गुरुवार, 10 अक्तूबर 2019

632. जीवन की गंध

जीवन की गंध   

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यहाँ भी कोई नहीं   
वहाँ भी कोई नहीं 
नितान्त अकेले तय करना है 
तमाम राहों को पार करना है, 
पाप और पुण्य, सुख और दुख 
मन की अवस्था, तन की व्यवस्था 
समझना ही होगा 
सँभालना ही होगा   
यह जीवन और जीवन की गंध। 

- जेन्नी शबनम (10. 10. 2019)   

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