Saturday, 16 November 2013

424. जन्म-नक्षत्र...

जन्म-नक्षत्र...

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सारे नक्षत्र
अपनी-अपनी जगह
आसमान में देदीप्तमान थे
कहीं संकट के कोई चिह्न नहीं
ग्रहों की दशा विपरीत नहीं
दिन का दूसरा पहर
सूरज मद्धिम-मद्धिम दमक रहा था
कार्तिक का महीना
अभी-अभी बीता था
मघा नक्षत्र पूरे शबाब पर था
सारे संकेत शुभ घड़ी बता रहे थे
फिर यह क्योंकर हुआ ?
यह आघात क्यों ?
जन्म-नक्षत्र ने
खोल दिए सारे द्वार    
ज़मीं ही स्वर्ग बन गई तुम्हारे लिए  
और मैं
छटपटाती रही
नरक भोगती रही 
तुम्हारे स्वर्ग में 
शुभ घड़ी शुभ संकेत 
सब तुम्हारे लिए 
नक्षत्र की शुभ दृष्टि 
तुम पर 
और मुझ पर टेढ़ी नज़र 
ऐसा क्यों ?

- जेन्नी शबनम (नवम्बर 16, 2013)

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16 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (17-11-2013) को "लख बधाईयाँ" (चर्चा मंचःअंक-1432) पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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गुरू नानक जयन्ती, कार्तिक पूर्णिमा (गंगास्नान) की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

कालीपद "प्रसाद" said...

सटीक प्रश्न पर हमेशा अनुत्तरित !
नई पोस्ट मन्दिर या विकास ?
नई पोस्ट लोकतंत्र -स्तम्भ

tbsingh said...

sunder abhivyakti

सीमा स्‍मृति said...

गहन प्रश्‍नचिन्‍ह है। सोचने को मजबूर करता,ऐसा क्‍यों होता है।

Neeraj Neer said...

बहुत उत्कृष्ट अभिव्यक्ति.

Dr. sandhya tiwari said...

rachna bahut hi acchi lagi.....

दिगंबर नासवा said...

बहुत खूब ... नक्षत्रों के बिम्ब को बाखूबी उभारा है ... भावपूर्ण रचना ...

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

क्या बात
बहुत सुंदर

रविकर said...

सुन्दर प्रस्तुति-
आभार -

Pallavi saxena said...

गहन भाव अभिव्यक्ति...

travel ufo said...

badhiya

Naveen Mani Tripathi said...

behad prabhavshali rachana lagi ghari chhuan ke sath shaktishali va prabhavshali dono hi .....abhar.

Kailash Sharma said...

बहुत मर्मस्पर्शी भावपूर्ण रचना...

Unknown said...

umda rachna

इस पोस्ट की चर्चा, दिनांक :- 22/11/2013 को "http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/" चर्चा अंक - 48 पर.
आप भी पधारें, सादर ....

tanahi.vivek said...

Very beautiful lines to express...

मुकेश कुमार सिन्हा said...

सुंदर रचना...