Friday, 22 February 2013

384. यादें जो है ज़िन्दगी (5 सेदोका)

यादें जो है ज़िन्दगी (5 सेदोका)

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1.
वर्षा की बूँदें 
टप-टप बरसे 
मन का कोना भींगे, 
सींचती रही 
यादें खिलती रही  
यादें जो है ज़िन्दगी !

2.
जी ली जाती है 
कुछ लम्हें समेट
पूरी यह ज़िन्दगी,
पूर्ण भले हो  
मगर टीसती है 
लम्हे-सी ये ज़िन्दगी !

3.
महज नहीं
हाथ की लकीरों में 
ज़िन्दगी के रहस्य,
बतलाती हैं 
माथे की सिलवटें 
ज़िन्दगी के रहस्य !

4.
सीली ज़िन्दगी 
वक्त के थपेड़ों से 
जमती चली गई 
कैसे पिघले ?
हल्की-सी तपिश भी 
ज़िन्दगी लौटाएगी !

5.
शैतान हवा 
पलट दिया पन्ना 
खुल गई किताब 
थी अधपढ़ी
जमाने से थी छुपी 
ज़िन्दगी की कहानी !

- जेन्नी शबनम (सितम्बर 24, 2012)

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12 comments:

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत बढ़िया सदोका...
सभी सुन्दर.
अनु

Saras said...

बहुत सुन्दर जेनी जी ...हर तांका एक से बढ़कर एक

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

शैतान हवा पलट दिया पन्ना खुल गई किताब थी अधपढ़ी जमाने से थी छुपी ज़िन्दगी की कहानी,,,,,भावपूर्ण सुंदर पंक्तियाँ

Recent post: गरीबी रेखा की खोज

राजेश सिंह said...

हल्की-सी तपिश भी
ज़िन्दगी लौटाएगी !

वाह क्या बात है

मेरा मन पंछी सा said...

सभी बहुत ही बेहतरीन और भावपूर्ण ...

Dr. sandhya tiwari said...

यादें ही तो जिंदगी है ...........बहुत सुन्दर रचना

Unknown said...

सीली ज़िन्दगी
वक्त के थपेड़ों से
जमती चली गई
कैसे पिघले ?
हल्की-सी तपिश भी
ज़िन्दगी लौटाएगी !

डॉ जेन्नी शबनम साहिबा आपकी इस लम्हों के सफ़र का कोई जवाब नहीं 1 से 5 तक लाजवाब ...

प्रतिभा सक्सेना said...



आग पानी हवा धरती और शून्य
इन्हीं की मिलीजुली रचना है
सभी तत्वों की उठा-पटक,
कैसे शान्त रहेगी ज़िन्दगी?

kumar zahid said...

यादें खिलती रही,....
जी ली जाती है कुछ लम्हें समेट पूरी यह ज़िन्दगी,...
महज नहीं हाथ की लकीरों में ज़िन्दगी,...
हल्की-सी तपिश भी ज़िन्दगी लौटाएगी !...
खुल गई किताब थी अधपढ़ी....


लफ्ज़ दर लफ्ज़
जिन्दगी के नये कसीदे ...बेहतर फलसफे

Neeraj Neer said...

बहुत सुन्दर क्षणिकाएं.
नीरज'नीर'
www.kavineeraj.blogspot.com

Neeraj Neer said...

बहुत सुन्दर क्षणिकाएं.
नीरज'नीर'
www.kavineeraj.blogspot.com

India Darpan said...

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

जयपुर न्यूज
पर भी पधारेँ।