यादें जो है ज़िन्दगी
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1.
वर्षा की बूँदें
टप-टप बरसे
मन का कोना भींगे,
सींचती रही
यादें खिलती रही
यादें जो है ज़िन्दगी।
2.
जी ली जाती है
कुछ लम्हें समेट
पूरी यह ज़िन्दगी,
पूर्ण भले हो
मगर टीसती है
लम्हे-सी ये ज़िन्दगी।
3.
महज़ नहीं
हाथ की लकीरों में
ज़िन्दगी के रहस्य,
बतलाती हैं
माथे की सिलवटें
ज़िन्दगी के रहस्य।
4.
सीली ज़िन्दगी
वक़्त के थपेड़ों से
जमती चली गई
कैसे पिघले?
हल्की-सी तपिश भी
ज़िन्दगी लौटाएगी।
5.
शैतान हवा
पलट दिया पन्ना
खुल गई किताब
थी अधपढ़ी
ज़माने से थी छुपी
ज़िन्दगी की कहानी।
6.
जीवन लघु
पानी का बुलबुलादो पल का न पता
क्षणभंगुर,
कर्म न्यायसंगत
यादें होंगी अमर।
7.
पानी-सा मन
बह जाता उधर
होता ढाल जिधर,
यादों का पानी
वक़्त की थाप पर
थिरकता मगर।
8.
बड़ी कोमल
बहुत ही हसीन
छुई-मुई ज़िन्दगी
इसे न छेड़ो
गर रूठ जो गयी
बस यादें बचेंगी।
-जेन्नी शबनम (24.9.2012)
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12 टिप्पणियां:
बहुत बढ़िया सदोका...
सभी सुन्दर.
अनु
बहुत सुन्दर जेनी जी ...हर तांका एक से बढ़कर एक
शैतान हवा पलट दिया पन्ना खुल गई किताब थी अधपढ़ी जमाने से थी छुपी ज़िन्दगी की कहानी,,,,,भावपूर्ण सुंदर पंक्तियाँ
Recent post: गरीबी रेखा की खोज
हल्की-सी तपिश भी
ज़िन्दगी लौटाएगी !
वाह क्या बात है
सभी बहुत ही बेहतरीन और भावपूर्ण ...
यादें ही तो जिंदगी है ...........बहुत सुन्दर रचना
सीली ज़िन्दगी
वक्त के थपेड़ों से
जमती चली गई
कैसे पिघले ?
हल्की-सी तपिश भी
ज़िन्दगी लौटाएगी !
डॉ जेन्नी शबनम साहिबा आपकी इस लम्हों के सफ़र का कोई जवाब नहीं 1 से 5 तक लाजवाब ...
आग पानी हवा धरती और शून्य
इन्हीं की मिलीजुली रचना है
सभी तत्वों की उठा-पटक,
कैसे शान्त रहेगी ज़िन्दगी?
यादें खिलती रही,....
जी ली जाती है कुछ लम्हें समेट पूरी यह ज़िन्दगी,...
महज नहीं हाथ की लकीरों में ज़िन्दगी,...
हल्की-सी तपिश भी ज़िन्दगी लौटाएगी !...
खुल गई किताब थी अधपढ़ी....
लफ्ज़ दर लफ्ज़
जिन्दगी के नये कसीदे ...बेहतर फलसफे
बहुत सुन्दर क्षणिकाएं.
नीरज'नीर'
www.kavineeraj.blogspot.com
बहुत सुन्दर क्षणिकाएं.
नीरज'नीर'
www.kavineeraj.blogspot.com
बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई
जयपुर न्यूज पर भी पधारेँ।
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