Wednesday, 6 March 2013

388. चाँद का रथ (7 हाइकु)

चाँद का रथ (7 हाइकु)

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1.
थी विशेषता  
जाने क्या-क्या मुझमें,
हूँ अब व्यर्थ !

2.
सीले-सीले-से
गर हों अजनबी, 
होते हैं रिश्ते !

3.
मन का द्वन्द 
भाँपना है कठिन
किसी और का !

4.
हुई बावली 
सपनों में गुजरा 
चाँद का रथ !

5. 
जन्म के रिश्ते 
सदा नहीं टिकते 
जग की रीत ! 

6.
अनगढ़-से
कई-कई किस्से हैं 
साँसों के संग !

7.
हाइकु ऐसे   
चंद लफ़्ज़ों में पूर्ण 
ज़िन्दगी जैसे !

- जेन्नी शबनम (फरवरी 18, 2013)

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17 comments:

कालीपद "प्रसाद" said...

सुन्दर हाइकु

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत उम्दा,,,

Recent post: रंग,

virendra sharma said...


हकीकत और फलसफा ए ज़िन्दगी लिए हैं कई हाइकु


3.
मन का द्वन्द
भाँपना है कठिन
किसी और का !......द्वंद्व

Bhagirath Kankani said...

Bahut sundar abhivektti. Mere blog santam sukhaya par aapakaa swagat hai. Apni beak tippani likhe Dhanywaad

Unknown said...

जीवन का अर्थ समझाते हायकू . बधाई

रविकर said...

सुन्दर प्रस्तुति-
आभार-

kavita verma said...

har hayakoo apne arth ko sarthak karta hua...behatreen..

Dinesh pareek said...

वहा बहुत खूब बेहतरीन

आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
तुम मुझ पर ऐतबार करो ।

Neeraj Neer said...

वाह! बहुत सार्थक गागर में सागर जैसे..
नीरज 'नीर'
KAVYA SUDHA (काव्य सुधा)

आशा बिष्ट said...

Gahre shbd....

Unknown said...

बहुत ही सुन्दर अद्भुत निःशब्द करती अभिव्यक्ति करती

Unknown said...

निःशब्द करते हाइकू . जीवन को शब्द देते

महेन्‍द्र वर्मा said...

जन्म के रिश्ते
सदा नहीं टिकते
जग की रीत !

जवाब नहीं.... !

नाम क्षणिका हैं लेकिन प्रभाव दीर्घकालिक है।

PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी said...

लाजवाब रचना...बहुत बहुत बधाई...

PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी said...

लाजवाब रचना...बहुत बहुत बधाई...

सारिका मुकेश said...

हाइकु ऐसे
चंद लफ़्ज़ों में पूर्ण
ज़िंदगी जैसे !.....सच कहा आपने, दो पल के जीवन से एक उम्र चुरानी है....
बहुत सुन्दर हाइकु....बधाई एवं शुभकामनाएँ!!

खोरेन्द्र said...

जन्म के रिश्ते
सदा नहीं टिकते
जग की रीत ! sabhi hayku achchhe lage