Thursday, 7 November 2019

638. महज़ नाम

महज़ नाम 

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कभी लगता था कि किसी के आँचल में   
हर वेदना मिट जाती है   
मगर भाव बदल जाते हैं   
जब संवेदना मिट जाती है   
न किसी प्यार का ना अधिकार का नाम है   
माँ संबंध नहीं   
महज पुकार का एक नाम है   
तासीर खो चुका है   
बेकार का नाम है   
माँ संबंध नहीं   
महज पुकार का एक नाम है!   

- जेन्नी शबनम (7. 11. 2019)   

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5 comments:

Sagar said...

मैंने अभी आपका ब्लॉग पढ़ा है, यह बहुत ही शानदार है।
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अनीता सैनी said...

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (०९ -११ -२०१९ ) को "आज सुखद संयोग" (चर्चा अंक-३५१४) पर भी होगी।

चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
-अनीता सैनी

Anita Laguri "Anu" said...

हां कुछ ऐसा ही हो रहा है अब बहुत कुछ कहती हुई आपकी शानदार रचना

Onkar said...

सुन्दर प्रस्तुति

viralsguru said...

Very good write-up. I certainly love this website. Thanks!
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