रविवार, 21 मार्च 2010

128. सपना मँगाती है / sapna mangaati hai

सपना मँगाती है

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कुछ यादें सिमटी मुस्काती हैं
कुछ बातें अनकही शर्माती हैं !

ओ मीत पूछना कली से तुम
क्यों खुशबू पर यूँ इतराती है !

बावरे भौरे से भी पूछना तुम
खिलती कली क्यों लुभाती है !

ओ साथी पास आ जाओ मेरे
ज़ालिम हवा बड़ी मदमाती है !

झिझक नहीं सुन मेरे हमदम
आज याद तुम्हारी तड़पाती है !

'शब' का सपना आसमान में
आसमान से सपना मँगाती है !

- जेन्नी शबनम (मार्च 21, 2010)

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aasmaan se sapna mangaati hai

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kuchh yaaden simti muskaati hain
kuchh baaten ankahi sharmaati hain.

o meet puchhna kalee se tum
kyon khushboo par yun itaraati hai.

baaware bhounre se bhi puchhna tum
khilti kalee kyon lubhaati hai.

o saathi paas aa jaao mere
zaalim hawa badi madmaati hai.

jhijhak nahin sun mere humdum
aaj yaad tumhaari tadpaati hai.

''shab'' ka sapna aasmaan men
aasmaan se sapna mangaati hai.

- Jenny Shabnam (March 21, 2010)

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8 टिप्‍पणियां:

सु-मन (Suman Kapoor) ने कहा…

कुछ यादें सिमटी मुस्काती है
कुछ बातें अनकही शर्माती है !

सुन्दर पक्तियां

रश्मि प्रभा... ने कहा…

आसमान दे जा एक सपना
अपने जैसा विस्तृत, सलोना ........

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

bhagwan aapke saare sapne sach karen...........!! bahut khubsurat abhivyakti!!!!!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

ओ मीत पूछना कली से तुम...क्यों खुशबू पर यूँ इतराती है....

'शब'' का सपना आसमान में...आसमान से सपना मंगाती है...

शायरी का ये भी एक खूबसूरत रंग है, जिसमें आप काफ़ी हद तक कामयाब हैं.
मुबारकबाद

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

सुमन'मीत' ने कहा…
कुछ यादें सिमटी मुस्काती है
कुछ बातें अनकही शर्माती है !

सुन्दर पक्तियां
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suman ji,
meri rachna ki sarahna keliye bahut shukriya.

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

रश्मि प्रभा... ने कहा…
आसमान दे जा एक सपना
अपने जैसा विस्तृत, सलोना ........
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ahaa... kitna achha ho jo mil jaye aasmaan sa vistrit koi salona sapna...bahut shukriya rashmi ji aapka.

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…
bhagwan aapke saare sapne sach karen...........!! bahut khubsurat abhivyakti!!!!!
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mukesh ji,
kash aapki dua kubool ho. rachna ki sarahna keliye bahut shukriya aapka.

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…
ओ मीत पूछना कली से तुम...क्यों खुशबू पर यूँ इतराती है....

'शब'' का सपना आसमान में...आसमान से सपना मंगाती है...

शायरी का ये भी एक खूबसूरत रंग है, जिसमें आप काफ़ी हद तक कामयाब हैं.
मुबारकबाद
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shahid sahab,
mukammal shayari to mumkin nahin, asafal prayas zarur karti hun, aap sabhi ki dua milti rahe bas yahi kamna hai. hausla-aafzaai ka bahut shukriya.