Friday 29 May 2015

494. दर्द (दर्द पर 20 हाइकु)

दर्द 
(दर्द पर 20 हाइकु)

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1.  
बहुत चाहा    
दर्द की टकसाल
नहीं घटती !

2.
दर्द है गंगा
यह मन गंगोत्री -
उद्गमस्थल !

3.
मालूम होता
ग़र दर्द का स्रोत,
दफ़ना देते !

4.
दर्द पिघला
बादल-सा बरसा
ज़माने बाद !

5.
किस राह से
मन में दर्द घुसा,  
नहीं निकला !

6.
टिका ही रहा
मन की देहरी पे,
दर्द अतिथि !

7.
बहुत मारा
दर्द ने चाबुक से,  
मन छिलाया !

8.
तू न जा कहीं !
दर्द के बिना जीना
आदत नहीं !

9. 
यूँ तन्हा किया  
ज्यों चकमा दे दिया,  
निगोड़ा दर्द ! 

10.
ये आसमान    
दर्द से रोता रहा,  
भीगी धरती !

11.
सौग़ात मिली,
प्रेम के साथ दर्द,  
ज्यों फूल-काँटे !

12.
मन में खिला
हर दर्द का फूल
रंग अनूठे !

13.
तमाम रात
कल लटका रहा  
तारों-सा दर्द !

14.
क़ैद कर दूँ
पिंजरे में दर्द को
जी चाहता है !

15.
फुर्र से उड़ा
ज्यों ही तू घर आया
दर्द का पंछी !

16. 
ज्यों ख़ाली हुई 
मन की पगडंडी,
दर्द समाया !

17.
रोके न रुका, 
बेलगाम दौड़ता   
दर्द है आया !

18. 
प्यार भी देता
मीठा-मीठा-सा दर्द,  
यही तो मज़ा !

19. 
दर्द उफ़ना,  
बदरा बन घिरा,    
आँखों से गिरा !

20.
छुप न सका,
आँखो ने चुगली की  
दर्द है दिखा ! 

- जेन्नी शबनम (22. 5. 2015) 

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