Tuesday, 25 December 2018

597. बातें (क्षणिका)

बातें 

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रात के अँधेरे में   
मैं ढेरों बातें करती हूँ 
जानती हूँ मेरे साथ 
तुम कहीं नहीं थे   
तुम कभी नहीं थे 
पर सोचती रहती हूँ 
तुम सुन रहे हो 
और खुद से बातें करती हूँ।   

- जेन्नी शबनम (25. 12. 2018)   

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3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (26-12-2018) को "यीशु, अटल जी एंड मालवीय जी" (चर्चा अंक-3197) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Alaknanda Singh said...

बहुत सु्दंंर क्षणिकाऐं हैं शबनम जी

संजय भास्‍कर said...

खूबसूरत लेखन .... बेहतरीन प्रवाह