Sunday, 21 April 2013

400. रात (11 हाइकु)

रात (11 हाइकु)

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1.
चाँद न आया 
रात की बेकरारी
बहुत भारी !

2.
रात शर्माई 
चाँद का आलिंगन 
पूरनमासी ! 

3.
रोज़ जागती 
तन्हा रात अकेली 
दुनिया सोती !

4.
चन्दा के संग
रोज़ रात जागती 
सब हैं सोए ! 

5.
जाने किधर  
भटकती रही नींद 
रात गहरी !

6. 
चाँद जो सोया 
करवट ले कर 
रात है रूठी !

7.
चाँद को जब  
रात निगल गई 
चाँदनी रोई !

8.
हिस्से की नींद 
सदियों बाद मिली 
रात है सोई !

9.
रात जागती 
सोई दुनिया सारी 
मन है भारी !

10.
अँधेरी रात 
है चाँद सितारो  की 
बैठक आज ! 

11.
काला-सा टीका 
रात के माथे पर 
कृष्ण पक्ष में !

- जेन्नी शबनम (2. 4. 2013)

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7 comments:

निहार रंजन said...

बहुत सुन्दर.

Anonymous said...

एक से बढ़कर एक - लाजवाब

चाँद को जब
रात निगल गई
चाँदनी रोई

ANULATA RAJ NAIR said...

वाह....
रात का सुन्दर चित्रण ...वो भी मात्राओं और शब्दों के नियमों के भीतर..
लाजवाब.

सादर
अनु

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बेहतरीन हाइकु ....

सदा said...

काला-सा टीका
रात के माथे पर
कृष्ण पक्ष में !
वाह ... बहुत खूब

Madan Mohan Saxena said...

बहुत सुन्दर रचना!

Maheshwari kaneri said...

बहुत बढिया..