Thursday, 24 October 2019

635. दंगा

दंगा...   

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किसी ने कहा ये हिन्दु मरा   
कोई कहे ये मुसलमान था   
अपने-अपने दड़बे में कैद   
बँटा सारा हिन्दुस्तान था !   

थरथराते जिस्मों के टुकड़े 
मगर जिह्वा पे रहीम-ओ-राम था   
कोई लाल लहू कोई हरा लहू   
रंगा सारा हिन्दुस्तान था !   

घूँघट और बुर्क़ा उघड़ा   
कटा जिस्म कहाँ बेजान था   
नौनिहालों के शव पर   
रोया सारा हिन्दुस्तान था !   

दसों दिशाओं में चीख़ पुकार   
ख़ौफ़ से काँपा आसमान था   
दहशत और अमानवीयता से   
डरा सारा हिन्दुस्तान था !   

मंदिर बने कि मस्ज़िद गिरे   
अवाम नहीं सत्ता का ये खेल था   
मंदिर-मस्जिद के झगड़े में   
मरा सारा हिन्दुस्तान था !   

- जेन्नी शबनम (24. 10. 2019)   
(भागलपुर दंगा के 30 साल होने पर)
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2 comments:

कालीपद "प्रसाद" said...

बहुत सुन्दर ,ये एहसास मंदिर मस्जिद के झगडे में पड़े किसी व्यक्ति को नहीं |

Anonymous said...

बात तो है कि झगड़ा क्यों?