बच्चे
माँ-बाबा को पुकारे
वो नौनिहाल,
बोली सुन-सुनके
माँ-बाबा हैं निहाल।
3.
तूफ़ान साथ जाए
जाते जब वे स्कूल।
4.
बच्चे की किलकारी
माँ जाती वारी
नित सुबह-शाम
बिना लिए विराम।
5.
होता बड़ा उधम,
ढेरों हैं बच्चे
संयुक्त परिवार
रौशन घर-बार।
6.
व्यस्त रहती सदा
काम का टीला
7.
बच्चों की चिन्ता,
प्रकृति की रचना
-0-
बेटियाँ
1.
खेले आँख-मिचौली,
माँ-बाबा हँसे
देखे थे जो सपने
हुए वे सब पूरे।
2.
अम्मा छोड़ जो चली
हो गई बड़ी,
अब बिटिया नन्हीं
सबकी अम्मा बनी।
3.
माँ-बाबा की दुलारी
होती है बेटी,
जाए पिया के घर
कर सूना आँगन।
4.
होती सब बिटिया,
माँ-बाबा रोए
विदा हुई बिटिया
जाए पी के अँगना।
5.
देती सब बेटियाँ
दरो-दीवार,
जाएँ कहीं, सृजन
करती हैं बेटियाँ।
6.
रहती घबराई
बेटी जो जन्मी,
किस घर वो जाए
हर सुख वो पाए।
7.
करती हैं बेटियाँ
जहाँ भी जाए,
मायका होता सूना
-0-
ईश्वर
1.
नाथ सिर्फ़ तुम्हारी
तू बिसराया
सुध न ली हमारी
क्यों समझा पराया?
2.
तू क्यों न समझता
जग की पीर,
आस जब से टूटा
सब हुए अधीर।
3.
जो मेरी पतवार
देखे संसार,
भव सागर पार
पहुँचूँ तेरे पास।
4.
कुछ करो निदान
हो जाऊँ पार
जीवन है सागर
कोई न खेवनहार।
5.
डगर अँधियारा
अब मैं हारी,
तू है पालनहारा
फैला दे उजियारा।
6.
साथ देना ईश्वर
दुर्गम पथ
चल-चलके हारी
7.
तू जग का निर्माता
पालनहारा,
सुन ले, हे ईश्वर!
तेरे भक्तों की व्यथा।
-0-
कृष्ण
1.
तू ही है परमात्मा
कर विचार,
तेरी जोगन हारी
मेरे कृष्ण मुरारी।
2.
हर स्त्री की कहानी
बनी द्रौपदी,
कृष्ण! लो अवतार
करो स्त्री का उद्धार।
3.
करते सीनाजोरी
कृष्ण कन्हाई,
डाँटे यशोदा मैया
फिर करे बड़ाई।
4.
बस यही है धर्म
तेरा सन्देश,
फ़ैल रहा अधर्म
आके दो उपदेश।
5.
की मुझसे ढिठाई,
ओ मोरे कान्हा!
गोपियों संग रास
मुझे माना पराई।
6.
सबको भरमाया
नन्हा मोहन,
देके गीता का ज्ञान
किया जग-कल्याण।
7.
तुझमें ही समाई,
बड़ी बावरी
सहके सब पीर
बनी मीरा दीवानी।