Wednesday, 25 April 2012

343. कोई एक चमत्कार...

कोई एक चमत्कार...

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ज़िन्दगी, सपने और हकीकत 
हर वक्त   
गुत्थम-गुत्था होते हैं 
साबित करने के लिए 
अपना-अपना वर्चस्व
और हो जाते हैं लहुलूहान,
और इन सबके बीच 
हर बार ज़िन्दगी को हारते देखा है  
सपनों को टूटते देखा है
हकीकत को रोते देखा है, 
हकीकत का अट्टहास 
ज़िन्दगी को दुत्कारता है 
सपनों की हार को चिढ़ाता है 
और फिर खुद के ज़ख़्म से छटपटाता है !   
ज़िन्दगी है कि 
बेसाख्ता नहीं भागती 
धीरे-धीरे खुद को मिटाती है 
सपनों को रौंदती है 
हकीकत से इत्तेफ़ाक रखती है 
फिर भी उम्मीद रखती है   
कि शायद 
कहीं किसी रोज 
कोई एक चमत्कार 
और वो सारे सपने पूरे हों 
जो हकीकत बन जाए
फिर ज़िन्दगी पाँव पर नहीं चले 
आसमान में उड़ जाए !
न किसी पीर-पैगम्बर में ताकत
न किसी देवी-देवता में शक्ति
न परमेश्वर के पुत्र में कुवत 
जो इनके जंग में    
मध्यस्थता कर 
संधि करा सके
और कहे कि जाओ 
तीनों साथ मिल कर रहो
आपसी रंजिश से सिर्फ विफल होगे 
जाओ ज़िन्दगी और सपने मिलकर 
खुद अपनी हकीकत बनाओ !
इन सभी को देखता वक्त  
ठठाकर हँसता है...
बदलता नहीं क़ानून 
किसी के सपनों की ताबीर के लिए
कोई संशोधन नहीं
बस सज़ा मिल सकती है 
इनाम का कोई प्रावधान नहीं
कुछ नहीं कर सकते तुम 
या तो जंग करो या फिर
पलायन
सभी मेरे अधीन  
बस एक मैं सर्वोच्च हूँ !
सच है सभी का गुमान 
बस कोई तोड़ सकता है 
तो वो 
वक्त है !

जेन्नी शबनम (अप्रैल 25, 2012)

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19 comments:

रविकर said...

बहुत सुन्दर ।

बधाई ।।

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बस एक मैं सर्वोच्च हूँ
सच है सभी का गुमान
बस कोई तोड़ सकता है
तो वो वक्त है !

बहुत सुंदर प्रस्तुति,..प्रभावी रचना,..

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: गजल.....

दीपिका रानी said...

वक्‍त सबको अपनी पहचान बता देता है.. मगर सपने हकीकत भी तो बनते हैं और सपनों के साथ हकीकत का घोल ही तो ज़िंदगी है...

Dr. sandhya tiwari said...

bahut sundar prastuti -----jindgi jine aur sapne dekhne ka naam hai jo kabhi pure bhi hote hai.

रश्मि प्रभा... said...

सभी का गुमान
बस कोई तोड़ सकता है
तो वो
वक्त है !... तोड़के ही रहता है

***Punam*** said...

अजीब उलझन है....
है न.....!!!

yashoda Agrawal said...

कल 27/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .

धन्यवाद!

Saras said...

जीवन सच और सपनों की रस्साकशी को बहुत ही खुबसूरत अंदाज़ में प्रस्तुत किया है आपने..और अंतत: वक़्त की जीत ...कितना सही कितना सच !

Kavita Rawat said...

सभी मेरे अधीन
बस एक मैं सर्वोच्च हूँ !
सच है सभी का गुमान
बस कोई तोड़ सकता है
तो वो
वक्त है !
..सच वक्त सबकुछ कर लेता है ...इंसान भले ही बहुत देर से समझ पाता है ..
बहुत बढ़िया सार्थक रचना

sushila said...

वक्‍त के आगे कौन सी शय टिकी है? जीवन दर्शन के रंग लिए सुंदर अभिवयक्‍ति ! बधाई !

Rakesh Kumar said...

सच है सभी का गुमान बस कोई तोड़ सकता है तो वो वक़्त है.

वक़्त की हर शै गुलाम...

कालोSस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो
लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्त:

मैं लोको का नाश करनेवाला बढ़ा
हुआ महाकाल हूँ.इन लोकों को
नष्ट करने के लिए प्रवृत हुआ हूँ.

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार ,जेन्नी जी.

समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईएगा.

Maheshwari kaneri said...

सच कहा वक्त के सामने कोई नहीं ठहर सकता...

महेन्‍द्र वर्मा said...

जिंदगी और सपने मिलकर
खुद अपनी हकीकत बनाओ !
इन सभी को देखता वक्त
ठठाकर हँसता है

जिंदगी, सपने, हकीकत...सब वक्त के खिलौने हैं।
अच्छी कविता।

अरुन अनन्त said...

बहुत खूब
अरुन (arunsblog.in)

प्रेम सरोवर said...

सभी मेरे अधीन
बस एक मैं सर्वोच्च हूँ !
सच है सभी का गुमान
बस कोई तोड़ सकता है
तो वो
वक्त है !

बहुत सुंदर कविता । संक्षिप्त में यही कहूंगा- वक्त का हर शय गुलाम । मेरे पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहता है । धन्यवाद ।

Sneha Rahul Choudhary said...

AApki site se judkar bahut achcha mehsoos kar rahi hu Ma'am. Aapse bahut kuch seekhne ko milega mujhe.

Bahut sashakt rachna hai. Isiliye kaha gaya hai - Waqt bahut balwaan hota hai.

मेरा मन पंछी सा said...

बस एक मैं सर्वोच्च हूँ
सच है सभी का गुमान
बस कोई तोड़ सकता है
तो वो वक्त है !
बहुत ही बेहतरीन रचना...

सहज साहित्य said...

कोई एक चमत्कार कविता में जैसे एक पूरा तूफ़ान भर दिया है आपने ।पहली पंक्ति अन्तिम पंक्ति से मिलने के लिए उतावली नज़र आती है । ये पंक्तियाँ बहुत प्रभावशाली लगीं- किसी के सपनों की ताबीर के लिए
कोई संशोधन नहीं
बस सज़ा मिल सकती है
इनाम का कोई प्रावधान नहीं
कुछ नहीं कर सकते तुम
या तो जंग करो या फिर
पलायन
सभी मेरे अधीन
बस एक मैं सर्वोच्च हूँ !
सच है सभी का गुमान
बस कोई तोड़ सकता है
तो वो
वक्त है !

Madhuresh said...

वक़्त गुमान तोड़ता हो..परन्तु वक़्त ही उन परिश्रमियों को मौका भी देता है कि अपनी ज़िन्दगी के सपनों को मेहनत-लगन से पूरा कर सकें...
बहरहाल, एक और सुन्दर रचना.. अच्छी लगी
सादर
मधुरेश