प्यार
सोमवार, 7 सितंबर 2026
810. प्यार (10 हाइकु)
गुरुवार, 11 जून 2026
805. वृद्ध का दुःख (10 हाइकु)
वृद्ध का दुःख
1.
वृद्ध की आस
कोई तो हो पास
बाँटें वे दुःख।
2.
वृद्ध का दुःख
मन में समाहित
सोचके हित।
3.
वृद्ध का कोना
रिश्तों की राह ताके
रहता सूना।
4.
वृद्ध जीवन
अनुभवों का कोष
लो निःसंकोच।
5.
कोई न सुने
विलाप और रोना,
वृद्ध अकेला।
6.
वृद्ध बेचारा
कोई न सहारा
आँखें सजल।
7.
जवानी पूनो
वृद्ध जीवन अमा
मन बेचैन।
8.
बहते लोर
पोंछे न कोई और
वृद्ध अकेला।
9.
वृद्ध जीवन
अनुभव की आँखें
रखते मूँदे।
10.
जीवनभर
कर्मयोगी था वृद्ध,
अब बेकार।
-जेन्नी शबनम (26.9.2024)
मंगलवार, 26 मई 2026
802. प्रचण्ड गर्मी (10 हाइकु)
1.
प्रचण्ड गर्मी
धरा उबल रही
सूर्य अलाव।
2.
तपती धरा
हाहाकार है मचा
सूर्य अंगारा।
3.
लू के थपेड़े
सूर्य आग उगले
सब झुलसे।
4.
रहम करो
प्रकृति पुकारती
सूर्य बहरा।
5.
पड़ा महँगा
प्रकृति से खेलना
क्रूर सूरज।
6.
खेत झुलसा
जीवन का बन्धन
साथ ही टूटा।
7.
प्यासे बेहाल
जीव-जंतु तड़पें
पानी है खोजें।
8.
पी गया सूर्य
धरा हुई निर्जल
मृत तलैया।
9.
साँसें ले आईं
खिला गुलमोहर
गरम हवा।
10.
शैतान सूर्य
आग है बरसाता
गर्मी का राजा।
__________________
रविवार, 8 मार्च 2026
799. स्त्रियाँ (10 हाइकु)
स्त्रियाँ
1.
स्त्रियों के हिस्से
परख-आकलन
यही चलन।
2.
स्त्रियाँ हैं फूल
दामन में हैं काँटें
दुःख क्या बाँटे।
3.
स्त्रियाँ-अंगार
आजीवन चलती
नहीं जलती।
4.
स्त्री के बिना
सूना है घर-बार
माने संसार।
5.
स्वयं सींचती
आजीवन पालती
जीव के पौधे।
6.
थाती में मिली
बेबसी व घुटन
स्त्री है बेचारी।
7.
स्त्रियाँ हैं काली
ज़रूरत पड़े तो
करे विध्वंस।
8.
फ़र्ज़ निभाती
मिला कंधे से कन्धा
पुरुष की स्त्री।
9.
आँचल गीला
हँसके पिए पीड़ा
स्त्री का जीवन।
10.
भूखी होती स्त्री
प्यार व सम्मान की
नहीं धन की।
बुधवार, 4 मार्च 2026
798. होली-त्योहार
1.
रंगों के संग
फागुन की बयार
होली तैयार।
2.
फूलों की क्यारी
प्रकृति पिचकारी
रंग खेलती।
3.
सूखे गुलाल
लज़ीज़ पकवान
होली त्योहार।
4.
भाँग पीकर
मदमस्त नाचते
रंग-अबीर।
5.
निकली टोली
भूल गिले-शिकवे
सभी हैं रँगे।
6.
रंग क्या चढ़े
आर्टिफ़िशियल है
रंग व रिश्ते।
7.
अपने घर
खींचकर ले आया
होली का रंग।
8.
रंगीली होली
तन ही रँग सकी
मन उदास।
9.
नहीं सुहाता
अब कोई भी रंग
मन बेरंग।
10.
होली हकीम
मिटाए दुःख-दर्द
सुख असीम।
11.
आया अबीर
घोलके पी ली पीर
मन रंगीन।
12.
सबको रँगे
भेदभाव भूलके
बौराई होली।
गुरुवार, 20 मार्च 2025
791. गौरैया (9 हाइकु)
गुरुवार, 13 मार्च 2025
790. होली (होली पर 20 हाइकु)
होली
(होली पर 20 हाइकु)
1.
भाँग पीकर
पुआ-पूड़ी खाकर
होली अघाई।
2.
लगाकर गुलाल
ख़ूब लजाई।
3.
धर्म व जाति
भेद नहीं करती
भोली है होली।
4.
होलिका जली
जलकर दिखाई
कर्म का पथ।
5.
दे बलिदान
होलिका ने सिखाया
सत्य का ज्ञान।
6.
देकर प्राण
होलिका ने बचाया
धर्म का मान।
7.
पगली हवा
रंग उड़ाके बोली-
गाओ फगुआ।
8.
उड़ाओ रंग
फगुआ को भाता है
गुलाबी रंग।
9.
रँगी बावरी
साँवरे के रंग में
खेलती होली।
उड़ा गुलाल
पिया की प्यारी
हुई है लाल।
11.
भेद व द्वेष
मन से है मिटाती
होली सन्मार्गी।
12.
आकर खेलो
अतीत को भूलके
रंगीली होली।
13.
अब तो भूलो
ग़लतफ़हमियाँ
होली खेलो न!
14.
फगुआ के फाग से
मन है बँधा।
15.
रंग लेकर
चली हवा बसन्ती
धरा रंगती।
16.
सब भौजाई
अपनी या पराई
होली है भाई।
17.
हँसी-ठिठोली
मोहल्ले की भौजाई
18.
लगाओ रंग
करो ख़ूब धमाल
होली है यार।
सोमवार, 10 फ़रवरी 2025
788. प्रवासी पूत (20 हाइकु)
मन हुआ बेकल
2.
रोज़ी-रोटी की खोज
प्रवासी बेटा।
विदेश की धरती
4.
दुःखी माँ-बाप।
5.
छूटा है देश
ज़िम्मेदारी का दंश
अकेला बच्चा।
6.
अकेला बच्चा
माँ-बाप निस्सहाय
प्रवासी पूत।
7.
अकेला बेटा
विदेश की धरती,
दुःख है भारी।
8.
चढ़ गया सूली पे,
बेरोज़गारी।
9.
बेटा है देशी
रोज़गार की खोज
बना विदेशी।
10.
काँटों से घिरा
प्रवासी बना बच्चा,
फूल भेजता।
11.
देश की याद
हर रोज़ सताती
क्या करे बेटा?
12.
विदेशी पूत
अपना न सहारा
दुःख है साथी।
विदेश का सपना,
बुधवार, 1 जनवरी 2025
786. नव वर्ष (20 हाइकु)
1.
मन में आस-
नव वर्ष की भोर
हो पुनर्जन्म।
लेकर आशा
नव वर्ष है आया
शुभ सन्देश।
3.
उँगली थामे
नव वर्ष की भोर
घूमने चली।
4.
चहकती है
नव वर्ष की भोर
ख़ूब है शोर।
5.
ठिठुरन है
पर मन में जोश
पहली तिथि
नव वर्ष की भोर
ठण्ड से काँपी।
जश्न की रात
स्वागत में संसार
नवीन वर्ष।
8.
धुँध में आई
नव वर्ष की भोर
मन विभोर।
दुःख को भूलें
नव वर्ष का दिन
स्वागत करें।
नवीन वर्ष
उमंग पसारने
फिर से आया।
पिछला वर्ष
बना है इतिहास
याद आएगा।
12.
नूतन वर्ष
धक्का देके भगाया
पुराना वर्ष।
साल पुराना
बन गया अतीत,
नया आएगा।
14.
स्मृति छोड़के
चुपचाप गुज़रा
साल पुराना।
नव वर्ष को थामे
वक़्त पर आई।
16.
सन्देशा लाया-
वक़्त के साथ चलो,
नवीन वर्ष।
छुड़ाके लौटा
नए साल का हाथ
पिछला साल।
18.
याद दिलाता
वक़्त का बदलाव
नूतन वर्ष।
19.
बिछड़ गया
सुख-दुःख का साथी
पिछला साल।
20.
नूतन वर्ष,
वक़्त दोहराएगा
काल का क्रम।
सोमवार, 25 मार्च 2024
773. रंगों की झोली (20 हाइकु)
विजयी भव
होली का आशीर्वाद
हर माँ देती।
2.
माँ-बाबा पास
रॉकेट से भेजती
रंगों की झोली!
3.
जम के खेलो
प्राकृतिक गुलाल
न हो बीमार।
4.
गेंदा-पलाश
बनके होली रंग
रहे हुलस।
5.
फगुआ गीत
मौसम में गूँजता
मन झूमता।
6.
होली का रंग
मन पे चढ़ा गाढ़ा
अपनों संग।
7.
होली त्योहार
परिवार जो साथ
फैला उल्लास।
8.
अम्मा ग़रीब
पिचकारी है रूठी
बच्चे उदास।
9.
रंग-गुलाल
नैहर न पीहर
किसको भेजूँ!
10.
फगुआ रंग
जाने मन की पीर
न हो अधीर।
11.
होली है आई
न रंग, न मिठाई
नहीं कमाई।
12.
फगुआ गाती
हवा हुई रंगीन
रंग उड़ाती।
13.
होली रंगीन
सबको रंगकर
ठट्ठा करती।
14.
होली के यार
रंग व पकवान
मिलके बाँटो।
15.
होली की मस्ती
भूलो अपनी हस्ती
रँग दो बस्ती।
16.
बसन्ती हवा
झूमती मतवाली
रंग लगाती।
17.
पलाश रंग
गहरा निखरता
प्यार का रंग।
18.
मन से खेली
फगुआ वाली होली
पिया की हो ली।
19.
रंग बरसे
मनवा है तरसे
पी परदेस।
20.
पराया घर
रंगीन हुआ तन
भीगा है मन।
बुधवार, 20 दिसंबर 2023
769. मन गुल्लक (5 हाइकु)
1.
मन गुल्लक
ख़ुशियों का ख़ज़ाना
ख़त्म न होता।
2.
मन है बना
ख़ुशियों का गुल्लक
कोई न लूटे।
3.
भर के रखो
ख़ुशियों का गुल्लक
भले ही टूटे।
4.
भरा गुल्लक
ख़ुशियों का रुपया
मेरा ख़ज़ाना।
5.
मेरा गुल्लक
ख़ुशियों से है भरा
कभी न टूटा।
रविवार, 12 नवंबर 2023
766. दीवाली ख़ुश (20 हाइकु)
1.
पूनो-सी खिली
चहके दीया-बाती
हर अँगना।
2.
अमा जा छुपी
दीयों से डरकर,
ख़ुश दीवाली।
3.
बम-पटाखे
प्रदूषण से हारे
डिब्बों में बन्द।
4.
जल न सके
प्रदूषण पसरा
पटाखे दुःखी।
5.
जन बेचारा
प्रदूषण का मारा
पटाखे गुम।
6.
पूनो चाहती-
काश! दिखे दीवाली!
अमा से हारी।
7.
नभ में तारे
दीवाली हैं मनाते
ज़मीं पे दीए।
8.
अमा की रात
घर-घर पूर्णिमा
दीवाली रात।
9.
ऊँचे महल
जगमग दीवाली,
झोपड़ी दुःखी।
10.
अमा भगाके
दीवाली देती सीख-
विजयी भव!
11.
रात काली है
मन में दीवाली है
घबराना क्यों?
12.
अमा छँटेगी
मत सोच अधिक
होगी दीवाली।
13.
चाँद-सितारे
प्रदूषण ने खाए,
दीप जलाएँ।
14.
हारना मत
दीवाली का सन्देश
दीप-से जलो!
15.
अँधेरा छुपा,
घर-घर दीवाली
लगती न्यारी।
16.
माटी का दीया
जगमग बिजली,
दुःखी बेचारा।
17.
मुस्कुरा रही
दीपों की फुलवारी
सुन्दर-प्यारी।
18.
सुन दीवाली!
जल्दी मत लौटना
साथ रहना।
19.
दीवाली बोली-
माटी के दीप जला!
माटी है ख़ुश।
20.
ख़ूब चहकी
बिजली की लड़ियाँ,
दीपक दुःखी।
सोमवार, 5 जून 2023
759. पर्यावरण (10 हाइकु)
पर्यावरण
1.
भटक रहे
जंगल-मरुस्थल
जीव व जन्तु।
2.
जंगल मिटा
बना है मरुस्थल
आँखें हैं नम।
3.
कब उजड़े
काँप रहे जंगल
रौद्र मानव।
4.
बिछा पत्थर
खोई पगडण्डी
पाँव में चुभे।
5.
दूषित जल
नदी है तड़पती
प्यास की मारी।
6.
कौन सुनेगा
उजड़ने की व्यथा
प्रकृति रोती।
7.
ताल-तलैया
आसमान को ताके
सूखते जाते।
8.
नाग-सा डँसे
व्यभिचारी मानव
प्रकृति रोए।
9.
शहर बना
पत्थरों का जंगल
मन वीरान।
10.
पर्यावरण
अब कैसे मुस्काए?
बड़ी लाचारी।
-जेन्नी शबनम (5.6.2023)
(पर्यावरण दिवस)
_____________________
गुरुवार, 9 मार्च 2023
758. होली (9 हाइकु)
होली (9 हाइकु)
***
1.
वासन्ती पर्व
बन्धनों से हों मुक्त
देती है सीख।
2.
मन झूमता
रंग की है बौछार
मिलते यार।
3.
हँसी-मज़ाक
ये रंगीन-फुहार
उम्र भुलाए।
4.
फाग-तरंग
हँसे मन मलंग
खेलो रे रंग।
5.
झूमके नाची
अलसाई-सी देह
होली के संग।
6.
नशीला रंग
मन को दिया रँग
आओ खेले रंग।
7.
होली रंगीन
भिगोया जब तन
मन भी रँगा।
8.
फ़िज़ा रंगीन
फागुन की फुहार
मन क्यों सूना?
9.
रंग वही है
होली की खुमारी है,
मन न रँगा।
- जेन्नी शबनम (8. 3. 23)
_________________
शनिवार, 24 सितंबर 2022
750. मृत्यु सत्य है (मृत्यु पर 50 हाइकु)
बुधवार, 14 सितंबर 2022
749. हमारी मातृभाषा (6 हाइकु)
हमारी मातृभाषा (6 हाइकु)
सोमवार, 4 जुलाई 2022
744. भोर (40 हाइकु)
भोर
गुरुवार, 5 मई 2022
742. मन (मन पर 20 हाइकु)
मन
(मन पर 20 हाइकु)
***