Saturday, 14 February 2015

485. लम्हों का सफ़र...

लम्हों का सफ़र...  

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आसमान की विशालता  
जब अधीरता से खींचती है  
धरती की गूढ़ शिथिलता  
जब कठोरता से रोकती है  
सागर का हठीला मन
जब पर्वत से टकराता है  
तब एक आँधी
मानो अट्टहास करते हुए गुज़रती है  
कलेजे में नश्तर चुभता है   
नस-नस में लहू उत्पात मचाता है  
वक़्त का हर लम्हा   
काँपता थरथराता   
खुद को अपने बदन में नज़रबंद कर लेता है !  

मन हैरान है  
मन परेशान है   
जीवन का अनवरत सफ़र
लम्हों का सफ़र
जाने कहाँ रुके
कब रुके  
जीवन के झंझावत
अब मेरा बलिदान माँगते हैं
मन न आह कहता है
न वाह कहता
कहीं कुछ है  
जो मन में घुटता है
पल-पल मन में टूटता है
मन को क्रूरता से चीरता है !  

ठहरने की बेताबी
कहने की बेक़रारी
अपनाए न जाने की लाचारी
एक-एक कर
रास्ता बदलते हैं
हाथ की लकीर और माथे की लकीर
अपनी नाकामी पर
गलबहिया डाले  
सिसकते हैं !  

आकाश और धरती
अब भावविहीन हैं
सागर और पर्वत चेतनाशून्य हैं
हम सब हारे हुए मुसाफ़िर
न एक दूसरे को ढाढ़स देते हैं
न किसी की राह के काँटे बीनते हैं
सब के पाँव के छाले
आपस में मूक संवाद करते हैं !  

अपने-अपने  
लम्हों के सफ़र पर निकले हम
वक्त को हाज़िर नाज़िर मानकर
अपने हर लम्हे को यहाँ दफ़न करते हैं   
चलो अब अपना सफ़र शुरू करते हैं !

- जेन्नी शबनम (14. 2. 2015)

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8 comments:

PRAN SHARMA said...

Lamhon Ke Safar Mein Main Kho Saa
Gayaa Hun . Umda Rachna .

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (16-02-2015) को "बम भोले के गूँजे नाद" (चर्चा अंक-1891) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Neeraj Neer said...

लम्हों का सफर सदियों का सफर होता है .... बहुत सुंदर रचना

शारदा अरोरा said...

हाथ की लकीर और माथे की लकीर
अपनी नाकामी पर
गलबहिया डाले
सिसकते हैं !
हम सब हारे हुए मुसाफ़िर
न एक दूसरे को ढाढ़स देते हैं
न किसी की राह के काँटे बीनते हैं ...
सब के पाँव के छाले
आपस में मूक संवाद करते हैं !
vaah bahut khub....aapna kaha aur hamne samjha ..

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

Suresh kumar said...

Bahut hi khubsurat rachna....

दिगंबर नासवा said...

गहरे भाव लिए रचना है ...

PBCHATURVEDI प्रसन्नवदन चतुर्वेदी said...

वाह...लाजवाब प्रस्तुति...
और@जा रहा है जिधर बेखबर आदमी