8-11) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
8-11) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 14 जून 2021

726. स्मृति (11 हाइकु)

स्मृति 
(11 हाइकु)

***

1. 
स्मृति में तुम   
जैसे फैला आकाश   
सुवासित मैं।   

2. 
क्षणिक प्रेम   
देता बड़ा आघात   
रोता है मन।   

3. 
अधूरी चाह   
भटकता है मन   
नहीं उपाय।   

4. 
कई सवाल   
सभी अनुत्तरित,   
किससे पूछें?   

5. 
मेरे सवाल   
उलझाते हैं मुझे,   
कैसे सुलझे?   

6. 
ज्यों तुम आए   
जी उठी मैं फिर से   
अब न जाओ।   

7. 
रूठ ही गई   
फुदकती गौरैया   
बगिया सूनी।   

8. 
मेरा वजूद   
नहीं होगा सम्पूर्ण   
तुम्हारे बिना।   

9. 
जाएगी कहाँ   
चहकती चिड़िया   
उजड़ा बाग़।   

10. 
पेड़ की छाँव   
पथिक का विश्राम   
अब हुई कथा।   

11. 
जिजीविषा है   
फिर क्यों हारना?   
यही जीवन।   

-जेन्नी शबनम (24.3.2011)
____________________ 

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

223. प्रवासी मन (प्रथम हाइकु लेखन, 11 हाइकु)

प्रवासी मन
(प्रथम हाइकु लेखन, 11 हाइकु)

***

1.
लौटता कहाँ
मेरा प्रवासी मन
कोई न घर।

2.
कुछ ख्व़ाहिशें
फलीभूत न होतीं 
सदियाँ बीती।

3.
मन तड़पा
भरमाए है जिया
मैं निरुपाय।

4.
पाँव है ज़ख़्मी
राह में फैले काँटे
मैं जाऊँ कहाँ?

5.
प्रेम-बगिया
ये उजड़नी ही थी
सींच न पाई।

6.
दम्भ जो टूटा
फिर उल्लास कैसा
विक्षिप्त मन।

7.
मन चहका
घर आए सजन
बावरा मन।

8.
महा-प्रलय
ढह गया अस्तित्व
लीला जीवन।

9.
विनाश होता
चहुँ ओर आतंक
प्रकृति रोती।

10.
कठिन बड़ा
पर होता है जीना
पूर्ण जीवन।

11.
अजब भ्रम
कैसे समझे कोई
कौन अपना।

-जेन्नी शबनम (24.3.2011)
____________________