरता नहीं
यह आराम का समय है
तनिक विश्राम का समय है
अपने ठहराव पर खिलखिलाना है
समय के साथ समय बिताना है।

-जेन्नी शबनम (1.1.2026)
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