सोमवार, 1 जुलाई 2019

618. सरमाया

सरमाया   

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ये कैसा दौर आया है   
पहर-पहर भरमाया है   
कुछ माँगू तो ईमान मरे   
न माँगू तो ख़्वाब मरे   
किस्मत से धक्का मुक्की   
पोर-पोर घबराया है   
जद्दोज़हद में युग बीते   
यही मेरा सरमाया है।   

- जेन्नी शबनम (1. 7. 2019)   

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