गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

656. फूल यूँ खिले (10 हाइकु)

फूल यूँ खिले 
(10 हाइकु) 

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1.  
फूल यूँ खिले,  
गलबहियाँ डाले  
बैठे हों बच्चे !  

2.  
अम्बर रोया,  
ज्यों बच्चे से छिना  
प्यारा खिलौना !  

3.  
सूरज ने की  
किरणों की बिदाई  
शाम जो आई !  

4.  
फसलें हँसी,  
ज्यों धरा ने पहना  
ढ़ेरों गहना !  

5.  
नाम तुम्हारा  
मन की रेत पर  
गहरा लिखा !  

6.  
देख गगन  
चिहुँकती है धरा  
हो कोई सगा !  

7.  
रूठा है सूर्य  
कैकेयी-सा, जा बैठा  
कोप-भवन !  

8.  
मन झरना  
कल-कल बहता  
पा के अपना !  

9.  
मिश्री-सी बोली  
बहुत ही मँहगी,  
ताले में बंद !  

10.  
चुभता रहा  
खुरदरा-सा रिश्ता  
फिर भी जिया !  

- जेन्नी शबनम (27. 1. 2020)  
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