लाले-लाल
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लग रही है बेलगाम बोली
राजपथ असहाय है
आज़ादी पूर्व का एहसास हो रहा
राजपथ बेचैन है
चंद सरमायेदारों की क्रूरता से घिरा
राजपथ ज़ख़्मी है।
राजपथ स्वतंत्र हुआ था अनगिनत बलिदानों से
आज उसे फिर शुद्ध लहू की दरकार है
नाम बदला पर कर्त्तव्य पथ न बन सका
राजपथ पर पसरा बड़ा व्यापार है
राजपथ पर हिंसकों का क़ब्ज़ा
बेग़ैरत हर सरकार है
हर आज़ादी वापस मिले
लग रही है बेलगाम बोली
राजपथ असहाय है
आज़ादी पूर्व का एहसास हो रहा
राजपथ बेचैन है
चंद सरमायेदारों की क्रूरता से घिरा
राजपथ ज़ख़्मी है।
राजपथ स्वतंत्र हुआ था अनगिनत बलिदानों से
आज उसे फिर शुद्ध लहू की दरकार है
नाम बदला पर कर्त्तव्य पथ न बन सका
राजपथ पर पसरा बड़ा व्यापार है
राजपथ पर हिंसकों का क़ब्ज़ा
बेग़ैरत हर सरकार है
हर आज़ादी वापस मिले
बेबस जनता की करुण पुकार है
किसानों-श्रमिकों-मज़लूमों एक हो
अब इन्क़िलाब की दरकार है।
राजपथ को आज़ादी चाहिए
हमें 1947 वाली आज़ादी चाहिए
ग़रीबी-बेरोज़गारी से आज़ादी चाहिए
अब इन्क़िलाब की दरकार है।
राजपथ को आज़ादी चाहिए
हमें 1947 वाली आज़ादी चाहिए
ग़रीबी-बेरोज़गारी से आज़ादी चाहिए
जाति-धर्म से आज़ादी चाहिए
साम्प्रदायिकता से आज़ादी चाहिए
सम्पूर्ण देश का विकास चाहिए
सम्पूर्ण देश का विकास चाहिए
ज्ञान का प्रकाश चाहिए।
आओ नौजवानों बिखेर दो लहू
हर तरफ़ अब लाले-लाल चाहिए
झंडा लाल, लहू लाल, लाले-लाल
राजपथ पर हर निशान लाल चाहिए
हर हाथ में क्रांति की मशाल
हर हाथ में क्रांति की मशाल
खेत हरा और पगड़ी लाल चाहिए
धरा-आसमान सब लाले-लाल
हर तरफ़ अब लाले-लाल चाहिए।
हर तरफ़ अब लाले-लाल चाहिए।
-जेन्नी शबनम (1.5.2026)
(श्रमिक दिवस)
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