शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

316. मदिरा का नशा...

मदिरा का नशा...

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तुमने तो जाना है
मदिरा नशा है
नशा जो जीवन छीन लेता है
मदिरा जो मतवाला बना देती है,
मदिरा का नशा
तुम क्या जानो दोस्त
घूँट-घूँट पीकर
जब मचलती है ज़िन्दगी
यूँ मानो
हमने जीवन को पिया है
पल-पल को जिया है,
सिगरेट के छल्लो में
जब उड़ती है ज़िन्दगी
मेरे दोस्त
क्या तुमने देखी है उसमें
ज़िन्दगी की तस्वीर,
कश-कश पीकर
जब चहकती है ज़िन्दगी
यूँ मानो हमने जीत ली तकदीर
बदल डाली हाथों की लकीर,
पर मदिरा का नशा
जब उतरता है
धुआँ-धुआँ साँसें
उखड़ी-उखड़ी चाल
कमबख्त बस बदन टूटता है
मगज़ कब कहाँ कुछ भूलता है,
मदिरा के नशे ने
पल-पल होश दिलाया है
जालिम ज़िन्दगी ने
जब-जब तड़पाया है
कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !

- जेन्नी शबनम (जनवरी 15, 2012)

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27 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

तुम क्या जानो दोस्त
घूँट-घूँट पीकर
जब मचलती है ज़िंदगी
यूँ मानो
हमने जीवन को पिया है... बहुत ही बढ़िया

यशवन्त माथुर ने कहा…

कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !

बेहतरीन पंक्तियाँ।


सादर

Unknown ने कहा…

आज की कविता बात अलग हट के कह रही है. सटीक बात कह रही है सरल शब्दों में

Nirantar ने कहा…

nashaa to nashaa hotaa
sar par chadh jaaye to
dukhdaayee ho jaataa
nice one

Rakesh Kumar ने कहा…

ओह! मदिरा का नशा
जब चढा तो बहुत हसीं लगा
उतरा तो जमीं में जा गडा.

अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार,जेन्नी जी.

संजय भास्‍कर ने कहा…

यूँ मानो
हमने जीत ली तकदीर
बदल डाली हाथों की लकीर,
.....क्या बात है ....!
बहुत बढ़िया लाइने हैं यह !

vidya ने कहा…

:-)
यानि पी जाये या ना पी जाये???

just joking...nice poem.
regards.

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति । मेरे नए पोस्ट " हो जाते हैं क्यूं आद्र नयन पर ": पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद। .

mridula pradhan ने कहा…

wah.......bahot achchi......

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति,बेहतरीन पोस्ट..
new post...वाह रे मंहगाई...

Jeevan Pushp ने कहा…

बहुत बढ़िया रचना !
आभार !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Jeevan ke mashe mein, pyaar ke nashe meion jo rahta hai vo madire ke nashe ko nahi jeena chaahta ...

प्रेम सरोवर ने कहा…

कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !
कविता अच्छी लगी । भाव भी मन को छू गए । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा .धन्यवाद ।

sushila ने कहा…

नशा। एक छलावा मात्र ! दुनिया और दुखों से भागने का उपक्रम मात्र। और इस भागने में वह स्वयं को कितना कमज़ोर बना देता है!

"कश-कश पीकर
जब चहकती है ज़िन्दगी"
वाह!

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

Shabanam ji madira aur jindgi ke utar -chadhawon ko jodati hui yah rachana vakai bahut prabhavshali lgi ......ak sundar prastuti ke liye bahut bahut abhar.

प्रेम सरोवर ने कहा…

मदिरा के नशा ने
पल पल होश दिलाया है
जालिम ज़िन्दगी ने
जब जब तड़पाया है
कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !

बहुत सुंदर है आपकी कविता । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।.

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

ये दोनों ,व्यक्ति के साथ साथ उसके परिवार को भी
नहीं बख्शते.सुंदर संदेश...

Unknown ने कहा…

ज़िंदगी का नशा..प्यार का नशा...मदिरा से ज्यादा सर चढ के बोलता है....सच!!

Rakesh Kumar ने कहा…

जेन्नी जी,मेरी टिपण्णी दिखलाई नही पड़ रही है.
आपका मेरे ब्लॉग पर इंतजार रहता है जी.

Atul Shrivastava ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट्स पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

मदिरा का नशा
जब उतरता है
धुंआ धुंआ सांसें
उखड़ी उखड़ी चाल
कमबख्त बस बदन टूटता है
मगज कब कहाँ कुछ भूलता है,
मदिरा के नशा ने
पल पल होश दिलाया है
जालिम ज़िन्दगी ने
जब जब तड़पाया है

नशा चाहे कोई भी हो मतवाला बना देता है
जीवन को ढोने के लिए नशीला बना देता है

अच्छी प्रस्तुति ....

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

वाह ....सधे शब्दों में सार्थक कविता

जिंदगी को सन्देश देती ....अगर कोई माने तो

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

NASHA ACHCHHA LAGA DI:)

रेखा ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति ...

Maheshwari kaneri ने कहा…

कौन जाने वक़्त का मिजाज़
कौन करे किससे सवाल
कुछ पल की सारी कहानी है
फिर वही दुनियादारी है !....बढिया, .बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

kavita verma ने कहा…

sundar abhivyakti...

dinesh aggarwal ने कहा…

बेहतरीन रचना, सुन्दर संदेश....
कृपया इसे भी पढ़े-
क्या यही गणतंत्र है