गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

800. युद्ध जारी है

युद्ध जारी है 


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युद्ध जारी है
विश्व संकट में है
मिसाइल्स की आतिशबाज़ी गूँज रही है
ध्वस्त हो रही हैं विशाल इमारतें
नष्ट हो रहे हैं देश की सुरक्षा के संसाधन
विधवा हो रही हैं सैनिक की पत्नियाँ
मर रहे हैं नागरिक
अनाथ हो रहे हैं बच्चे।

युद्ध जारी है
अपने अपने दृष्टिकोण से
हर लोग निर्णायक बने हुए हैं
कौन सही, कौन गलत
किसका पक्ष लें, किसे दुत्कारें
किसका साथ दें, किसके ख़िलाफ़ बोलें।

युद्ध जारी है
हर तरफ़ दहशत, ख़ून-ख़राबे
चिथड़े-चिथड़े जिस्म की पहचान नहीं
किसी का अपना शहीद हुआ
न जाने कितनी जानें क़ुर्बान हुईं
इस ख़ौफ़नाक मंज़र पर
कोई जश्न मना रहा
तो कोई छाती पीट रहा।

युद्ध ख़त्म होगा
बेवाओं और अनाथ बच्चों की फ़ौज  
तमाम उम्र मन में युद्ध को जिएँगे
भले असहाय हों, पर नफ़रत करेंगे
युद्धरत देश नए नेता लाएँगे
युद्ध के नए तकनीक लाएँगे
ताकि अगला युद्ध और पुरज़ोर हो सके।

हर युद्ध दुनिया के ख़त्म होने का ज़रिया है
कौन हारा, कौन जीता
किसकी कितनी क्षति हुई
इस पर विवेचना होगी
अपने-अपने पक्ष के देश के साथ
दुनिया खेमों में बँटेगी
अगले युद्ध के इंतज़ार में।

-जेन्नी शबनम (2.4.2026)
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रविवार, 8 मार्च 2026

799. स्त्रियाँ (10 हाइकु)

स्त्रियाँ

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1.
स्त्रियों के हिस्से
परख-आकलन
यही चलन।

2.
स्त्रियाँ हैं फूल
दामन में हैं काँटें
दुःख क्या बाँटे।

3.
स्त्रियाँ-अंगार
आजीवन चलती
नहीं जलती।

4.
स्त्री के बिना
सूना है घर-बार
माने संसार।

5.
स्वयं सींचती
आजीवन पालती
जीव के पौधे।

6.
थाती में मिली
बेबसी व घुटन
स्त्री है बेचारी।

7.
स्त्रियाँ हैं काली
ज़रूरत पड़े तो
करे विध्वंस।

8.
फ़र्ज़ निभाती
मिला कंधे से कन्धा
पुरुष की स्त्री।

9.
आँचल गीला
हँसके पिए पीड़ा
स्त्री का जीवन।

10.
भूखी होती स्त्री
प्यार व सम्मान की
नहीं धन की।

-जेन्नी शबनम (8.3.2026)
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 
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बुधवार, 4 मार्च 2026

798. होली-त्योहार

होली-त्योहार

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1.
रंगों के संग
फागुन की बयार
होली तैयार।

2.
फूलों की क्यारी
प्रकृति पिचकारी
रंग खेलती।

3.
सूखे गुलाल
लज़ीज़ पकवान
होली त्योहार।

4.
भाँग पीकर
मदमस्त नाचते
रंग-अबीर।

5.
निकली टोली
भूल गिले-शिकवे
सभी हैं रँगे।

6.
रंग क्या चढ़े
आर्टिफ़िशियल है
रंग व रिश्ते।

7.
अपने घर
खींचकर ले आया
होली का रंग।

8.
रंगीली होली
तन ही रँग सकी
मन उदास।

9.
नहीं सुहाता
अब कोई भी रंग
मन बेरंग।

10.
होली हकीम
मिटाए दुःख-दर्द
सुख असीम।

11.
आया अबीर
घोलके पी ली पीर
मन रंगीन।

12.
सबको रँगे
भेदभाव भूलके
बौराई होली।

-जेन्नी शबनम (4.3.2026)
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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

797. सफ़र का क़िस्सा

सफ़र का क़िस्सा 

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मेरे सफ़र की हर शय ग़ुलाम है    
मन के कफ़स में हर लम्हा क़ैद है 
तन की ज़रूरत कब बढ़ी-घटी
मन से मन की बात कब कही
यक़ीन की धरती कब-कब हिली
आसमाँ से दुःख की बदली कब बरसी
यादों के पिंजरे में हर अनकहा पड़ा है
मेरा मन ही है जो सब जानता है
उम्मीद की हवा झुलस गई
मोहब्बत की शाख टूट गईं 
पिघलते रहे मन के जज़्बात
छुप न सकी कोई भी बात
सन्नाटे में बैठी रही आँखें मूँद
लरजती रही आँसुओं की बूँद
कौन समझे ग़ैरों के एहसास
अब रहा नहीं कोई आस-पास
मेरे जीवन के सफ़र का क़िस्सा
ज़माने का बना अब रोचक हिस्सा।

-जेन्नी शबनम (26.2.2026)
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शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

796. पाँव तैयार नहीं

पाँव तैयार नहीं

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राह सामने है, चलने को पाँव तैयार नहीं
खड़े रहने, अड़े रहने को पाँव मददगार नहीं 
पाँव ज़ख़्मी हो गए, अब वे ठहरे रहेंगे
न ज़मीन न स्वर्ग की सीढ़ी पर ये बढ़ेंगे
अब कोई डर नहीं, कहीं जाना नहीं
कहीं पहुँचने की आतुरता नहीं
यह आराम का समय है
तनिक विश्राम का समय है
अपने ठहराव पर खिलखिलाना है
समय के साथ समय बिताना है।

-जेन्नी शबनम (1.1.2026)
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