स्त्रियाँ
***
1.
स्त्रियों के हिस्से
परख-आकलन
यही चलन।
2.
स्त्रियाँ हैं फूल
दामन में हैं काँटें
दुःख क्या बाँटे।
3.
स्त्रियाँ-अंगार
आजीवन चलती
नहीं जलती।
4.
स्त्री के बिना
सूना है घर-बार
माने संसार।
5.
स्वयं सींचती
आजीवन पालती
जीव के पौधे।
6.
थाती में मिली
बेबसी व घुटन
स्त्री है बेचारी।
7.
स्त्रियाँ हैं काली
ज़रूरत पड़े तो
करे विध्वंस।
8.
फ़र्ज़ निभाती
मिला कंधे से कन्धा
पुरुष की स्त्री।
9.
आँचल गीला
हँसके पिए पीड़ा
स्त्री का जीवन।
10.
भूखी होती स्त्री
प्यार व सम्मान की
नहीं धन की।
1.
स्त्रियों के हिस्से
परख-आकलन
यही चलन।
2.
स्त्रियाँ हैं फूल
दामन में हैं काँटें
दुःख क्या बाँटे।
3.
स्त्रियाँ-अंगार
आजीवन चलती
नहीं जलती।
4.
स्त्री के बिना
सूना है घर-बार
माने संसार।
5.
स्वयं सींचती
आजीवन पालती
जीव के पौधे।
6.
थाती में मिली
बेबसी व घुटन
स्त्री है बेचारी।
7.
स्त्रियाँ हैं काली
ज़रूरत पड़े तो
करे विध्वंस।
8.
फ़र्ज़ निभाती
मिला कंधे से कन्धा
पुरुष की स्त्री।
9.
आँचल गीला
हँसके पिए पीड़ा
स्त्री का जीवन।
10.
भूखी होती स्त्री
प्यार व सम्मान की
नहीं धन की।
-जेन्नी शबनम (8.3.2026)
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
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2 टिप्पणियां:
बहुत खूब
सच कहु तो आपकी ये छोटी-छोटी कविताएँ सीधे दिल पर असर करती हैं। आपने स्त्री के अलग-अलग रूप इतने सटीक तरीके से दिखाए कि हर पंक्ति सोचने पर मजबूर करती है। “फूल” और “अंगार” वाला contrast मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि वही असली ताकत दिखाता है।
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