Wednesday, August 21, 2013

417. मन के नाते (राखी के हाइकु) (12 हाइकु)

मन के नाते (राखी के हाइकु) (12 हाइकु)

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1.
हाथ पसारे 
बँधवाने राखी 
चाँद तरसे !

2.
सूनी कलाई 
बहना नहीं आई
भैया उदास !

3.
बाँधो मुझे भी
चन्दा मामा कहता 
सुन्दर राखी !

4.
लाखों बहना
बाँध न पाए राखी 
भैया विदेश !

5.
याद रखना -
बहन का आशीष
राखी कहती !

6.
राखी की लाज
रखना मेरे भैया 
ढाल बनना !

7.
ये धागे कच्चे
जोड़ते रिश्ते पक्के
होते ये सच्चे !  

8.
किसको बाँधे
हैं सारे नाते झूठे  
राखी भी सोचे !

9.
नेह लुटाती 
आजीवन बहना 
होती पराई !

10.
करता याद
बस आज ही भैया 
राखी जो आई !

11.
नहीं है आता 
मनाने अब भैया  
अब जो रूठी !

12.
है अनमोल 
उऋण होऊँ कैसे 
मन के नाते !

- जेन्नी शबनम (21. 8. 2013)

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Saturday, August 17, 2013

416. माथे पे बिंदी (11 हाइकु)

माथे पे बिंदी (11 हाइकु)

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1.
माथे की बिंदी 
आसमान में चाँद 
सलोना रूप !

2.
लाल बिंदिया 
ज्यों उगता सूरज
चेहरा खिला !

3.
ऋषि कहते 
कपाल पर बिंदी 
सौभाग्य चिह्न !

4.
झिलमिलाती 
माथे पर बिंदी 
भोर की लाली !

5.
मुख चमके 
दप-दप दमके 
लाल बिंदी से !

6.
सिन्दूरी बिंदी 
सूरज-सा चमके
गोरी चहके !

7.
माथे पे बिंदी 
सुहाग की निशानी 
हमारी रीत !

8.
अखण्ड भाग्य 
सौभाग्य का प्रतीक 
छोटी सी बिंदी !

9.
माथे पे सोहे 
आसमां पे चन्दा ज्यों 
मुस्काती बिंदी !

10.
त्रिनेत्र जहाँ 
शिव के माथे पर 
वहीं पे बिंदी !

11.
महत्वपूर्ण 
ज्यों है भाषा में बिंदी
त्यों स्त्री की बिंदी !

- जेन्नी शबनम (अक्टूबर 10, 2012)

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Wednesday, August 7, 2013

415. मत सोच अधिक (15 हाइकु)

मत सोच अधिक (15 हाइकु)

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1.
जो बीत गया 
मत सोच अधिक,
बढ़ता चल !

2.
जीवन-पथ 
डराता है बहुत, 
हारना मत !

3.
सब आएँगे 
जब हम न होंगे, 
अभी न कोई ! 

4.
अपने छूटे
सब सपने टूटे, 
जीवन बचा !

5.
बहलाती हैं
ये स्मृतियाँ सुख की 
जीवन- भ्रम !

6.
शोक क्यों भला ?
गैरों के विछोह का 
ठहरा कौन ?

7.
कतराती हैं 
सीधी सरल राहें, 
वक़्त बदला !

8.
ताली बजाती 
बरखा मुस्कुराती 
खूब बरसी ! 

9.
सब बिकता  
पर किस्मत नहीं, 
लाचार पैसा !

10
सब अकेले 
चाँद-सूरज जैसे
फिर शोक क्यों ?

11.
ज़िन्दगी साया 
कौन पकड़ पाया,
मगर भाया ! 

12.
ज़िन्दगी माया 
बड़ा ही भरमाया 
हाथ न आया !

13.
सपने जीना 
सपनों को जिलाना,
हुनर बड़ा !

14.
कैसी पहेली 
ज़िन्दगी की दुनिया,
रही अबूझी !

15.
खुद से नाता  
जीवन का दर्शन,  
आज की शिक्षा !

- जेन्नी शबनम (21. 7. 2013)

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