Wednesday, March 20, 2013

392. स्त्री के बिना (स्त्री पर 7 हाइकु)

स्त्री के बिना 
(स्त्री पर 7 हाइकु)

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1.
अग्नि-परीक्षा  
अब और कितना 
देती रहे स्त्री !

2.
स्त्री हुई पापी 
महज देखने से 
पर-पुरुष !

3.
परों को काटा 
पिंजड़े में जकड़ा 
मन न रुका !

4.
स्त्री को मिलती 
मुट्ठी-मुट्ठी उपेक्षा 
जन्म लेते ही !

5. 
घूरती रही 
ललचाई नज़रें, 
शर्म से गड़ी !

6.
कुछ न पाया 
खुद को भी गँवाया
लाँछन पाया !

7. 
स्त्री के बिना 
बसता अँधियारा
घर श्मशान !

- जेन्नी शबनम (मार्च 8, 3013)

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