Saturday, 1 June 2019

614. नज़रबंद

नज़रबंद   

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ज़िन्दगी मुझसे भागती रही   
मैं दौड़ती रही, पीछा करती रही   
एक दिन आख़िर वो पकड़ में आई   
खुद ही जैसे मेरे घर में आई   
भागने का सबब पूछा मैंने   
झूठ बोल बहला दिया मुझे,   
मैं अपनी खामी ढूँढती रही   
आख़िर ऐसी क्या कमी थी   
जो जिन्दगी मुझसे कह गई   
मेरी सोच मेरी उम्र या फिर जीने का शऊर   
हाँ! भले मैं बेशऊरी   
पर वक्त से जो सीखा वैसे ही तो जिया मैंने   
फिर अब ?   
आजीज आ गई ज़िन्दगी   
एक दिन मुझे प्रेम से दुलारा, मेरे मन भर मुझे पुचकारा   
हाथों में हाथ लिए मेरे, चल पड़ी झील किनारे   
चाँद तारों की बात, फूल और खूश्बू थी साथ   
भूला दिया मैंने उसका छल   
आँखें मूँद काँधे पे उसके रख दिया सिर   
मैं जिन्दगी के साथ थी   
नहीं-नहीं मैं अपने साथ थी   
फिर हौले से उसने मुझे झिंझोड़ा   
मैंने आँख मूँदे मुस्कुरा कर पूछा -   
बोलो ज़िन्दगी, अब तो सच बताओ   
क्यों भागती रहीं तुम तमाम उम्र   
मैं तुम्हारा पीछा करती रही ताउम्र   
जब भी तुम पकड में आई   
तुमने स्वप्नबाग दिखा मुझसे पीछा छुड़ाया,   
फिर ज़िन्दगी ने मेरी आँखों में देखा   
कहा कि मैं झील की सुन्दरता देखूँ   
अपना रूप उसमें निहारूँ,   
मैं पागल फिर से छली गई   
आँखें खोल झील में खुद को निहारा   
मेरी ज़िन्दगी ने मुझे धकेल दिया   
सदा के लिए उस गहरी झील में   
बहुत प्रेम से बड़े धोखे से,   
अब मैं झील में नज़रबंद हूँ   
ज़िन्दगी की बेवफाई से रंज हूँ   
अब न ज़िन्दगी का कारोबार होगा   
न ज़िन्दगी से मुलाकात होगी   
अब कौन सुनेगा मुझको कभी   
न किसी से बात होगी !   

- जेन्नी शबनम (1. 6. 2019)   

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6 comments:

Onkar said...

बहुत सुन्दर

Onkar said...

सुन्दर रचना

Anonymous said...


जी नमस्ते,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (03-06-2019) को

" नौतपा का प्रहार " (चर्चा अंक- 3355)
पर भी होगी।

--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

आप भी सादर आमंत्रित है


अनीता सैनी

अनीता सैनी said...


जी नमस्ते,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (03-06-2019) को

" नौतपा का प्रहार " (चर्चा अंक- 3355)
पर भी होगी।

--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

आप भी सादर आमंत्रित है


अनीता सैनी

Anuradha chauhan said...

बहुत सुंदर रचना

मन की वीणा said...

बहुत ही शानदार प्रस्तुति ।
अनुपम