शुक्रवार, 1 मई 2009

56. आँखों में नमी तैरी है...

आँखों में नमी तैरी है...

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बदली घिर रही आसमान में, भादो अभी तो आया नहीं !
धुँध पसर रही आँगन में, माघ भी तो आया नहीं !
मानो ! तपते जेठ की असह्य गरमी हो
घाम से मेरे मन की नरमी पिघली है !
मानो ! सावन का मौसम बिलखता हो
आहत मन से मेरी आँखों में नमी तैरी है !

- जेन्नी शबनम (अप्रैल 8, 2009)

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